मास्टर रामकुमार आर्य की प्रतिमा का अनावरण करते हुए अतिथिगण
शिक्षा, संस्कार और संगीत के संगम से समाज को दिया प्रेरक संदेश
भीम प्रज्ञा न्यूज़.पचेरी।
भारतीय शिक्षण संस्थान नावता की ढाणी तन पचेरी कलां में गुरुवार को स्कूल के संस्थापक, प्रख्यात शिक्षाविद एवं आर्य समाज के प्रवर्तक मास्टर रामकुमार आर्य की प्रतिमा एवं स्मृति मंच का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कार, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों का सुंदर समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम के प्रारंभ में स्कूल के निदेशक कर्णपाल एवं ऋषिपाल द्वारा मंचासीन अतिथियों का पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-यज्ञ में आहुति दी गई, जिसके पश्चात प्रतिमा अनावरण एवं स्मृति मंच का उद्घाटन संपन्न हुआ।
शिक्षक समाज सुधार का आजीवन साधक होता है– विधायक श्रवण कुमार

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सूरजगढ़ विधायक श्रवण कुमार ने कहा कि शिक्षक जीवन पर्यंत समाज को दिशा देने का कार्य करता है। मास्टर रामकुमार आर्य ने सरल, सादगीपूर्ण जीवन जीते हुए शिक्षा के साथ-साथ समाज सुधार के कार्यों में भी अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व इतिहास में अमिट छाप छोड़ते हैं, यही कारण है कि आज हजारों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने एकत्रित हुए हैं। विधायक ने अपने सार्वजनिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका संकल्प जनता की सेवा करना है, विशेषकर पेयजल संकट के समाधान हेतु निरंतर प्रयास किए गए, जिसके परिणामस्वरूप सूरजगढ़ क्षेत्र में यमुना जल पहुंचाने में सफलता मिली।
वैदिक संस्कृति और संस्कारिक शिक्षा के सच्चे प्रहरी थे मास्टर आर्य– जसनाथ महाराज
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे दुधवा ठाडेश्वर महाराज आश्रम के पीठाधीश्वर एवं खेतड़ी के पूर्व प्रधान जसनाथ महाराज ने कहा कि मास्टर रामकुमार आर्य वैदिक संस्कृति और संस्कारिक शिक्षा के प्रबल पक्षधर थे। उन्होंने अपने संपूर्ण सेवाकाल और सेवानिवृत्ति के बाद भी शिक्षा और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए, जिससे समाज को सकारात्मक दिशा मिली।
शिक्षा, संस्कृति और इतिहास संरक्षण में था अमूल्य योगदान– सत्यव्रत शास्त्री
अहिरवाल साहित्य मंच के संयोजक सत्यव्रत शास्त्री ने कहा कि गुरुजी रामकुमार आर्य का शिक्षा, संस्कृति, संगीत और इतिहास लेखन के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान रहा। उन्होंने नावता गांव के सिद्ध बाबा की तपोभूमि पर ऐतिहासिक रचनाएं लिखकर धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा अहिरवार क्षेत्र के ढाई हजार गांव के इतिहास लेखन में भी उनका महत्वपूर्ण सुझाव रहा है।
सामाजिक जागरूकता का संदेश: भोजन की बर्बादी रोकने की दिलाई गई शपथ

कार्यक्रम के दौरान शेखावाटी संभाग में चलाए जा रहे “थाली में उतना ही लें, नाली में व्यर्थ न डालें” अभियान को आगे बढ़ाते हुए स्वरुचि भोज से पूर्व डॉ. पीतराम सिंह गोदारा ने उपस्थित जनसमूह को भोजन की बर्बादी नहीं करने एवं बच्चों को झूठन न छोड़ने की शपथ दिलाई।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और वैदिक भजन
सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्कूल के छात्र-छात्राओं ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। आर्य समाज के प्रचारक एवं भजनोपदेशकों द्वारा प्रस्तुत वैदिक भजनों ने न केवल मास्टर रामकुमार आर्य के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला, बल्कि सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध भी सार्थक संदेश दिया।

गणमान्यजन रहें उपस्थित
कार्यक्रम में महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष शकुंतला यादव, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी मानसिंह, पूर्व सरपंच ओमप्रकाश बोहरा, भील सेना के नायक विनोद यादव भील, पूर्व सरपंच जगदेव सिंह, पंचायत प्रशासक बलवीर सिंह, सिंघाना कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष बाबूलाल कालोरिया, यूथ कांग्रेस के डीपी सैनी, इंजीनियर संदीप यादव, बजरंग लाल जांगिड़, उदयभान यादव, शिक्षाविद रणधीर सिंह यादव, सहीराम तूंदवाल, यादराम आर्य, आर्य समाज के पदाधिकारी एवं अहिरवाल साहित्य मंच के सदस्य सहित अनेक शिक्षाविद, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता मौजूद रहें।
प्रेरणा का स्रोत बना आयोजन
कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह ने मास्टर रामकुमार आर्य के जीवन दर्शन से प्रेरणा लेते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया और उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।
