भीम प्रज्ञा न्यूज़.रेवाड़ी। संविधान निर्माता, समाज सुधारक और भारतरत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जी का 70वां महापरिनिर्वाण दिवस रविवार 6 दिसंबर 2025 को सेवा स्तम्भ जिला इकाई एवं धम्म भूमि रेवाड़ी द्वारा पूरे श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अंबेडकर चौक रेवाड़ी पर बाबा साहेब को श्रद्धा सुमन पुष्प अर्पित कर नमन किया गया। इसके उपरांत, सेवा स्तम्भ डॉ. बी आर अंबेडकर पार्क एवं लाइब्रेरी, मॉडल टाउन रेवाड़ी में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मौजूद सभी साथियों ने बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और कैंडल प्रज्वलित कर बुद्ध वंदना, त्रिशरण और पंचशील ग्रहण किया। सभी ने सामूहिक रूप से श्रद्धांजलि अर्पित कर बाबा साहेब को नमन किया। सेवा स्तम्भ के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष प्रधान भगतसिंह बौद्ध ने अपने संबोधन में बताया कि डॉ. अंबेडकर ने छह दिसंबर 1956 को अंतिम सांस ली थी, जिसे ‘महापरिनिर्वाण दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने अपना पूरा जीवन गरीबों, दलितों और समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए न्यौछावर कर दिया और सामाजिक छुआछूत और जातिवाद के खात्मे के लिए आंदोलन किए। सतबीर गोठवाल ने बाबा साहेब की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू आर्मी कैंटोनमेंट में हुआ था और वे 32 डिग्रियों के साथ 9 भाषाओं के सबसे बेहतर जानकार थे। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में मात्र 2 साल 3 महीने में 8 साल की पढ़ाई पूरी की थी। उन्होंने यह भी बताया कि 14 अक्टूबर 1956 को बाबा साहेब ने नागपुर में बौद्ध धर्म को अपना लिया था। सेवा स्तम्भ के पूर्व लीगल एडवाइजर डॉ. कमल निम्बल ने बताया कि डॉ. अंबेडकर ने एससी वर्ग को समानता दिलाने के लिए जीवन भर संघर्ष किया। उन्होंने 1932 में महात्मा गांधी के आमरण अनशन के बाद अपनी पृथक निर्वाचिका की मांग वापस ले ली, जिसके बदले में एससी समुदाय को सीटों में आरक्षण, मंदिरों में प्रवेश और छुआछूत खत्म करने का अधिकार मिला।
एडवोकेट राजकुमार जलवा ने बताया कि बाबा साहेब ने अछूतों के प्रति सामाजिक भेदभाव के खिलाफ और निचली जातियों के उत्थान के लिए अथक संघर्ष किया था। अजीत सिंह ने जानकारी दी कि डॉ. अंबेडकर को मरणोपरांत वर्ष 1990 में ‘भारतरत्न’ से सम्मानित किया गया था। पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी धर्मवीर बलडोदिया ने बाबा साहेब के शिक्षा संबंधी विचारों पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है। सहसचिव नरेंद्र मेहरा ने बाबा साहेब के इस विचार को दोहराया कि शिक्षा पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं के लिए भी उतनी ही आवश्यक है। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में बाबा साहेब के अनुयायी एकत्रित हुए, जिनमें मुख्य रूप से भगत सिंह सांभरिया, कांशी राम खींची, एडवोकेट राजकुमार जलवा, अजीत सिंह प्रधान, सत प्रकाश नैचाना, भगत सिंह, मानसिंह, एडवोकेट कमल निम्भल, एडवोकेट संजीव कुमार, एडवोकेट दीपक कुमार, बाबू लाल यादव, डॉ. सतपाल चोपड़ा, डॉ. आर के शर्मा सहित बड़ी संख्या में साथी उपस्थित रहें।
