-बीएलओ का कहना है कि हरियाणा में अन्तिम बार एसआईआर (स्पेशल इंटेसिव रिविजन) वर्ष 2002 में हुआ था
विजय रंगा (ब्यूरो चीफ)
भीम प्रज्ञा न्यूज़.फतेहाबाद। हरियाणा में बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) द्वारा वर्ष 2002 की वोटर लिस्ट से 2024 की वोटर लिस्ट का मिलान कर मतदाताओं का सत्यापन किया जा रहा है। इसके तहत बीएलओ फोन कॉल और घर-घर जाकर वोटरों का वेरिफिकेशन कर रहे हैं। बीएलओ का कहना है कि हरियाणा में अंतिम बार एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) वर्ष 2002 में हुआ था, इसलिए उसी आधार वर्ष को मानकर मौजूदा वोटर लिस्ट का मिलान किया जा रहा है। हालांकि, इस प्रक्रिया से उन मतदाताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिनके पिता, दादा, चाचा या अन्य पारिवारिक सदस्यों के वोट वर्ष 2002 के बाद बने हैं, या जिनका परिवार दूसरे राज्यों से आकर फतेहाबाद में बसा है। शहर की एक कॉलोनी का ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां एक बीएलओ ने एक मतदाता को फोन कर उसके पिता की वोटर आईडी भेजने को कहा। मतदाता ने अपने पिता की वर्ष 2004 में बनी वोटर आईडी भेज दी, लेकिन बीएलओ ने इसे अस्वीकार करते हुए 2002 से पहले की वोटर आईडी उपलब्ध कराने को कहा। इस पर मतदाता ने बताया कि उनके पिता का वोट ही 2004 में बना था। इसके बाद बीएलओ ने पूछा कि उनके पिता फतेहाबाद कब आए थे। जवाब मिला कि वे वर्ष 1998 में फतेहाबाद आए थे। इस पर बीएलओ ने दादा की वोटर आईडी मांगी। मतदाता ने बताया कि उनके दादा राजस्थान में रहते हैं और जब वह छोटा था तब ही उसके दादा की मृत्यु हो गई थी इसके बाद बीएलओ ने परदादा, चाचा या ताऊ की वोटर आईडी की प्रति उपलब्ध कराने को कहा । मतदाता ने मजबूरी जताते हुए बताया कि उनके रिश्तेदार अलग-अलग प्रदेशों में रहते हैं और हरियाणा में उनका वोट नहीं है। बीएलओ ने बताया कि 2002 से पहले की किसी वोटर आईडी से चेन जोड़नी जरूरी है, ताकि यह प्रमाणित हो सके कि मतदाता कहां से आया है और उसका नाम वोटर लिस्ट में मिलान किया जा सके। मतदाता ने स्पष्ट किया कि उनके
पास 2002 से पहले की न तो पिता, दादा, परदादा और न ही किसी अन्य रिश्तेदार की वोटर आईडी उपलब्ध है । इस पर बीएलओ ने किसी तरह तलाश कर आईडी उपलब्ध कराने की बात कही। इस पूरी प्रक्रिया से खासतौर पर वे मतदाता परेशान हैं, जो दूसरे राज्यों से आकर फतेहाबाद में बसे हैं और जिनके परिजनों का 2002 से पहले वोटर रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ था । बीएलओ का कहना है कि वे ‘चुनाव आयोग की गाइडलाइंस के अनुसार ही वह मिलान कर रहे हैं। जिन मतदाताओं का मिलान हो रहा है, उनका सत्यापन किया जा रहा है, जबकि जिनका मिलान नहीं हो पा रहा, उन्हें फिलहाल अलग श्रेणी में रखा जा रहा है। ऐसे मामलों पर चुनाव आयोग की आगे की गाइडलाइंस आने के बाद फैसला लिया जाएगा । स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रक्रिया में स्पष्ट दिशा-निर्देशों की कमी के कारण आम मतदाता मानसिक तनाव में है और उन्हें अपने मताधिकार को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
