लावण्या सिंह
अंबेडकर की धरती से लंदन तक, शिक्षा की वही मशाल फिर जली
केजीआई सामाजिक कल्याण संस्थान के अध्यक्ष डॉ हरिसिंह गोदारा की पौत्री लावण्या सिंह का एलएसई लंदन में दाखिला
भीम प्रज्ञा न्यूज़.झुंझुनू।
बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर ने कहा कि “शिक्षा वह शस्त्र है, जिससे समाज की नियति बदली जा सकती है।” भारत के इतिहास में यह वाक्य केवल विचार नहीं, बल्कि पीढ़ियों का पथ-प्रदर्शक रहा है। उसी ऐतिहासिक चेतना को आगे बढ़ाते हुए शेखावाटी अंचल की होनहार बेटी लावण्या सिंह ने शिक्षा के वैश्विक मंच पर भारत का नाम रोशन किया है। लावण्या का चयन लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) में उच्च शिक्षा के लिए हुआ है—वही संस्थान, जहाँ से पढ़ाई कर डॉ. भीमराव अंबेडकर ने आगे चलकर भारत के संविधान का निर्माण किया। यह उपलब्धि केवल एक छात्रा की सफलता नहीं, बल्कि समानता, शिक्षा और सामाजिक चेतना की ऐतिहासिक निरंतरता का प्रतीक है।

शेखावाटी की मिट्टी से विश्व पटल तक
उदयपुरवाटी क्षेत्र के सिंगनौर गांव से जुड़ा गोदारा परिवार वर्षों से शिक्षा और सामाजिक चेतना का वाहक रहा है। लावण्या सिंह, पूर्व सरपंच एवं राष्ट्रपति अवार्डी शिक्षाविद् डॉ हरिसिंह गोदारा की पौत्री हैं। उनके पिता डॉ मनीष गोदारा अखिल भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी हैं, जबकि माता डॉ प्रतिभा सिंह राजकीय महाविद्यालय में प्रोफेसर हैं। विशेष बात यह है कि इस परिवार ने परिवार नियोजन को सामाजिक चेतना से जोड़ते हुए बेटा-बेटी के भेद को व्यवहार में समाप्त किया। लावण्या सिंह और उनकी छोटी बहन हिया सिंह—दोनों ही प्रतिभाशाली बेटियां हैं, जो यह संदेश देती हैं कि संस्कार और अवसर मिलें तो बेटियां ही भविष्य गढ़ती हैं।
अंबेडकर से लावण्या तक: इतिहास की निरंतर कड़ी
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की स्थापना वर्ष 1895 में हुई थी। इसी प्रतिष्ठित संस्थान में बीसवीं सदी के प्रारंभ में डॉ. भीमराव अंबेडकर पहले भारतीय विद्यार्थी बने थे। सामाजिक न्याय, समानता और संविधान निर्माण की जो चेतना वहाँ आकार लेती है, उसी परंपरा में अब लावण्या सिंह का प्रवेश इतिहास और वर्तमान का सेतु बन गया है। यह संयोग नहीं, बल्कि उस विचारधारा की जीत है, जो शिक्षा को समाज परिवर्तन का माध्यम मानती है।

शिक्षा संस्थानों में खुशी की लहर
लावण्या सिंह की सफलता पर उनके दादा जी डॉ हरि सिंह गोदारा द्वारा संचालित एमजी ग्लोबल स्कूल, सेंट्रल एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल और मुंगेश्वरी देवी महाविद्यालय गुढ़ागौड़जी से जुड़े शिक्षकों एवं स्टाफ में हर्ष का वातावरण रहा। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर शिक्षकों ने मुख्य प्रबंध निर्देशक विक्रम सिंह के नेतृत्व में शिक्षण समूह के अध्यक्ष हरिसिंह गोदारा को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं। शिक्षकों ने इसे “शिक्षा की साधना का प्रतिफल” बताते हुए कहा कि यह सफलता ग्रामीण भारत की बेटियों के लिए नई उड़ान का संदेश है।
बेटी बचाओ नहीं, बेटी बढ़ाओ की जीवंत मिसाल
लावण्या सिंह की उपलब्धि उस सोच को सशक्त करती है, जहाँ बेटियों को केवल संरक्षण नहीं, अवसर और विश्वास दिया जाता है। यह कहानी बताती है कि जब परिवार, समाज और शिक्षा एक दिशा में चलते हैं, तब परिणाम वैश्विक स्तर पर दिखाई देता है।
प्रेरक संदेश
शेखावाटी की बेटी का लंदन तक पहुँचना केवल एक खबर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरक दस्तावेज है। डॉ. अंबेडकर की विरासत में आगे बढ़ती लावण्या सिंह यह साबित करती हैं कि शिक्षा जब संस्कार से जुड़ती है, तो इतिहास रचती है।
