भीम प्रज्ञा काव्य समीक्षा@सुंदरलाल उत्सुक
कवि शिवताज सिंह ‘ताज’ द्वारा लिखित पुस्तक “शब्द यथार्थ” दोहा छंद में सृजित दस्तावेज है। जिसमें अनुभव पर आधारित तथ्यों की कवरेज है। उक्त पुस्तक की समीक्षा काव्य शैली में कवि सुंदरलाल उत्सव ने निम्न दोहो के माध्यम से किया है-
1
सो पृष्ठों से बनी हुई यह पुस्तक बड़ी निराली है।
जिसमें शामिल सब रचनाएँ बेहद महत्व वाली हैं।
साध निशाना कविवर ने जहाँ दूर दृष्टि डाली है।
चूक हुई न कहीं जरा ना लक्ष्य गया कोई खाली है।
अल्फाजों से छलक रहा नैतिक बल और करेज है।
जिसमें अनुभव पर आधारित तथ्यों की कवरेज है।
2
निर्भय हो निर्बाध गति से खुल कर कलम चलाई है।
सच को सच कहने में ना कहीं बरती कुछ कोताही है।
पाखंड अंध विश्वास ढोंग की कसकर करी खिंचाई है।
तर्कशीलता और वैज्ञानिक सोच की राह दिखाई है।
तकनीकी कौशल का अच्छा और खासा बंधेज है।
जिसमें अनुभव पर आधारित तथ्यों की कवरेज है।
3
छंद चार सौ चालीस में एक से एक बढ़ इक्कीस है।
हर दोहे में लगी हुई आगे दिखने की रीस है।
अलग अलग विषयों पर बंटकर खंड बने उन्नीस हैं।
मिलीजुली रचनाओं से लबरेज चैप्टर बीस है।
घालमेल करने से रखा गया सख्त परहेज है।
जिसमे अनुभव पर आधारित तथ्यों की कवरेज है।
4
जहाँ कहीँ भी सिस्टम में लेखक ने देखा खोट है।
गढ़ गढ़ कर उपयुक्त छंद वहाँ तीखी मारी चोट है।
मास मीडिया का रुख उनके मन को रहा कचोट है।
लालच या किसी भय से लेता जो सत्ता की ओट है।
समता न्याय लिबर्टी से कविवर को काफी हेज है।
जिसमें अनुभव पर आधारित तथ्यों की कवरेज है।
5
जाति पाति के चिंतन को पटक पटक कर मारा है।
झूठ कपट छल ठगी का ना बिल्कुल लिया सहारा है।
अंधा धुंध आस्था को गया अच्छे से फटकारा है।
तर्क का दामन थाम धूर्तों को जमकर दुत्कारा है।
जीवन उपयोगी बातों से भरा हुआ हर पेज है।
जिसमें अनुभव पर आधारित तथ्यों की कवरेज है।



बहुत बहुत बधाई , साधुकार 🙏🙏🙏🙏