-नगर परिषद चेयरमैन नरेश बंसल का बराला से छत्तीस का आंकड़ा से रूके विकास कार्य
-शहर की हर गली कूचों में अन्धकार छाया,पुराना ठेकेदार अभी तक कर रहा है मनमानी
-विपक्षी पार्षद रामकुमार सैनी ने की मुख्यमंत्री विजिलेंस से सभी भ्रष्टाचारीयों पर सख्त कार्रवाई की मांग
विजय रंगा(ब्यूरो चीफ)
भीम प्रज्ञा न्यूज़.टोहाना। नगर परिषद टोहाना के पूर्व उपप्रधान एवं वार्ड नंबर 10 के पार्षद रामकुमार सैनी ने शहर की बढ़ती समस्याओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में टोहाना की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। शहर में आवारा पशुओं, बंदरों व कुत्तों की बढ़ती संख्या से लोग परेशान हैं। कई वार्डों में स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से खराब पड़ी हुई हैं और डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन भी सही तरीके से नहीं हो रहा, जबकि नागरिकों के खातों से कलेक्शन शुल्क नियमित रूप से काटा जा रहा है। उन्होंने बताया कि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और स्ट्रीट लाइट रिपेयर के टेंडर समाप्त हुए लगभग 50-60 दिन बीत चुके हैं, लेकिन नए टेंडर की प्रक्रिया आज तक शुरू नहीं हो पाई। कई स्थानों पर अधूरी सडक़ों को तोडकऱ छोड़ दिया गया है, जिससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन सभी विषयों पर नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी का ध्यान न के बराबर है, जिससे जन समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। पार्षद सैनी ने कहा कि सरकार को टोहाना की वर्तमान स्थिति को देखते हुए तुरंत प्रभाव से कार्रवाई करनी चाहिए और सभी लंबित कार्यों को शीघ्र शुरू करवाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि इन लापरवाहियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में जनता को ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ समय पहले नगर परिषद प्रधान का बयान आया था कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते। यदि ऐसी स्थिति है, तो या तो प्रधान को स्वयं इस्तीफा देना चाहिए अथवा मुख्यमंत्री से मिलकर कार्यकारी अधिकारी के खिलाफ उचित कानूनी कार्यवाही करवानी चाहिए, क्योंकि नगर परिषद के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी अधिकारी और जनप्रतिनिधि दोनों पर समान रूप से होती है। रामकुमार सैनी ने कहा कि यदि नगर परिषद प्रधान शहर की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाते हैं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करवाने में गंभीर हैं, तो वह और शहर की जनता उनके साथ खड़े होंगे। लेकिन यदि केवल प्रतीकात्मक धरने या घोषणाओं के बाद भी मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए जाते हैं, तो जनता अपनी समस्याओं को लेकर स्वयं आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
