भीम प्रज्ञा कविता
सुखद संयोग
तुम्हारे जीवन का सबसे सुखद संयोग
जब प्रेम के प्रलेपन से
सबसे दुखद संयोग बन जाये
तब जान लेना की तुमने प्रेम को पूर्ण जिया
अब प्रेम से मोक्ष ही तुम्हारा मोक्ष है …
ऐसे अजब संयोगों की अर्थी तुम काशी ले जाना
मणिकर्णिका घाट की किसी जलती बेपरवाह चिता में
अपनी सारी वेदना पीड़ा कष्ट और परवाहे राख कर आना
बैठना वही !!
घंटों देखना उस चिता को जलते हुए
महसूस करना उसकी तपती आँच को अपने चेहरे पर
और अपने आँसू उसी से सदा के लिए सुखा आना
प्रेम तो तब भी न मिट पाएगा तुम्हारे अन्तर्मन से
मुट्ठी भर राख आते आते अपने माथे पर मल
अपने प्रेम को अंतिम श्रद्धांजलि दे आना
डॉ मनीला श्रीवास्तव,जयपुर
