मॉक-ड्रिल में तत्परता, निर्माण कार्य में देरी पर जताई नाराजगी
भीम प्रज्ञा न्यूज़, झुंझुनूं।
चिकित्सा शिक्षा विभाग की एक उच्च स्तरीय टीम ने झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज का दो दिवसीय सघन निरीक्षण किया। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक (अस्पताल प्रशासन) मुकेश मीणा और स्वास्थ्य प्रबंधक ज्योति मीणा ने निरीक्षण का नेतृत्व किया। अतिरिक्त निदेशक मुकेश मीणा ने बताया कि यह निरीक्षण प्रदेशभर के 83 अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में फायर सेफ्टी और अन्य महत्वपूर्ण मानकों की जांच तथा आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान सोमवार शाम 4 बजे अस्पताल में आग लगने की आपातकालीन स्थिति का अभ्यास करने के लिए मॉक-ड्रिल का आयोजन किया गया। अस्पताल प्रभारी द्वारा पुलिस कंट्रोल को सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन, नगर परिषद, विद्युत, सार्वजनिक निर्माण विभाग, और चिकित्सा विभाग समेत सभी विभागों की टीमें एवं वाहन तुरंत बीडीके अस्पताल की एमसीएच विंग के पास पहुंच गए। अग्निशमन प्रक्रिया पूरी की गई और ‘घायलों’ को तुरंत अस्पताल की आपातकालीन इकाई में पहुंचाकर चिकित्सकों की टीम द्वारा उपचार किया गया तथा उन्हें आईसीयू और वार्डों में भर्ती कराया गया। अतिरिक्त निदेशक मुकेश मीणा ने मॉक-ड्रिल में सभी विभागों की तत्परता और संवेदनशीलता की सराहना की और इसे नियमित मॉक-ड्रिल तथा गैप एनालिसिस का परिणाम बताया। उन्होंने प्रतिमाह मॉक-ड्रिल करने और गैप एनालिसिस करने के निर्देश भी दिए।
टीम ने इलेक्ट्रिक सेफ्टी की विस्तृत जानकारी कनिष्ठ अभियंता विनोद यादव से ली और बिजली के तारों की स्थिति, आपात आपूर्ति, और पावर बैक-अप की समीक्षा की। वार्डों से समस्याओं के लिए तुरंत संपर्क सुनिश्चित करने हेतु पीडब्ल्यूडी चौकी का हेल्पलाइन नंबर जारी करने के निर्देश दिए गए। अस्पताल की साफ-सफाई और बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था की टीम ने विशेष सराहना की और टीमें बनाकर नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए।
अस्पताल के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। टूटी सड़क का तकमीना बनाने और पेचवर्क हेतु आरएसआरडीसी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। साथ ही, विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय पर विभिन्न उपकरणों की मांग का प्रस्ताव भिजवाने के निर्देश दिए गए। प्रसव एवं नवजात शिशु इकाई की उत्कृष्ट सेवाओं की सराहना की गई। निर्माणाधीन ट्रॉमा सेंटर के कार्य को शीघ्र पूर्ण कर ट्रॉमा केयर को बढ़ाने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा, निराश्रित पशुओं एवं श्वानों के प्रवेश को रोकने, चिकित्सकों की ओपीडी/आईपीडी सेवाओं को बेहतर करने, दवा योजना के भवन का प्रस्ताव भिजवाने और कबाड़ का तुरंत निस्तारण करने के निर्देश भी प्रदान किए गए।
मंगलवार को टीम ने निर्माणाधीन नर्सिंग महाविद्यालय का निरीक्षण किया। निर्माण कार्य की धीमी प्रगति पर अतिरिक्त निदेशक ने गहरी नाराजगी जाहिर की और निर्माण कार्य में लेबर संख्या बढ़ाने तथा निरंतर मॉनिटरिंग करने के लिए एक्सईएन सीमा मरोड़िया को निर्देशित किया। गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण कार्य देरी से शुरू करने पर भी नाराजगी जताई गई। लेक्चर हॉल और कार्यालय भवनों में विद्युत कार्य को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश अधिशासी अभियंता रवि को दिए गए, ताकि कक्षाएं जल्द शुरू की जा सकें।
मेडिकल कॉलेज निरीक्षण के दौरान, अतिरिक्त निदेशक मुकेश मीणा ने पानी भराव की समस्या के समाधान हेतु प्रधानाचार्य डॉ. राकेश साबू को जिला कलेक्टर एवं राजमेस से समन्वय कर समयबद्ध समाधान के निर्देश दिए। साथ ही, विद्यार्थियों की नियमित थ्योरी एवं प्रैक्टिकल कक्षाएं संचालित करने हेतु निर्देशित किया।
मेडिकल कॉलेज मैस निरीक्षण के दौरान छात्रों से खान-पान की जानकारी ली गई, जहाँ छात्राओं ने दबी जुबान से दूध और दही की क्वालिटी घटिया आने की शिकायत की। अतिरिक्त निदेशक ने स्वयं छाछ मंगवाई और उसमें दूर से ही खट्टी गंध आने पर तथा चखने के बाद मैस संचालन कर्ता को जमकर लताड़ पिलाई। उन्होंने बासी-पुरानी छाछ का उपयोग तुरंत बंद करने और तत्काल प्रभाव से लैब में जांच करवाने के निर्देश दिए। मैस के अंदर जंक फूड की बिक्री देखकर भी मुकेश मीणा उखड़ गए और इसे तुरंत हटाने का आदेश दिया। उन्होंने 7 दिन बाद पुनः लैब परीक्षण करवाने की बात कही और छात्रों को शुद्ध खान-पान की सलाह देते हुए अपना मोबाइल नंबर भी दिया ताकि वे किसी भी समस्या पर बेझिझक उन्हें अवगत करा सकें।