सुरेन्द्र सिंह हरसोलिया
भीम प्रज्ञा न्यूज.जयपुर।
राजस्थान में बंद पड़े छात्रसंघ चुनावों को पुनः शुरू करवाने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने छात्रसंघ चुनाव को छात्र-छात्राओं का मौलिक अधिकार बताते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। यह निर्णय प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। एनएसयूआई प्रदेशाध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि राजस्थान की भाजपा सरकार द्वारा छात्रसंघ चुनाव नहीं करवाने को लेकर दिए गए बयान अत्यंत निंदनीय और अलोकतांत्रिक हैं। छात्रसंघ चुनाव लोकतंत्र की पहली पाठशाला होते हैं, जहां से छात्र नेतृत्व, सामाजिक सरोकार और संवैधानिक मूल्यों को समझते हैं।
विनोद जाखड़ ने कहा कि वर्तमान में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्रसंघ चुनावों को रोककर छात्र-छात्राओं के संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला हनन किया जा रहा है। छात्रसंघ चुनावों के माध्यम से चुने गए प्रतिनिधि ही छात्रों की समस्याओं को प्रशासन के समक्ष मजबूती से रख सकते हैं, लेकिन चुनाव बंद होने से छात्रों की आवाज को दबाया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि एनएसयूआई सदैव छात्र हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रही है और आगे भी छात्रसंघ चुनाव बहाल करवाने के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेगी। हाईकोर्ट की यह टिप्पणी सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए स्पष्ट संदेश है कि छात्रसंघ चुनाव रोकना असंवैधानिक है। अंत में उन्होंने मांग की है कि राज्य सरकार तत्काल प्रभाव से छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया शुरू करे और छात्र-छात्राओं को उनके अधिकार वापस दिलाए।
