-इतिहास की सही समझ ही राष्ट्र सेवा की पहली सीढ़ी: बराला
रजत विजय रंगा,
भीम प्रज्ञा न्यूज़.टोहाना। राज्यसभा सांसद श्री सुभाष बराला ने कहा कि यदि हम समाज और देश में सही अर्थों में बड़ा योगदान देना चाहते हैं, तो हमें अपने इतिहास की गहन और प्रामाणिक समझ होना अत्यंत आवश्यक है। जब तक हम अपने अतीत के बलिदानों और संघर्षों को सही संदर्भ में नहीं समझेंगे, तब तक राष्ट्र सेवा की भावना अधूरी रहेगी।सांसद शुक्रवार को गुरुद्वारा गुरु नानक धर्मशाल साहिब, टोहाना में वीर बाल दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुँचे। उन्होंने गुरुद्वारा में मत्था टेककर क्षेत्र व देश की खुशहाली की अरदास की और संगत को गुरु परंपरा के महान आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इससे पूर्व उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए बस स्टैंड, टोहाना में पौधारोपण किया और कहा कि प्रकृति की रक्षा करना भी सेवा और बलिदान की भावना का ही विस्तार है। राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु नानक देव जी ने पूरी दुनिया को भारतीय संस्कृति, मानवता, समानता और भाईचारे का संदेश दिया। उनकी यात्रा ने साबित किया कि सुधार और जागरण का मार्ग प्रेम, करुणा और सत्य से प्रशस्त होता है। लेकिन इसी कालखंड में भारत पर बाबर के आक्रमण शुरू हो चुके थे। आगे चलकर नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी ने पूरे देश में भ्रमण कर धर्म, संस्कृति और आत्मसम्मान की अलख जगाई। उनका बलिदान केवल सिख धर्म के लिए नहीं, बल्कि समूची मानवता और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए था और यह भारतीय इतिहास का एक महान अध्याय है। सांसद ने कहा कि इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दशम गुरु, श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अभूतपूर्व कार्य किए। उनकी शिक्षाओं में आध्यात्मिक ज्ञान और शस्त्र का संतुलन देखने को मिलता है, जो राष्ट्र रक्षा और आत्मरक्षा का प्रेरक संदेश देता है। सांसद ने कहा कि सन् 1705 में आनंदपुर साहिब में मुगल सेना ने गुरु गोविंद सिंह जी पर भीषण आक्रमण किया, जिसमें अनेक सिख योद्धाओं ने धर्म और न्याय की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति दी। इसी संघर्ष के दौरान छोटे साहिबजादे , साहिबजादा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी को गिरफ्तार कर लिया गया। मुगल शासकों ने उन्हें धर्म छोड़ने के बदले जीवनदान देने का प्रस्ताव दिया, लेकिन गुरु साहिब की शिक्षा से संस्कारित साहिबजादों ने इतनी कम उम्र में भी साहस, सत्य और संयम का अद्भुत परिचय देते हुए धर्म परिवर्तन अस्वीकार कर दिया और दीवार में जीवित चिनवाया जाना स्वीकार किया। सांसद ने कहा कि इतनी छोटी आयु में दिखाई गई ऐसी वीरता और धर्मनिष्ठा का उदाहरण विश्व इतिहास में दुर्लभ है और यह दिन विशेष रूप से छात्रों और युवाओं के लिए प्रेरणा का अनंत स्रोत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का यह निर्णय ऐतिहासिक है, जिन्होंने साहिबजादों के बलिदान की स्मृति को अमर बनाने के लिए ‘वीर बाल दिवस’ घोषित किया। यह दिन युवाओं में राष्ट्रभक्ति, साहस, संस्कार और सेवा की भावना को नई ऊर्जा देता है।
कार्यक्रम में उपस्थित विद्यालयी बच्चों को संबोधित करते हुए सांसद ने कहा कि आप देश का भविष्य हैं, साहिबजादों का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य, साहस और संस्कार से बड़ी कोई ताकत नहीं होती। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें।
कार्यक्रम में एसडीएम आकाश शर्मा, रमन मड़िया, टीएम विनोद कुमार, गुरमीत सिंह आहूजा, सन्नी मेहता, बिट्टू, जसकिरत आहूजा, नितिन मेहता, काला प्रधान, विल्सन नैन, रविंद्र मेहता, राकेश सैनी, कृष्ण कुमार, जोरा सिंह समैंन, दलजीत कन्हड़ी सहित गुरुद्वारा प्रबंधन समिति सदस्य और विद्यालयों के छात्र-शिक्षक, स्थानीय गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही।
