राज्य इकाइयों का परिचय और राष्ट्रीय मिशन पर गहन चर्चा
-बैकवर्ड समाज की राष्ट्रीय कन्वेशन में जाति जनगणना व निजी क्षेत्र में आरक्षण पर राष्ट्रीय रणनीति बनाने पर हुआ मंथन: एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल
विजय रंगा(ब्यूरो चीफ)
भीम प्रज्ञा न्यूज़.नई दिल्ली/हिसार।
ऑल इंडिया बैकवर्ड क्लासेस फेडरेशन (आईआईबीसीएफ) की नेशनल सोशल जस्टिस समिट राजधानी दिल्ली के राजा राममोहन रॉय हॉल में ऐतिहासिक रूप से सम्पन्न हुई। कार्यक्रम की शुरुआत देशभर से पहुँची केंद्र और राज्य इकाइयों के पदाधिकारियों के परिचय से हुई जिसमें विभिन्न राज्यों द्वारा किए गए संगठनात्मक विस्तार, सदस्यता अभियान और जमीनी स्तर की गतिविधियों की विस्तृत प्रस्तुतियाँ शामिल रहीं। समिट के मुख्य वक्ता फेडरेशन के संस्थापक अध्यक्ष एवं आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस वी. ईश्वरैया रहे। प्रतिनिधियों ने बताया कि शिक्षा, आरक्षण जागरूकता, कानूनी सहायता और सामाजिक भागीदारी बढ़ाने के लिए संगठन ने कई महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाया है।समिट में आईआईबीसीएफ के उद्देश्य, विज़न और मिशन को गांव, ब्लॉक और जिला स्तर तक पहुंचाने की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कन्वेशन के मुख्य अतिथि रिटायर्ड जस्टिस वी ईश्वरैया ने अपने संबोधन में कहा की सामाजिक न्याय के विचार को जनांदोलन में बदलने के लिए युवाओं, महिलाओं, छात्रों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में संगठन से जोड़ना होगा।उन्होंने कहा कि जब तक 87% बहुजन आबादी को उनकी जनसंख्या के अनुरूप अधिकार नहीं मिलते लोकतांत्रिक समानता अधूरी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय देश के संविधान की मूल आत्मा है और आरक्षण व प्रतिनिधित्व पर हो रहे हमले न केवल बहुजन समाज बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा हैं। उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने, जातीय भेदभाव समाप्त करने और अवसरों की समानता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।समिट के मुख्य सत्र में जाति जनगणना, निजी क्षेत्र में आरक्षण और आबादी आधारित भागीदारी पर गहन विचार-विमर्श हुआ। देशभर के एससी–एसटी–ओबीसी संगठनों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों और छात्र नेताओं ने प्रतिनिधित्व और समान अवसर के मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार की।फेडरेशन के राष्ट्रीय कानूनी सलाहकार एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि समिट में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुए। इनमें 2026 की जाति जनगणना में वैज्ञानिक व पारदर्शी गणना सुनिश्चित करना, निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करवाने के लिए राष्ट्रीय अभियान शुरू करना, तथा विधायिका,न्यायपालिका,कार्यपालिका में आबादी आधारित प्रतिनिधित्व की मांग को सशक्त करना प्रमुख रहा। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 15(5) और 16(4) में संशोधन कर ओबीसी को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने की मांग को और तीव्र करने का निर्णय लिया गया।इसके अलावा स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों की भागीदारी को अनिवार्य बनाने और मंडल कमीशन की शेष सिफारिशों को तत्काल लागू करने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।प्रतिनिधियों ने कहा कि बहुजन समाज का देश निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है लेकिन संवैधानिक अधिकारों और प्रतिनिधित्व की कमी अभी भी बनी हुई है जिसे दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट आंदोलन की आवश्यकता है। एडवोकेट खोवाल ने कहा कि यह समिट सामाजिक न्याय की दिशा में एक निर्णायक कदम है और आने वाले वर्षों में आईआईबीसीएफ बहुजन समाज की आवाज़ को और अधिक संगठित व प्रभावी रूप देगा। इस मौके पर कन्वेशन में हंसराज जांगिड वर्किग प्रेसिडेंट ,हरीश मंडल जनरल सेक्रेटरी,श्रीकांत पाल जनरल सेक्रेटरी सहित ऑल इंडिया बैकवर्ड क्लासेज फेडरेशन की समस्त कार्यकारिणी ने भी अपना संबोधन दिया।
