ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर है विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन अधिनियम- सुभाष बराला
-नए कानूनों से मजबूत होगा भारत का भविष्य
रजत विजय रंगा
भीम प्रज्ञा न्यूज़.फतेहाबाद। राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने कहा कि विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) केंद्र सरकार की एक दूरदर्शी और ऐतिहासिक पहल है, जो ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। यह मिशन ग्रामीण युवाओं, महिलाओं, किसानों और कमजोर वर्गों को स्थायी रोजगार, सुनिश्चित आय और सम्मानजनक जीवन से जोडऩे का मजबूत आधार बनेगा। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प को धरातल पर उतारने का प्रभावी माध्यम है। राज्यसभा सांसद सुभाष बराला सोमवार को लोक निर्माण विश्राम गृह, फतेहाबाद में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संसद के हाल ही में संपन्न शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार द्वारा नौ महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए हैं, जो देश के नागरिकों के भविष्य को सुरक्षित और सुदृढ़ करने की दिशा में निर्णायक कदम हैं।
*मनरेगा की खामियों को दूर कर बना नया सशक्त कानून:*
राज्यसभा सांसद ने कहा कि पुराने मनरेगा कानून में कई खामियां और अनियमितताएं थीं, जिन्हें विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) में दूर किया गया है। अब मजदूरों को 100 दिनों के बजाय 125 दिन का रोजगार मिलेगा। इसमें 75 दिन का कार्य केंद्र सरकार और 50 दिन का कार्य राज्य सरकार द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा। इस योजना के तहत कुल बजट का 60 प्रतिशत केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। उन्होंने बताया कि राज्यों की जिम्मेदारी भी अब स्पष्ट रूप से तय कर दी गई है। मजदूरों के कार्य निर्धारण में यह भी ध्यान रखा जाएगा कि फसल की बुवाई व कटाई के समय किसान के खेतों में मजदूरों को दिहाड़ी मिले और उसके बाद इस अधिनियम के तहत अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध कराया जाए। इससे मजदूरों को अधिक काम मिलेगा और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
*पारदर्शिता के लिए तकनीकी सुधार:*
सुभाष बराला ने कहा कि वीबी-जीरामजी कानून में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जीपीएस सिस्टम और बायोमेट्रिक प्रणाली को और मजबूत किया गया है, जिससे फर्जीवाड़े और अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगेगी।
*नाम बदलने पर विपक्ष का भ्रम फैलाने का आरोप:*
राज्यसभा सांसद ने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर मनरेगा का नाम बदलने को लेकर बेवजह मुद्दा बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मनरेगा कांग्रेस सरकार में बना था, लेकिन इसमें व्याप्त खामियों को दूर करने के लिए संशोधन जरूरी थे। नाम बदलने से विपक्ष तिलमिला रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि इस कानून से मजदूरों को अब पहले से अधिक रोजगार और बेहतर व्यवस्था मिलेगी।
*गैर-एनडीए सरकारें जिम्मेदारी से भाग रही:*
उन्होंने कहा कि अब राज्य सरकारों को भी बीबी जीरामजी अधिनियम लागू होने के बाद अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी, क्योंकि 40 प्रतिशत खर्च उन्हें वहन करना होगा। इसी कारण गैर-भाजपा और गैर-एनडीए सरकारें इस कानून से असहज हैं और भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही हैं।
*2014 के बाद ऐतिहासिक कानूनी सुधार:*
सांसद ने कहा कि 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 1577 पुराने और अप्रासंगिक कानून बदले या निरस्त किए गए हैं, जबकि 2014 से पहले केवल 1291 कानूनों में संशोधन हुआ था। इससे आम नागरिकों को बड़ी राहत मिली है। भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 213 में मौजूद भेदभावपूर्ण प्रावधान को समाप्त कर समानता स्थापित की गई है। राज्यसभा सांसद ने कहा कि देश के विकास में रुकावट में आने पुराने कानूनों को बदलने में मौजूदा केंद्र सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।
*सबका बीमा-सबकी रक्षा से मिलेगा आमजन को लाभ:*
सुभाष बराला ने कहा कि सबका बीमा-सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक 2025 के पारित होने से बीमा क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार होंगे। बीमा कंपनियों में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति शक्तियों को मजबूत किए जाने से आम नागरिकों तक बीमा का लाभ पहुंचेगा।
*हेल्थ सेक्टर के बिल से मिलेगी नई वित्तीय ताकत:*
राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने बताया कि स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025 के तहत पान मसाला और सिगरेट जैसे स्वास्थ्य-हानिकारक उत्पादों पर विशेष उपकर लगाया जाएगा। इससे प्राप्त राजस्व का उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने में किया जाएगा। यह कदम स्वास्थ्य जोखिम कम करने और स्थायी संसाधन जुटाने की दिशा में अहम है।
इस अवसर पर हरकोफेड चेयरमैन वेद फूला, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रवीण जोड़ा, प्रवक्ता कंवल चौधरी, इंद्र गावड़ी, शम्मी ढींगरा, जयदीप बराला, जगदीप मोंगा, लायक राम गढ़वाल, प्रमोद बेनीवाल सहित अनेक भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहें।
