भीम प्रज्ञा न्यूज़. चिड़ावा। भगवान के पृथ्वी पर अवतार धारण करने के अनेक कारण होते है. जिसमे सबसे प्रमुख कारण है धर्म की स्थापना करना। भगवान ने स्वयं कहा है की ज़ब ज़ब धर्म की हानि होती है तब तब धर्म पुनः स्थापना के लिए मै अवतार धारण करता हूं इसके अलावा अपने दिये वरदानों को सत्य करने अपने भक्तों के श्राप अथवा वरदानों को सत्य करने के लिए भी भगवान अवतार धारण करते है। उक्त विवेचना वाणी भूषण पण्डित प्रभुशरण तिवाड़ी ने शहर की डालमिया की ढाणी स्थित श्रीरामशरणम् बालाजी मंदिर में पितृ पक्ष के पवित्र अवसर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव प्रसंग पर व्यास पीठ से प्रवचन देते हुए की। इस अवसर पर तिवाड़ी ने भगवान श्रीराम के चरित्र को भी विस्तार से बताया तथा आह्वान किया की सभी जन मर्यादा पुरुषोत्तम के चरित्र को अपने जीवन मे उतारने का प्रयत्न करें। कथा मे भक्त राजा अंबरीश की कथा गंगा अवतरण की कथा का भी सुन्दर वर्णन किया गया।


कथा मे सजाई गयी राम विवाह एवं कृष्ण जन्म जन्मोत्सव की सजीव झांकी ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस दौरान सुंदर भजनों प्रस्तुति की प्रस्तुतियों ने वातावरण में भक्ति रस घोल दिया। इससे पूर्व कथा में यजमान प्यारेलाल स्वामी ने वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भागवत व व्यास पूजन किया। इस दौरान नन्द किशोर चोटिया, महेन्द्र सिंह शेखावत, प्रभुदयाल वर्मा, लोकेश स्वामी, लोकेन्द्र सिंह तंवर, नीरज शर्मा, अजय कुमार शर्मा, सुभाष धाभाई,महेन्द्र सैनी मनोज शर्मा,मंगतूराम सैनी,रामनिवास जांगीड, राजेन्द्र कुमार,रघुवीर सिंह तंवर मखन लाल वर्मा,सज्जन कुमार सैनी,सोनू सिंह,विष्णु जांगीड सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला- पुरुष मौजूद रहे।






