भीम प्रज्ञा न्यूज़. चिड़ावा। शहर की डालमिया की ढाणी स्थित श्रीरामशरणम् बालाजी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास वाणी भूषण प्रभुशरण तिवाड़ी ने मनुष्य जीवन के उद्देश्य और आत्मा के स्वरूप पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस शरीर को हम अपना समझते हैं, वह वास्तव में हमारा नहीं है, बल्कि यह केवल एक रथ है, जिसकी सारथी हमारी आत्मा है। तिवाड़ी ने भजन "जरा जीव विचारों मन मे तेरी आत्मा का कैसा रूप है, ये देह नहीं है तेरी आत्मा तू तो सतचित आनंद रूप है" का उदाहरण देते हुए कहा कि जो कुछ भी हम देख सकते हैं, वह हम नहीं हो सकते। द्रष्टा (देखने वाला) और दृश्य (जो देखा जा रहा है) कभी एक नहीं हो सकते। हमारा शरीर दृश्य है, जबकि हम स्वयं, जो देखने वाले हैं, वह आत्मा हैं। इस प्रकार, यह शरीर हमारा नहीं है, बल्कि हम स्वयं आत्मा हैं। उन्होंने आगे कहा कि आत्मा परमात्मा का अंश है, ठीक उसी तरह जैसे पानी की एक बूँद विशाल समुद्र का अंश होती है।


उन्होंने जोर देकर कहा कि मानव जीवन का अंतिम और एकमात्र लक्ष्य भगवान की प्राप्ति है। हमारा शरीर एक रथ की तरह है, और हमारी आत्मा इसका सारथी है। इस रथ का उपयोग करके सारथी को भगवान तक पहुँचना है। कथा के दौरान, भगवान श्रीकृष्ण और उनके मित्र सुदामा की सजीव झाँकी प्रस्तुत की गई, जिसने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मधुर भजनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा से पूर्व यजमान प्यारे लाल स्वामी ने सपत्नीक परिवार के सदस्यों के साथ पंडित गोपाल शर्मा के वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भागवत व व्यास पूजन किया। इस दौरान शंकरलाल सैनी, अमरसिंह तंवर, रामनिवास जांगीड,नीरज शर्मा,राहुल शर्मा,बाबूलाल शर्मा,सुशील मिश्रा, महेन्द्र सिंह शेखावत, प्रभुदयाल वर्मा, लोकेश स्वामी, अजय कुमार शर्मा, सुभाष धाभाई,महेन्द्र सैनी मनोज शर्मा,मंगतूराम सैनी, राजेन्द्र कुमार,रघुवीर सिंह तंवर मखन लाल वर्मा,सज्जन कुमार सैनी,सोनू सिंह,विष्णु जांगीड सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला- पुरुष मौजूद रहे।

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