सच के पक्ष में निर्भीक कलम : रजनीकांत मिश्रा की पत्रकारिता यात्रा
रजनीकांत मिश्रा (भीम प्रज्ञा उप संपादक)
प्रतिभा, साहस और संकल्प के साथ पत्रकारिता की डगर पर निरंतर आगे बढ़ते हुए सच को सच कहने की निर्भीक हिम्मत रखने वाले युवा पत्रकार रजनीकांत मिश्रा आज भीम प्रज्ञा मीडिया हाउस की सशक्त पहचान बन चुके हैं। समाज को आईना दिखाने की जिद, अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज बनने का जज्बा और दीन-हीन-गरीब के सारथी के रूप में सेवा भाव—यही उनकी पत्रकारिता की मूल आत्मा है। वे केवल समाचार संप्रेषण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जन सरोकारों को उठाकर समाधान की दिशा में पहल करने वाले कर्मयोगी पत्रकार के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
रजनीकांत मिश्रा का जन्म राजस्थान के झुंझुनू जिले के चिड़ावा कस्बे में पिता कैलाश चंद्र मिश्रा एवं माता विद्या देवी के सुसंस्कारित परिवार में हुआ। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने एमकॉम और बीएड की डिग्री प्राप्त की और प्रारंभ में निजी क्षेत्र में अध्ययन-अध्यापन के कार्य से जुड़े रहे। किंतु समाज सेवा के प्रति उनकी गहरी आस्था ने उन्हें सीमित दायरे से बाहर निकलकर व्यापक सामाजिक सरोकारों की ओर अग्रसर किया। विद्यार्थी जीवन में राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़कर उनमें राष्ट्रीय भावनाओं और सेवा चेतना का विकास हुआ।
सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों का संतुलन साधते हुए 12 दिसंबर 2009 को खेतड़ी क्षेत्र के पपुरना निवासी सविता शर्मा के साथ उनका विवाह संपन्न हुआ। इसके बाद समाज सेवा और राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण और अधिक सुदृढ़ हुआ। वे जन सेवा संस्थान से जुड़कर विगत तेरह वर्षों से निरंतर सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। वर्ष 2019 में लोक सेवा ज्ञान मंदिर ट्रस्ट से जुड़ाव ने उन्हें मानवता की भलाई के कार्यों में और गहराई से जोड़ दिया।
कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कठिन दौर में, जब मानव सभ्यता का अस्तित्व संकट में था, रजनीकांत मिश्रा ने जमीनी स्तर पर जन सेवा करते हुए कई प्रभावशाली ग्राउंड रिपोर्टिंग और लेखन कार्य किए, जो विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए। इसी दौरान लोक सेवा ज्ञान मंदिर ट्रस्ट के सहयोगी राधेश्याम सुखाड़िया के माध्यम से उनकी मुलाकात भीम प्रज्ञा के प्रधान संपादक हरेश पंवार से हुई। उनकी रचनाएं समय-समय पर प्रकाशित होने लगीं। लॉकडाउन के कारण निजी क्षेत्र का कार्य बंद होने के बाद उन्होंने 2020 में पूरे समर्पण के साथ पत्रकारिता को अपना मुख्य कर्मक्षेत्र बनाया।
दैनिक भीम प्रज्ञा के चिड़ावा संवाददाता के रूप में उन्होंने अपनी पत्रकारिता यात्रा को नई गति दी। उनकी सूझबूझ, निष्पक्ष दृष्टि और सराहनीय सेवाओं को देखते हुए वर्ष 2022 में उन्हें झुंझुनू जिले के ब्यूरो चीफ का दायित्व सौंपा गया। इस भूमिका में उन्होंने गंभीर जन मुद्दों, दबे-कुचले और हाशिए पर खड़े समाज की आवाज को मजबूती से उठाया और निर्भीक ग्राउंड रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया।
कोरोना काल में जब बड़े मीडिया कॉरपोरेट असमंजस में थे, उस समय भीम प्रज्ञा मीडिया हेल्पलाइन के जरिए जन समस्याओं के समाधान, मानवता के लिए कार्य करने वाले कर्मठ कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने और समाज सेवा की मिसाल कायम करने वाले कार्यों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म से मिले आकर्षक प्रस्तावों के बावजूद भीम प्रज्ञा के प्रति उनका अपनत्व और विश्वास उन्हें इसी विचारधारा से जोड़े हुए है। बिना किसी शिकायत, बिना किसी बड़े प्रतिफल की अपेक्षा के वे निरंतर टीम के विस्तार और मजबूती में सहयोग करते आ रहे हैं।
उनके पत्रकारिता कौशल, सृजनात्मक अभिरुचि और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें 20 नवंबर 2025 को भीम प्रज्ञा के राजस्थान संस्करण का उप संपादक नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में एक सशक्त टीम समाज के प्रति उत्तरदायी, निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता को आगे बढ़ा रही है। रजनीकांत मिश्रा आज भीम प्रज्ञा मीडिया हाउस के उस मूल विचार के संवाहक हैं, जिसमें सत्य, सेवा और साहस को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
उनकी यात्रा यह सिद्ध करती है कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक पवित्र दायित्व है—और रजनीकांत मिश्रा इस दायित्व को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभा रहे हैं।
