
भीम प्रज्ञा न्यूज़.चिड़ावा।
शिक्षा, संस्कार और संस्कृति की त्रिवेणी डालमिया विद्या मंदिर, चिड़ावा ने 6 दिसंबर को सायं 5 बजे से अपना 101वाँ स्थापना दिवस अत्यंत वैभव और उल्लास के साथ मनाया। विद्यालय की शताब्दी-पार यात्रा का यह उत्सव अतीत की स्मृतियों, वर्तमान के गौरव और भविष्य की आशाओं का जीवंत संगम बनकर उभरा। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय संरक्षक पराग डालमिया, अनुराग डालमिया, जयंती डालमिया, गौतम डालमिया, अनुपमा डालमिया, मक्खन डालमिया और मनीष अग्रवाल जैसे गणमान्य अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की वाणी-वंदना और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके बाद विद्यालय प्राचार्य शक्ति सिंह, प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप कुल्हार और प्रधानाध्यापिका नमिता चौधरी ने सम्मानित अतिथियों का शॉल और साफा पहनाकर सत्कार किया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रमों—समूह नृत्य, नाट्य मंचन और देशभक्ति गीतों—ने भावनाओं का इंद्रधनुष बिखेर दिया। इन प्रस्तुतियों ने शांति, मानवता और विश्व-बंधुत्व का सशक्त संदेश दिया। कार्यक्रम का हृदयस्पर्शी आकर्षण रहा “सीज़ फायर” नाट्य मंचन, जिसने मंच को करुणा और चेतना का संगम बना दिया। युद्ध की विभीषिका और मानवीय त्रासदी का यह हृदयविदारक दृश्य दर्शकों को मौन कर गया। प्रस्तुति ने यह मार्मिक संदेश दिया कि वास्तविक विजय हथियारों से नहीं, बल्कि संवेदना, संवाद और सौहार्द से प्राप्त होती है। हर दृश्य में देशभक्ति और वीरता की गूंज थी, जिसने दर्शकों के हृदय पर अमिट छाप छोड़ी। संस्था के कर्णधार पराग डालमिया ने अपने प्रेरक उद्बोधन में विद्यार्थियों को कर्मठता, अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों को जीवन के मूल मंत्र के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उनकी ओजस्वी वाणी ने छात्र-छात्राओं में आत्मविश्वास, संकल्प और राष्ट्र-निर्माण की चेतना का बीज बोया। विद्यालय परिसर में आयोजित कला गैलरी, विज्ञान प्रदर्शनी और सृजनात्मक प्रदर्शनी विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा और वैज्ञानिक दृष्टि का सजीव प्रमाण बनीं। नवाचार की कल्पनाशील झलक ने आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह में उन विद्यार्थियों का अभिनंदन किया गया, जिन्होंने अपनी मेधा और परिश्रम से 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में श्रेष्ठ अंक अर्जित किए, साथ ही राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में पराक्रम का परचम लहराकर विद्यालय का गौरव बढ़ाया। समारोह के अंत में विद्यालय के मार्गदर्शक प्राचार्य शक्ति सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों, अभिभावकों, पत्रकारों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन विद्यालय की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा-पुंज बनकर प्रकाश फैलाता रहेगा। समारोह में अभिनव चतुर्वेदी, नंदिनी चतुर्वेदी, अरुण चौधरी, डॉ. हनुमान प्रसाद, विजय मसीह, गुरुनाम सिंह, भूपेन्द्र पालीवाल, अरुण पुष्करणा, अनिल गुप्ता, राजन और संजय सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों, विद्यालय परिवार के समस्त स्टाफ और अभिभावक सदस्यों की उपस्थिति शोभनीय रही।
‘वन्दे मातरम्’ गीत के साथ ही यह ऐतिहासिक संध्या अविस्मरणीय स्मृतियों के पुष्प बिखेरती हुई संपन्न हुई और विद्यालय के इतिहास में एक स्वर्णाक्षरों में अंकित अध्याय बन गई।
