श्री बालाजी धाम में भगवान हनुमान जन्मोत्सव शानदार ड्यूटी दे रहे स्काउट गाइड का सम्मान करते हुए अतिथि
श्री बालाजी विशाल धाम, गोपाल की ढाणी में हनुमान जन्मोत्सव धूमधाम से सम्पन्न, छप्पन भोग व भजन संध्या से भक्तिमय हुआ माहौल
भीम प्रज्ञा न्यूज़ बुहाना।
हनुमान जयंती के पावन अवसर पर श्री बालाजी विशाल धाम (पचेरी रोड, गोपाल की ढाणी) में भव्य धार्मिक आयोजन के साथ भगवान हनुमान जी का जन्मोत्सव बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम धाम के पीठाधीश्वर राजेश जी महाराज के सानिध्य में सम्पन्न हुआ, जिसमें छप्पन भोग प्रसाद अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की गई तथा भक्तों ने केक काटकर उत्सव को अनूठे ढंग से मनाया।
कार्यक्रम के दौरान भजन संध्या एवं जागरण का आयोजन किया गया, जिसमें संत आकाश गिरी महाराज, श्याम सुंदर वृंदावन एवं सुभाष गिरी महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ। भक्ति रस से सराबोर इस आयोजन में गायक कलाकार विजेंद्र कसाना एवं मनीष यादव ने भजन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया, वहीं देव झांकियों ने आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंजीनियर नेहरा (निदेशक, नोबल एजुकेशन ग्रुप) रहे, जबकि विशिष्ट अतिथियों में एडवोकेट हरेश पंवार, मदनलाल, सूबेदार रोहिताश मान, गोविंद शर्मा, गुलजारीलाल, उदय सिंह, दिलीप, सांवरमल, अभिषेक शास्त्री, संजय गंगाखेड़ी, विनोद शर्मा, संदीप शर्मा, राजेश सेन, सुशील सेन, सत्य प्रकाश, होशियार सिंह, आशा रानी एवं रवि शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट हरेश पंवार द्वारा प्रभावी रूप से किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में आध्यात्मिक चेतना के साथ सामाजिक संस्कारों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए समाज में नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई।
मुख्य अतिथि संदीप नेहरा ने अपने उद्बोधन में कहा कि जिस प्रकार शरीर को भोजन और पानी की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार आत्मा को भी आध्यात्मिक खुराक की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि मन को नियंत्रित करने के लिए ज्ञान, ध्यान और विज्ञान जरूरी है, जबकि इन सबको संतुलित रखने के लिए आत्मबल आवश्यक है, जो केवल आध्यात्मिक चेतना से प्राप्त होता है। उन्होंने समाज को कुरीतियों एवं दुर्व्यसनों से दूर रखने हेतु आध्यात्मिक जागरूकता को अनिवार्य बताया।
इस अवसर पर धाम के पीठाधीश्वर राजेश जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि “आस्था का धन सदैव सर्वकल्याण में लगाना चाहिए और अपने व्यक्तिगत जीवन में खर्च के लिए मेहनत की कमाई का ही उपयोग करना चाहिए।” उन्होंने लालसा, तृष्णा और धन के अंधाधुंध मोह को परिवार एवं समाज में विघटन का मुख्य कारण बताते हुए इससे दूर रहने का आह्वान किया।
उन्होंने आगे कहा कि आज का समय संस्कारविहीनता की ओर बढ़ रहा है, जो समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। युवाओं को केवल डिग्री आधारित शिक्षा नहीं, बल्कि संस्कार, विचार और नैतिक मूल्यों से भी सशक्त बनाना आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे बच्चों को “डिग्री की फैक्ट्री” का उत्पाद न बनाकर उन्हें सशक्त, संस्कारी और जिम्मेदार नागरिक बनाएं।
पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती दी, बल्कि सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्यों के प्रति भी जागरूकता का संदेश दिया।
