भीम प्रज्ञा न्यूज़.झुंझुनू। झुंझुनू जिले की नवलगढ़ तहसील के गांव जयसिंहपुरा पोस्ट बड़वासी में मेघवाल समाज की एक शादी इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह विवाह इसलिए खास रहा क्योंकि इसमें वर्षों से चली आ रही सामाजिक कुप्रथाओं और रूढ़ मान्यताओं को त्यागते हुए बौद्ध रीति-रिवाज से विवाह संपन्न किया गया। 6 दिसंबर 2025 को यह अनूठा विवाह गांव भारू तहसील मंडावा में आयोजित हुआ, जिसे देखने और सराहने के लिए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। गांव जयसिंहपुरा पोस्ट बड़वासी निवासी मामराज सिंह काला ने अपने सुपुत्र हवासिंह काला, भीम सेना जिलाध्यक्ष झुंझुनू का विवाह गांव भारू निवासी गुलज़ारी लाल रोहिला की सुपुत्री जिज्ञासा (एलएलबी) के साथ बौद्ध परंपरा अनुसार कराया। इस विवाह की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि दोनों पक्षों की सहमति से समठूणी, कंबल जुहारी, बहन-बहनोई द्वारा माला लाने जैसी पुरानी प्रथाओं को पूरी तरह बंद किया गया और बिना किसी आडंबर के विवाह संपन्न हुआ। विवाह समारोह में पाखंड और अनावश्यक खर्च से दूरी बनाए रखते हुए सामाजिक, आर्थिक और वैचारिक रूप से समानता, समता और बंधुत्व का संदेश दिया गया। विवाह स्थल पर बहुजन समाज में जन्मे महापुरुषों के पोस्टर लगाए गए। वर-वधु ने तथागत गौतम बुद्ध, संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और भारतीय संविधान को साक्षी मानकर एक-दूसरे को माला पहनाकर वैवाहिक जीवन में प्रवेश किया।
इस अवसर पर बौद्धाचार्य ओ.पी. बौद्ध, नवलगढ़ द्वारा बौद्ध रीति-रिवाज के अनुसार 103वां विवाह कार्यक्रम विधिवत संपन्न कराया गया। कार्यक्रम के दौरान महापुरुषों के चरणों में पुष्प अर्पित कर बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों पर चलने का संकल्प लिया गया।ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस विवाह को पाखंडवाद से मुक्त, सरल, प्रेरणादायक और समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उपस्थित लोगों ने कहा कि इस प्रकार की शादियां समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने और नई पीढ़ी को समानता व मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। यह विवाह आने वाले समय में समाज के लिए एक उदाहरण बनेगा।

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