भीम प्रज्ञा न्यूज़.चित्तौड़गढ़।
लगन, धैर्य और निरंतर प्रयास किस तरह असफलता को सफलता में बदल सकते हैं, इसका प्रेरक उदाहरण हैं डॉ. आनंद चौधरी। वर्ष 2014 में 12वीं कक्षा में असफल होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने लक्ष्य की ओर नए संकल्प के साथ आगे बढ़े। उन्होंने बी.एससी एवं एम.एससी (कृषि) की शिक्षा कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर से तथा पीएच.डी. की उपाधि स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर से प्राप्त की। उनकी यह शैक्षणिक यात्रा दर्शाती है कि कोई भी असफलता व्यक्ति की दिशा बदल सकती है, लेकिन उसकी क्षमता नहीं। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच डॉ. चौधरी ने वह उपलब्धि हासिल की, जो पूरे राज्य के युवाओं के लिए मिसाल है। सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी (AARO) – पौध रोग विज्ञान के पद पर पूरे राजस्थान में केवल एक ही सीट थी, जिस पर चयनित होने का गौरव डॉ. चौधरी को प्राप्त हुआ।
उनकी नियुक्ति बीज परीक्षण प्रयोगशाला, चित्तौड़गढ़ में की गई है, जहाँ उन्होंने हाल ही में पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण करते समय डॉ. चौधरी ने कहा कि वे कृषि अनुसंधान, बीज गुणवत्ता परीक्षण तथा किसानों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए समर्पित रहेंगे। क्षेत्र के कृषक समुदाय एवं शिक्षाविदों ने उनकी इस उपलब्धि को प्रेरणादायक बताया।डॉ. आनंद चौधरी की यात्रा यह संदेश देती है कि असफलता अंत नहीं, एक नई शुरुआत होती है। हौसला बड़ा हो तो हर मंज़िल संभव है।
