सोहनलाल परिहार
भीम प्रज्ञा न्यूज़.बीकानेर।
खेजड़ला रोही नोखा दईया में पर्यावरण संघर्ष समिति का धरना लगातार जारी है। समिति का यह धरना मंगलवार को 524वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जबकि पर्यावरण संघर्ष समिति का क्रमिक धरना 159वें दिन भी जारी रहा। धरने में वक्ताओं ने खेजड़ी सहित मरुस्थलीय पर्यावरण को बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। धरने पर मौजूद नेयवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन (एनएलसी) बरसिंगसर के सेवानिवृत्त महाप्रबंधक अभियंता आंबाराम इणखिया ने कहा कि खेजड़ी के अलावा अन्य वनस्पतियां भी मरुस्थल के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सोलर प्लांटों की स्थापना से पर्यावरण को भारी नुकसान होगा, जिसकी भरपाई करना भविष्य में बेहद कठिन साबित होगा। इणखिया ने अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि बरसिंगसर क्षेत्र में उनके समय में बहुत कम खेजड़ियां काटी गई थीं, बल्कि हजारों खेजड़ी व अन्य वृक्ष लगाकर पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई थी। उन्होंने अरावली पर्वतमाला को बचाने को भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
धरने में पहुंचे वरिष्ठ अधिवक्ता रक्षपाल बिशनोई ने कहा कि आगामी दो फरवरी को होने वाला महापड़ाव खेजड़ी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा तय करेगा। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से इस आंदोलन से जुड़ने का आह्वान किया। मंगलवार को धरने पर शिवदान मेघवाल, रामदेव मेघवाल कोलासर, सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार हनुमाना राम बिशनोई, रामप्रताप वर्मा, ताहिर खान, गोपीचंद धायल, गंगाबिशन सियाग, महेंद्र भादू, पट्टू प्रेमरतन जोशी, टीकूराम चौधरी, रामसिंह राहड़, गोपाल सियाग रासीसर, बुधराम सीगड़, बुधराम सियाग, लक्ष्मण सिंह शेखावत, राजेंद्र सिंह राठौड़, भंवरलाल जाखड़, भीखाराम मेघवाल, कॉमरेड मूलचंद खत्री, कुम्भाराम मेघवाल, रामलाल मेघवाल, जगदीश मेघवाल, विष्णु कुमार मेघवाल, टीकूराम जयपाल, अरुण कुमार वैध, मदन सिंह शेखावत, हेमंत किराड़ू नेताजी, पूनमराम रिख सहित अनेक पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे। धरने में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि खेजड़ी और मरुस्थलीय पर्यावरण की रक्षा के लिए यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक ठोस समाधान नहीं निकलता।
