मॉक वोटिंग के माध्यम से बच्चों को मतदान प्रक्रिया की जानकारी देते हुए संस्था निदेशक अनिल दाधी
एमआरएस प्रणामी स्कूल की छात्रा ई-वोटिंग करतीं हुई
संस्था प्रधान के कंट्रोल रूम कार्यालय में चुनावी ई-वोटिंग की प्रकिया को सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से मॉनिटरिंग करते हुए निदेशक अनिल दाधीच
चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित कमेटी के सदस्य वोटर से ई-वोटिंग की जानकारी लेते हुए तथा मतदान प्रक्रिया की जांच करते हुए संस्था सचिव अरविंद दाधीच एवं अन्य सदस्य
एम आर एस प्रणामी स्कूल में ई-वोटिंग में मतदान करने को लेकर लाइन में से लगे दिखाई दिए मतदाता
डिजिटल मतदान, कंट्रोल रूम, सीसीटीवी निगरानी और अनुशासित प्रक्रिया ने रचा लोकतंत्र का जीवंत पाठ
भीम प्रज्ञा न्यूज़, चिड़ावा। लोकतंत्र केवल पुस्तकों में पढ़ाया जाने वाला विषय नहीं, बल्कि उसे जीकर सीखना भी उतना ही जरूरी है—इस सोच को साकार करते हुए चिड़ावा स्थित एमआरएस प्रणामी स्कूल ने मतदाता साक्षरता की दिशा में एक ऐतिहासिक और अनुकरणीय पहल की। विद्यालय परिसर में आयोजित छात्र संघ चुनाव में विद्यार्थियों ने ई-वोटिंग (डिजिटल मतदान) के माध्यम से अपनी छात्र सरकार का गठन किया। यह आयोजन न केवल बच्चों के लिए रोमांचक अनुभव रहा, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक समझ देने वाला व्यावहारिक लोकतंत्र पाठ भी साबित हुआ। विद्यालय प्रशासन ने परंपरागत मतपेटी की जगह डिजिटल बोर्ड एवं ऑनलाइन मतदान प्रणाली को अपनाया। प्रत्येक विद्यार्थी ने तय क्रम में, बिना किसी दबाव और प्रभाव के, गोपनीय एवं स्वतंत्र मतदान किया। विद्यार्थियों को कुल छह प्रमुख पदों—अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, खेल मंत्री, सांस्कृतिक मंत्री, शिक्षा मंत्री एवं वित्त मंत्री—के लिए मतदान का अधिकार दिया गया, जिससे वे सरकार गठन की पूरी प्रक्रिया को समझ सकें।
निदेशक कार्यालय बना कंट्रोल रूम, सीसीटीवी से हर पल पर नजर
चुनाव की पारदर्शिता को नई ऊंचाई देते हुए विद्यालय निदेशक अनिल दाधीच ने अपने कार्यालय से कंट्रोल रूम संचालित किया। विद्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से पूरी चुनावी प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी गई। मतदान केंद्र, कक्षाएं और गतिविधियों पर नजर रखकर यह सुनिश्चित किया गया कि चुनाव पूर्णतः निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से संपन्न हो। इस व्यवस्था ने बच्चों को यह समझाया कि लोकतंत्र में निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी महत्वपूर्ण होती है।
विद्यालय स्तर पर बना ‘चुनाव आयोग’
वास्तविक चुनावों की तर्ज पर विद्यालय में चुनाव आयोग का गठन किया गया। चुनाव आयोग में संस्था सचिव अरविंद दाधीच, नीतू शर्मा, लेफ्टिनेंट आर.डी. शर्मा, संजय बागड़ी, आरती शर्मा एवं शंकरलाल भारतीय शामिल रहे। इन्होंने बच्चों को नामांकन, मतदान, अनुशासन, आचार संहिता और मताधिकार की जिम्मेदारी की जानकारी दी।
उपाध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचन
चुनाव की एक खास बात यह रही कि उपाध्यक्ष पद के लिए केवल एक ही नामांकन आया, जिसके चलते नोमित वर्मा को निर्विरोध उपाध्यक्ष घोषित किया गया। अन्य पदों पर उम्मीदवारों के बीच रोचक और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जिससे पूरा विद्यालय चुनावी माहौल से जीवंत हो उठा।
बच्चों ने सीखा वोट की ताकत
मतदान के बाद विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से उन्हें वोट की अहमियत, जिम्मेदारी और लोकतंत्र की ताकत का वास्तविक अर्थ समझ में आया। कई बच्चों ने कहा कि वे आगे चलकर परिवार और समाज में मतदान के प्रति जागरूकता फैलाएंगे।
शिक्षा के साथ नागरिक संस्कारों की मजबूत नींव
विद्यालय की इस अनूठी पहल की अभिभावकों, शिक्षाविदों और समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा जमकर सराहना की जा रही है। एमआरएस प्रणामी स्कूल का यह प्रयास यह साबित करता है कि यदि बच्चों को सही उम्र में लोकतंत्र की व्यावहारिक शिक्षा दी जाए, तो भविष्य में देश को जागरूक, जिम्मेदार और सशक्त नागरिक मिल सकते हैं। यह आयोजन निस्संदेह मतदाता साक्षरता, डिजिटल इंडिया और नागरिक जिम्मेदारी की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।

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