भीम प्रज्ञा की खबर का असर: शिक्षा मंत्री ने लिया संज्ञान, इंस्पायर अवार्डी बाल वैज्ञानिक मयंक मेघवाल का किया सम्मान
भीम प्रज्ञा न्यूज़ | झुंझुनू
दैनिक भीम प्रज्ञा द्वारा वंचित प्रतिभाओं की आवाज़ उठाने का असर एक बार फिर देखने को मिला। लांबी अहीर क्षेत्र के राजकीय विद्यालय में अध्ययनरत छात्र मयंक मेघवाल, जो झुंझुनू जिले की एकमात्र प्रतिभा हैं और जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर इंस्पायर अवार्ड प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया, उन्हें ब्लॉक एवं जिला स्तर की गणतंत्र दिवस सम्मान सूची में शामिल नहीं किए जाने का मामला भीम प्रज्ञा न्यूज़ ने प्रमुखता से लीड खबर के रूप में प्रकाशित किया था।

खबर प्रकाशित होते ही शिक्षा विभाग में हलचल मच गई। इसी क्रम में राजस्थान सरकार के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर झुंझुनू जिले के दौरे पर आए। लांबी सहड़ स्थित शहीद सुरेश कुमार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित इंग्लिश मीडियम बाल वाटिका उद्घाटन समारोह के दौरान मंत्री दिलावर ने मंच से संबोधन से पूर्व इंस्पायर अवार्डी बाल वैज्ञानिक मयंक मेघवाल को विशेष रूप से मंच पर बुलाकर स्वयं के हाथों से सम्मानित किया और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
शिक्षा मंत्री ने मयंक की वैज्ञानिक प्रतिभा की प्रशंसा करते हुए कहा कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना गर्व का विषय है और ऐसी प्रतिभाओं को हर स्तर पर प्रोत्साहन मिलना चाहिए। इस अवसर पर हॉकी वाली सरपंच नीरू यादव ने शिक्षा मंत्री को मयंक मेघवाल की उपलब्धियों से अवगत कराते हुए उसकी छुपी हुई प्रतिभा को सामने लाने में अहम भूमिका निभाई और उसका हौसला बढ़ाया।
गौरतलब है कि जिस प्रतिभा को पहले शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों एवं विद्यालय प्रशासन द्वारा नजरअंदाज कर सम्मान सूची तक में शामिल नहीं किया गया था, वही अधिकारी और जिम्मेदार अब मंच के आसपास खड़े होकर प्रतिभा का गुणगान करते नजर आए।
दैनिक भीम प्रज्ञा अखबार में तथ्यात्मक रूप से प्रकाशित खबर के बाद स्थानीय शिक्षा प्रशासन हरकत में आया और मयंक मेघवाल की शैक्षणिक एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी लेने अधिकारी उसके घर तक पहुंचे।
यह प्रकरण न केवल संवेदनशील पत्रकारिता का उदाहरण है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि जब मीडिया ईमानदारी से वंचितों की आवाज़ उठाता है, तो व्यवस्था को झुकना पड़ता है।
दैनिक भीम प्रज्ञा की खबर का असर यह रहा कि एक उपेक्षित प्रतिभा को उसका सम्मान और पहचान मिली, जो लोकतंत्र और पत्रकारिता की सशक्त भूमिका का जीवंत उदाहरण है।
