"सूरजगढ़ की धड़कन, राष्ट्र निर्माण के सच्चे कर्मयोगी- सेवाराम गुप्ता"
“सूरजगढ़ की धड़कन, राष्ट्र निर्माण के सच्चे कर्मयोगी- सेवाराम गुप्ता”
“सेवा के सारथी: सेवाराम गुप्ता की समर्पित जीवन यात्रा”
समाज में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो पद से नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यबोध, कर्मनिष्ठा और सेवा भाव से पहचाने जाते हैं। सूरजगढ़ (झुंझुनूं) के जीवन मंडी से जुड़ा एक ऐसा ही नाम है — सेवाराम गुप्ता। जिनका जीवन राष्ट्रसेवा, जनसेवा और सामाजिक उत्थान की त्रिवेणी का साकार रूप है। उन्होंने राजनीति को जनसंपर्क नहीं, जनकल्याण का माध्यम बनाया और सेवा को साधना का रूप दिया।
साधारण से जननायक बनने तक की यात्रा
सूरजगढ़ (जिला झुंझुनूं) के जीवन मंडी क्षेत्र में जन्मे सेवाराम गुप्ता, आज राजस्थान के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में एक प्रेरक व्यक्तित्व बन चुके हैं। इनके पिता स्व. श्री ड़ूगरमल गुप्ता न केवल क्षेत्र के प्रख्यात अनाज व्यापारी रहे, बल्कि किसानों के प्रगति-पथ पर चलने के मार्गदर्शक भी रहे। 1967 से 1977 तक वह झुंझुनूं जिले की पहली कृषि उपज मंडी समिति के अध्यक्ष रहे, जिससे परिवार की समाजसेवा की परंपरा प्रारंभ हुई।
सेवाराम गुप्ता ने वाणिज्य में स्नातक शिक्षा प्राप्त की और प्रारंभ से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर बाल स्वयंसेवक के रूप में राष्ट्रसेवा का बीजारोपण अपने व्यक्तित्व में किया।
राजनीतिक यात्रा – संगठन से समर्पण तक
सेवाराम गुप्ता का राजनीतिक जीवन किसी महत्वाकांक्षा से प्रेरित नहीं, बल्कि निष्ठा, सेवा और संगठन प्रेम से प्रेरित रहा है:
वे लगातार 30 वर्षों से भाजपा झुंझुनूं जिला कोषाध्यक्ष के रूप में पार्टी की रीढ़ बनकर कार्य कर रहे हैं।
2013, 2014, 2018 के चुनावों में विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में उन्होंने चुनाव संचालन, संयोजन व प्रचार की जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
सेवाराम गुप्ता की धर्मपत्नी श्रीमती पुष्पा देवी गुप्ता वर्तमान में सूरजगढ़ नगरपालिका की निर्वाचित चेयरमैन हैं — यह स्वयं इस बात का प्रमाण है कि यह परिवार पूर्णतः जनसेवा को समर्पित है।
बीजेपी व्यापार प्रकोष्ठ के संयोजक, झुंझुनूं जिला कार्यकारिणी सदस्य, सरकारी समिति सदस्य आदि दायित्वों में आपने निरंतर सक्रियता दिखाई।
विचारधारा से समर्पण तक
1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना से ही वे पार्टी के सक्रिय सदस्य बन गए। परंतु उन्होंने राजनीति को सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम माना।वे लगातार 30 वर्षों से भाजपा झुंझुनूं जिला कोषाध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं। 2004 से 2008 तक राजस्थान सरकार द्वारा सहवृत्त सदस्य के रूप में सूरजगढ़ नगरपालिका में नियुक्ति। उन्होंने सूरजगढ़, तारानगर, पिलानी जैसी विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। झुंझुनूं जिला कार्यकारिणी सदस्य, बीजेपी व्यापार प्रकोष्ठ संयोजक, विधानसभा चुनावों में प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण दायित्व उन्हें उनकी कुशल नेतृत्व क्षमता के आधार पर सौंपे गए।
सामाजिक सेवा – सेवा का विस्तार जन-जन तक
शिक्षा क्षेत्र में क्रांति: 2002 से श्रीपाल राम बृजलाल उच्च माध्यमिक विद्यालय सूरजगढ़ के सचिव के रूप में, आपने विद्यालय को आधुनिक, बहुभाषिक, और बहु-विषयक शिक्षा के केंद्र में रूपांतरित किया। विद्यालय में वाणिज्य, विज्ञान और कला संकायों का विस्तार हुआ और निर्धन विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा की सुविधा प्रदान की गई।
राम मंदिर निर्माण निधि के संयोजक के रूप में 30 लाख रुपए एकत्र कर आपने सनातन आस्था के प्रति जन-समर्पण को संगठित किया।
गौसेवा और अकाल राहत: वर्ष 1998 से 2003 के मध्य जब राजस्थान भयंकर अकाल से जूझ रहा था, तब आपने 1800 गायों के भरण-पोषण हेतु गौशाला शिविर स्थापित किया जो आज भी निरंतर संचालित हो रहा है।
पुस्तकालय वाचनालय, धार्मिक आयोजन, गौसेवा समिति, अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन, अंतरराष्ट्रीय वैश्य संघ जैसे विविध संगठनों में आपकी भूमिका प्रभावी और रचनात्मक रही है।
आप अंतरराष्ट्रीय वैश्य संघ के देश उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन, राजस्थान खाद्य व्यापार संघ के जिला अध्यक्ष जैसे प्रतिष्ठित पदों पर कार्य कर रहे हैं।
पारिवारिक विरासत – सेवा और वैश्य संस्कृति का संगम
आपके पिता स्व. डुंगरमल गुप्ता ने न केवल व्यापार में ईमानदारी और निष्ठा का उदाहरण प्रस्तुत किया, बल्कि कृषि मंडी अध्यक्ष के रूप में किसान-हित को सर्वोपरि रखा।
भाई श्याम सुंदर गुप्ता झुंझुनूं जिले की उद्योग एवं व्यापार सलाहकार समिति के सदस्य रहे।
दूसरा भाई विनोद गुप्ता, कृषि उपज मंडी समिति सदस्य और वर्तमान में गौशाला मंत्री के रूप में कार्यरत हैं।
यह परिवार पिछले 50 वर्षों से सूरजगढ़ में निःशुल्क जल सेवा चला रहा है, जो सेवा और परोपकार की अनूठी मिसाल है।
उत्थान और राष्ट्र निर्माण में योगदान
सेवाराम गुप्ता का समस्त जीवन “राष्ट्र प्रथम” के सिद्धांत को समर्पित है। चाहे शिक्षा हो, धर्म हो, राजनीति या सामाजिक नेतृत्व—हर क्षेत्र में उन्होंने निःस्वार्थ, निष्कलंक और निर्मल सेवा की मिसाल प्रस्तुत की है। वे मानते हैं कि “पद नहीं, पुरुषार्थ बड़ा होता है”, और इसी सोच से उन्होंने हर दायित्व को ईमानदारी, कर्तव्यबोध और कर्मनिष्ठा से निभाया है।
एक युगदृष्टा, कर्मयोगी और प्रेरणा के स्रोत
सेवाराम गुप्ता न केवल सूरजगढ़, बल्कि पूरे झुंझुनूं और राजस्थान के लिए एक आदर्श नायक हैं—जो दिखाते हैं कि राजनीति भी सेवा का माध्यम हो सकती है, सामाजिक संगठन भी जनकल्याण का पुल हो सकते हैं, और संघर्ष भी सौंदर्य बन सकता है जब वह लोकहित में हो। उनका जीवन एक जीवंत संदेश है—“सच्चा नेतृत्व पद में नहीं,जनमन में बसने से आता है।”
संगठनात्मक योग्यता – प्रबंधन, नेतृत्व और प्रेरणा के केंद्र
सेवाराम गुप्ता न केवल नीति निर्धारण में निपुण हैं, बल्कि जमीनी कार्यकर्ता के रूप में अपने हर छोटे-बड़े दायित्व को स्वयं का सौभाग्य मानते हैं। यही कारण है कि वे कार्यकर्ता, प्रबंधक और प्रेरणास्रोत — तीनों भूमिकाओं में बराबर निखरते हैं।
नाम के सारथी जनसेवा के पर्याय
अपने नाम के सारथी एवं जन सेवा के पर्याय सेवाराम गुप्ता का जीवन दर्शन हमें सिखाता है कि राजनीति का असली स्वरूप सेवा है, और सेवा तब पूर्ण होती है जब वह बिना भेदभाव के हो, सतत हो और समर्पण के साथ हो।
वे न केवल सूरजगढ़, बल्कि झुंझुनूं और राजस्थान के लिए सच्चे जननायक, कर्मयोगी, और समाज के हर वर्ग के पथप्रदर्शक हैं।
“सेवा वह दीप है जो न स्वयं बुझता है,
न अपने प्रकाश को सीमित करता है।
सेवाराम गुप्ता, ऐसे ही एक दीप की निरंतर ज्योति हैं।”
✍️✍️ लेखक
– एडवोकेट हरेश पंवार
– संपादक- दैनिक भीम प्रज्ञा
