राजस्थान में बीजेपी ने हाल ही में अपनी प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार करते हुए 34 नेताओं को नई जिम्मेदारियाँ सौपी हैं। लेकिन इस बार की टीम में एक भी मुस्लिम चेहरा शामिल न होने ने कई राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। अल्पसंख्यक समुदाय की ओर से केवल पूर्व मंत्री सरदार सुरेंद्र पाल सिंह टीटी का नाम ही प्रमुख रूप से देखा गया है।
इसी बीच सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है, जिससे राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
“अल्पसंख्यक समुदाय बीजेपी को बहुत कम वोट देता है” — गहलोत
गहलोत ने कहा कि वास्तविकता यह है कि मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय भाजपा को बेहद कम मत देते हैं। उनके अनुसार, बीजेपी का अल्पसंख्यक मोर्चा देशभर में लगातार सक्रिय है और मंडल स्तर तक अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों को जिम्मेदारी भी दी जाती है।
“हम टिकट देना चाहते हैं, लेकिन जीत नहीं पाते”
अविनाश गहलोत ने साफ कहा कि पार्टी मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देना चाहती है, लेकिन
बीजेपी के टिकट पर खड़े होने पर वे चुनाव जीतने में सफल नहीं होते।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि
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मुस्लिम उम्मीदवारों को अपने ही समाज से भी सीमित समर्थन मिलता है,
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और आमतौर पर उन्हें बहुत कम वोट प्राप्त होते हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समय के साथ स्थितियाँ बदल रही हैं, और पार्टी चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा अल्पसंख्यक समुदाय बीजेपी पर भरोसा करे।
“केंद्र सरकार की योजनाओं से मुस्लिम समाज को बड़ा लाभ मिला”
गहलोत ने दावा किया कि पिछले 11 वर्षों में केंद्र की कई प्रमुख योजनाओं का लाभ
मुस्लिम समुदाय तक बड़ी संख्या में पहुँचा है।
उन्होंने कहा कि यह ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना का परिणाम है।
लेकिन राजनीतिक समर्थन की बात आती है, तो मुस्लिम मतदाता बीजेपी का साथ कम ही देते हैं, यही पार्टी के लिए चुनौती है।
“हम केवल जीतने वाले और जनसमर्थन वाले उम्मीदवार को टिकट देते हैं”
गहलोत ने कहा कि टिकट उसी व्यक्ति को दिया जाता है
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जो जीतने की क्षमता रखता हो,
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जनता से जुड़ाव रखता हो
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और लंबे समय तक पार्टी के साथ खड़ा रह सके।
लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि बीजेपी के प्रतीक (सिंबल) पर उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर पाते, इसलिए टिकट चयन में कड़ी समीक्षा की जाती है।
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