*पीसीसी छोड़कर सीधे सीसी डालने पर भड़के स्थानीय लोग, विभागीय जवाबदेही पर उठे सवाल।*
मनोज खंडेलवाल
भीम प्रज्ञा न्यूज़.मंडावर।
मंडावर शहर में गांधी चौक से थोबड़ी चौराहे तक चल रहा सड़क निर्माण कार्य सोमवार को एक बार फिर विवाद में आ गया, जब गढ़ रोड स्थित जैन पेट्रोल पंप के पास ठेकेदार द्वारा पुरानी पक्की सड़क की खुदाई के बाद बिना पीसीसी डाले सीधे सीसी परत बिछाई जा रही थी। यह जानकारी जैसे ही आसपास की कॉलोनियों में फैली, स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे और निर्माण की तकनीकी प्रक्रिया पर खुलकर आपत्ति जताई। लोगों का कहना था कि गांधी चौक से खंडेलवाल धर्मशाला तक बने हिस्से में विभाग ने तय मानक के अनुसार पहले खुदाई, फिर बेस लेयर के रूप में पीसीसी और अंत में सीसी डालकर सड़क तैयार की थी, लेकिन यहाँ गुणवत्ता से समझौता करते हुए पीसीसी को पूरी तरह छोड़ दिया गया है। भीड़ में मौजूद लोगों ने जब मौके पर तैनात पीडब्ल्यूडी के कनिष्ठ अभियंता करणसिंह राजपूत से जवाब मांगा तो उन्होंने कोई स्पष्ट विवरण देने से इंकार कर दिया और बढ़ते आक्रोश के बीच वहाँ से निकल गए। इससे लोगों में और नाराजगी फैल गई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार और विभागीय कार्मिकों की मिलीभगत से मोटा लाभ कमाने के उद्देश्य से निर्माण मानकों को दरकिनार किया जा रहा है, जबकि सड़क की गुणवत्ता और उपयोगिता सीधे तौर पर जनता के हित से जुड़ी हुई है।
उधर विभाग के एक्सईएन चंद्रप्रकाश मीना से फोन द्वारा जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने बिना पूरी बात सुने ही कॉल काट दी, जिससे विभागीय पारदर्शिता पर एक और सवाल खड़ा हो गया। हालांकि अधिशासी अभियंता बृजमोहन मीना ने फोन पर हुई वार्ता में कहा कि विभागीय एस्टीमेट के अनुसार जितनी जगह में पीसीसी डाली जानी थी, वह पूरी डाली जा चुकी है और आगे की लेयर में केवल खुदाई के बाद सीसी ही प्रावधानित है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का मत है कि जमीन की स्थिति और पूर्व निर्माण पैटर्न को देखते हुए पीसीसी आवश्यक है अन्यथा सड़क की मजबूती और आयु पर गंभीर असर पड़ेगा। लोग यह भी कह रहे हैं कि गांधी चौक की तरह बिना किसी भेदभाव और बिना कमी–कौताही के ही पूरे रूट पर एक समान मानक लागू किया जाए, तभी निर्माण कार्य को आगे बढ़ने दिया जाएगा। लोगो का कहना है कि यदि पीसीसी डालकर ही सीसी सडक नहीं डाली गई तो वे इस सड़क को आगे बनने नहीं देंगे और मामले की शिकायत उच्च स्तर पर लिखित रूप में व ज्ञापन के रूप में भी सौंपेंगे।

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