*मनसा माता की पहाड़ियों से आंदोलन का आगाज, अरावली बचाओ जीवन बचाओ ब्रिगेड बनाने का ऐलान*
*अरावली की रक्षा के लिए संत महात्मा आए आगे, घुमक्कड़ जाती के लोग भी हुए आंदोलन में शामिल*
*अरावली उजड़ी तो हमारा जीना ही बेकार आखरी सांस तक लड़ेंगे*
*अरावली मुहिम में सहयोग नहीं करने वाले नेताओं को पहाड़ी क्षेत्र में नहीं घुसने देंगे*
सुमेर मीणा
भीम प्रज्ञा न्यूज़.उदयपुरवाटी।
अरावली पर्वतमाला पर लगातार बढ़ते खतरों के खिलाफ अब शेखावाटी की जनता ने निर्णायक संघर्ष का रास्ता चुन लिया है।अरावली बचाओ–जीवन बचाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर रविवार को शेखावाटी की सबसे विशाल व ऐतिहासिक अरावली पर्वतमाला स्थित मनसा माता गेट, खोह से जन-संघर्ष की औपचारिक शुरुआत कर दी गई। अभियान की शुरुआत मनसा माता के दरबार में दर्शन-पूजन एवं आशीर्वाद लेकर की गई, जिसमें सर्व समाज की बड़ी भागीदारी रही। इस जन-संकल्प कार्यक्रम में ग्रामीणों, युवाओं, महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, भावी जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ साधु-संतों का विशेष सानिध्य भी रहा। साधु-संतों ने अरावली क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन और प्रकृति के विनाश पर गहरी नाराज़गी प्रकट करते हुए कहा कि अरावली का विनाश केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति और मानव भविष्य का विनाश है। अब संत समाज चुप नहीं बैठेगा। सर्व समाज की बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता आदिवासी श्री मीन सेना प्रदेशाध्यक्ष सुरेश मीणा किशोरपुरा ने कहा कि अरावली केवल पहाड़ नहीं, यह हमारी जल-जीवन रेखा है। अरावली रहेगी तभी जल, जंगल और जन-जीवन सुरक्षित रहेगा। विकास के नाम पर अरावली का विनाश किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली को लेकर दी गई नई परिभाषा के बाद आमजन में फैले भ्रम पर चिंता जताते हुए कहा कि इसी भ्रम का फायदा उठाकर खनन माफिया सक्रिय हो गए हैं, जिसे अब जन-आंदोलन के माध्यम से रोका जाएगा। सरपंच प्रतिनिधि बाबूलाल फौजी तथा शीशराम खलवा ने चेतावनी देते हुए कहा कि अरावली की 90 प्रतिशत से अधिक पहाड़ियाँ आज खतरे में हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को जल संकट, पर्यावरण असंतुलन और आजीविका के संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि अरावली संरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा जा चुका है और नीतिगत हस्तक्षेप की मांग की गई है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल खोह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मनसा माता, मालखेत, जीण, हर्ष पर्वत सहित पूरी अरावली श्रृंखला को बचाने के लिए चरणबद्ध रूप से चलाया जाएगा। समिति ने ऐलान किया कि शेखावाटी में पर्यावरण बचाने के लिए जनता सड़कों पर उतरेगी।
आयोजन कर्ता ब्रह्मदत मीणा गुड़ा तथा महिपाल खलवा ने बैठक में अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध, 100 मीटर की परिभाषा पर पुनर्विचार, स्थानीय ग्राम पंचायतों को संरक्षण में भागीदार बनाने तथा अरावली को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने जैसी प्रमुख मांगें उठाई गईं।
कार्यक्रम में मौजूद हजारों लोगों ने एक स्वर में अरावली बचाओ, जीवन बचाओ के नारे लगाते हुए जन-संकल्प लिया कि यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है।
अंत में निर्णय लिया गया कि आने वाले दिनों में हस्ताक्षर अभियान, जनसभाएं, पदयात्राएं और प्रशासन को ज्ञापन देकर अरावली संरक्षण की मांग को और अधिक तेज किया जाएगा। इस अवसर पर तुरन्त नाथ, बाबूलाल फौजी, शीशराम खलवा, ब्रह्मदत मीणा गुड़ा, महिपाल गुर्जर, रणवीर गुर्जर, विनोद कुमावत, रविन्द्र शर्मा, रामसिंह शेखावत, दीपक मीणा, दाताराम गुर्जर, पिंटु खलवा , उदयसिंह, रामस्वरूप गुर्जर, अनिल गुर्जर, सांवरमल कुमावत, रामसिंह खटाणा, अभिजीत सिंह राठौड़, सीताराम सेन,सकील ,नरेश खलवा, शीशराम खटाणा, जयसिंह मीणा,पंकज मीणा सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे।
