हमारे बारे में ( About Us)
भीम प्रज्ञा न्यूज़ – सत्य, साहस और सामाजिक चेतना की पत्रकारिता
भीम प्रज्ञा केवल एक अख़बार या न्यूज़ पोर्टल नहीं है, बल्कि यह विचार, विवेक और जनचेतना से प्रेरित एक पत्रकारिता आंदोलन है। यह मंच समाज के उन सवालों को आवाज़ देता है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज़ कर दिया जाता है। हमारी पत्रकारिता सत्ता के नहीं, संविधान और समाज के प्रति जवाबदेह है। सच में भीम प्रज्ञा — एक अख़बार नहीं, एक वैचारिक आंदोलन है –
“हमने यूँ ही चलाई थी रेत में उँगलियाँ,
गौर से देखा तो एक तस्वीर बन गई।”
इसी भावभूमि से जन्मा भीम प्रज्ञा आज केवल एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि सत्य, साहस और सामाजिक चेतना से प्रेरित एक वैचारिक मंच है। यह वह पत्रकारिता है जो सत्ता के गलियारों से नहीं, समाज के अंतःकरण से संवाद करती है।
स्थापना और यात्रा
भीम प्रज्ञा मीडिया प्लेटफॉर्म की स्थापना 16 सितंबर 2009 को भारत सरकार के प्रेस महापंजीयक (RNI) द्वारा पंजीकृत “भीम प्रज्ञा” मासिक पत्रिका के रूप में हुई। सीमित संसाधनों, तकनीकी चुनौतियों और आर्थिक संघर्षों के बीच यह यात्रा शुरू हुई—जहाँ पूंजी से अधिक भरोसा विचारों पर था।
समय के साथ भीम प्रज्ञा ने अपने स्वरूप को समाज की आवश्यकता के अनुरूप बदला—
2009 : मासिक पत्रिका
2014 : पाक्षिक समाचार पत्र
2016 : साप्ताहिक अख़बार
28 मार्च 2020 से : नियमित दैनिक समाचार पत्र
12 नवंबर 2025 वह ऐतिहासिक तिथि हैजब भीम प्रज्ञा ने दैनिक अख़बार के रूप में राष्ट्रीय स्तर पहचान कायम की। यह निर्णय कोविड-19 लॉकडाउन जैसे अभूतपूर्व संकट के समय लिया गया—जब अधिकांश मीडिया संस्थान सिमट रहे थे, तब भीम प्रज्ञा ने पत्रकारिता को जनसेवा का माध्यम बनाते हुए अपनी जिम्मेदारी और अधिक मजबूती से निभाई।
संघर्ष से संस्थान तक
भीम प्रज्ञा का सफ़र गाँव के गुवाड़ से शुरू होकर राजधानी के सचिवालय तक पहुँचा है। अख़बार की गठरी कंधों पर, बारिश में भीगते पन्ने, बस स्टैंड पर घंटों का इंतज़ार—यह सब केवल स्मृतियाँ नहीं, बल्कि उस जिद के प्रमाण हैं कि कलम को झुकने नहीं देना है।
लॉकडाउन के दौरान जब प्रिंट
मीडिया संकट में था, तब भीम प्रज्ञा ने डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-पेपर और ऑनलाइन पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों से संवाद बनाए रखा। धीरे-धीरे यह मंच एक मजबूत टीम, विस्तृत पाठक वर्ग और राष्ट्रीय पहचान के साथ स्थापित हुआ।
हमारा संपादकीय दर्शन
“मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है”
यह केवल एक कॉलम नहीं, बल्कि भीम प्रज्ञा की आत्मा है।
हमारी पत्रकारिता—
सत्ता से सवाल पूछती है
समाज की विसंगतियों पर करारा प्रहार करती है
हाशिये की आवाज़ को मुख्य पृष्ठ तक लाती है
और संविधान के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहती है
हम न तो डर की पत्रकारिता करते हैं, न ही दिखावे की।
हमारी कलम सम्यक न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुता और सामाजिक चेतना के सिद्धांतों पर चलती है।
नेतृत्व (Leadership)
एडवोकेट हरेश पंवार
(प्रधान संपादक एवं सीईओ)
भीम प्रज्ञा के संस्थापक, प्रधान संपादक और सीईओ एडवोकेट हरेश पंवार एक संवेदनशील लेखक, निर्भीक पत्रकार और प्रखर वक्ता हैं। साहित्य, समाज, कानून और संविधान—इन सभी का समन्वय उनकी लेखनी में स्पष्ट दिखाई देता है।
शैक्षणिक योग्यता:
एम.ए. (हिंदी साहित्य)
एम.जे.एम.सी. (मास जर्नलिज़्म एंड मास कम्युनिकेशन)
बी.एड.
एल.एल.बी.
पशु चिकित्सा प्रबंधन में डिप्लोमा
वे मानते हैं कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नैतिक जिम्मेदारी है। उनका नियमित संपादकीय लेखन सामाजिक, राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर पाठकों को सोचने के लिए विवश करता है।
हमारा उद्देश्य (our mission)
सत्यनिष्ठ और निर्भीक पत्रकारिता
सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता
युवाओं को रचनात्मक और वैचारिक मंच
साहित्य, संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षण
जनचेतना और जनजागरण को सशक्त करना.
हमारी विशेषताएँ
दैनिक रूप से नियमित प्रकाशन
-राष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर संतुलित रिपोर्टिंग
-विचारोत्तेजक संपादकीय और विश्लेषण
-प्रिंट, डिजिटल और सोशल मीडिया पर सक्रिय उपस्थिति
-पाठकों के साथ निरंतर संवाद–भीम प्रज्ञा : आज और आगे
आज भीम प्रज्ञा एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संस्थान है—
जहाँ पत्रकारिता, साहित्य और सामाजिक चेतना एक साथ आगे बढ़ते हैं।
हजारों-लाखों पाठकों का विश्वास,
युवाओं की समर्पित टीम,
और विचारधारा की स्पष्ट दिशा—
भीम प्रज्ञा को भविष्य की पत्रकारिता का सशक्त मंच बनाती है।
हमारा विश्वास स्पष्ट है—
कलम तब तक जीवित है, जब तक वह सवाल पूछती है और सच लिखती है।

