संपादकीय @ Advocate Haresh Panwar
अज्ञानता का उपचार संभव है, मूर्खता का नहीं — समाज को आईना दिखाती कड़वी सच्चाई
अज्ञानता और मूर्खता—ये दो शब्द अक्सर एक जैसे प्रतीत होते हैं, लेकिन जीवन और समाज की सबसे बड़ी उलझनें इन्हीं दोनों के बीच फर्क न समझ पाने से खड़ी होती हैं। अज्ञानता एक खाली पात्र है, जिसे ज्ञान, अनुभव और सीख के जल से भरा जा सकता है। लेकिन मूर्खता वह पात्र है, जो छलका भी हो तो भी उसमें सड़े हुए पूर्वाग्रह, अहंकार और तर्कहीनता की गंध ही आती है। अज्ञानी व्यक्ति सीखने को उत्सुक हो सकता है, उसे रास्ता दिखाया जाए तो वह चलने को तैयार होता है। लेकिन मूर्ख व्यक्ति अपनी ही धारणाओं का कैदी होता है—जैसे किसी कुएं के मेंढक की दुनिया उसी कुएं तक सीमित होती है; बाहर का समुद्र उसके लिए अस्तित्व ही नहीं रखता। यहां मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है।
समाज में सबसे बड़ी समस्या यह नहीं कि लोग अज्ञानी हैं, बल्कि यह है कि कुछ लोग अपनी मूर्खता को ज्ञान समझकर सर्वज्ञ बनने का भ्रम पाल लेते हैं। ऐसे लोग हर मुद्दे पर राय रखते हैं, हर व्यक्ति पर टिप्पणी करते हैं, हर काम में खोट निकालते हैं, लेकिन आत्मचिंतन की दिशा में एक कदम भी नहीं बढ़ाते। यही वे लोग हैं जो अपनों के खिलाफ साजिशें रचते हैं और गैरों की चापलूसी करते हुए स्वयं को बुद्धिमान मानते रहते हैं। इतिहास गवाह है कि राष्ट्रों के पतन में अज्ञानता से ज्यादा योगदान मूर्खता का रहा है—क्योंकि अज्ञानता को मिटाने का प्रयास किया जा सकता है, पर मूर्खता अपनी जिद में अडिग रहती है।
अज्ञानता एक हालत है—पर मूर्खता एक आदत। अज्ञानी व्यक्ति से संवाद संभव है, मूर्ख व्यक्ति से नहीं। अज्ञानी के पास सवाल होते हैं, मूर्ख के पास केवल कटाक्ष। अज्ञानी सीखने को आतुर होता है, मूर्ख केवल आलोचना में विश्वास रखता है। यही कारण है कि समाज में ऐसे लोग दूसरों की कमियों को ढूंढने में ही जीवन का सार समझते हैं। वे समझते नहीं कि दूसरों की आलोचना करके कोई व्यक्ति महान नहीं बनता; महान तो वही है, जो अपनी कमियों को पहचानकर स्वयं को सुधार लेता है।
अज्ञानता और मूर्खता का अंतर यही है कि अज्ञानी व्यक्ति स्वीकार करता है कि उसे कुछ नहीं पता। यही स्वीकृति उसे सीखने का अवसर देती है। जबकि मूर्ख व्यक्ति स्वयं को सर्वज्ञ समझते हुए नई जानकारी को अस्वीकार कर देता है। यही कारण है कि अज्ञानता को शिक्षा से दूर किया जा सकता है, पर मूर्खता को कोई शिक्षा नहीं छुड़ा सकती। शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि विवेक का विकास करना है। जब शिक्षा मनुष्य को ज्ञान के साथ-साथ प्रश्न पूछने का साहस और तर्क करने की योग्यता दे, तभी समाज मूर्खता से मुक्त हो सकता है।
आज सोशल मीडिया के दौर में मूर्खता बिजली की गति से फैलती है, क्योंकि मूर्ख व्यक्ति को ज्ञान नहीं चाहिए—उसे सिर्फ़ पुष्टि चाहिए कि उसकी सोच ही अंतिम सत्य है। ऐसे लोग गलत सूचनाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाते हैं, और अपनी ही भ्रांतियों के दर्पण में स्वयं को विद्वान समझते रहते हैं। अज्ञानी व्यक्ति यदि गलत सूचना पढ़ लेता है तो शायद भ्रमित हो जाए, लेकिन मूर्ख व्यक्ति उसे धर्मग्रंथ की तरह पवित्र मानकर दूसरों पर थोपना शुरू कर देता है। यही कारण है कि दुनिया में आज गलत सूचनाओं के विस्तार में मूर्खता का योगदान सबसे बड़ा है।
समाज का भविष्य अज्ञानता मिटाने से बेहतर होगा, लेकिन मूर्खता घटाने से उज्ज्वल होगा। इसके लिए आवश्यक है कि हम आलोचना की बीमारी का इलाज करें, निंदा के शौक को सीमित करें और विवेक को जीवन का मूल मंत्र बनाएं। यह समझना जरूरी है कि आलोचना तभी सार्थक होती है जब वह समाधान की ओर ले जाए। कटाक्ष और उपहास केवल मनुष्य को विभाजित करते हैं, सुधार नहीं करते।
आज जरूरत इस बात की है कि हम ज्ञान को ज्ञान की तरह और विवेक को विवेक की तरह समझें। ज्ञान हमें जानकारी देगा, लेकिन विवेक हमें दिशा देगा। ज्ञान हमें रास्ता दिखाएगा, लेकिन विवेक हमें सही रास्ता चुनने की क्षमता देगा। वही समाज प्रगतिशील होता है, जहाँ अज्ञानता को शिक्षित करके और मूर्खता को संयमित करके तर्कपूर्ण वातावरण बनाया जाए।
अंत में, यह याद रखना चाहिए कि अज्ञानता कोई अपराध नहीं; मूर्खता ही अपराध है—क्योंकि मूर्ख व्यक्ति केवल स्वयं को ही नुकसान नहीं पहुँचाता, वह पूरे समाज को पीछे धकेल देता है। जो लोग दूसरों की आलोचना में ही अपनी ऊर्जा खर्च करते हैं, वे अपने जीवन के लक्ष्य कभी नहीं बना पाते।
इसलिए यह आज का सबसे गूढ़ और सटीक सत्य है—
“अज्ञानता को शिक्षा मिटा सकती है, पर मूर्खता को केवल विवेक ही रोक सकता है। और विवेक वहीं पनपता है, जहाँ मनुष्य अपनी आलोचना से पहले अपने आत्ममंथन को महत्व देता है।”
भीम प्रज्ञा अलर्ट
“असली बदलाव तब शुरू होता है, जब हम शिकायतें छोड़कर अपने कर्मों की ज़िम्मेदारी लेना शुरू कर देते हैं। जो व्यक्ति स्वयं को सुधारने की क्षमता रखता है, वही दुनिया को बेहतर बनाने की ताकत रखता है।”
