बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक एवं कानूनी अपराध: रेखा अग्रवाल
अक्षय तृतीया से पहले जागरूकता अभियान तेज, आईटीआई कॉलेजों में कार्यक्रम आयोजित
भीम प्रज्ञा न्यूज़ टोहाना (रजत विजय रंगा)।
अक्षय तृतीया के मद्देनजर बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गांव साधनवास एवं तलवाड़ा स्थित आईटीआई कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में बाल विवाह, घरेलू हिंसा और दहेज प्रथा के दुष्परिणामों के साथ-साथ संबंधित कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई।
इस अवसर पर महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रेखा अग्रवाल ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक एवं कानूनी अपराध है, जो बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि इस कुरीति को समाप्त करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि बाल विवाह में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत दो वर्ष तक की सजा एवं एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। यदि कहीं भी नाबालिग बच्चों के विवाह की सूचना मिले तो तुरंत प्रशासन को अवगत कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
रेखा अग्रवाल ने कहा कि अक्षय तृतीया के अवसर पर “अबूझ साया” होने की मान्यता के कारण विवाहों की संख्या बढ़ जाती है, ऐसे में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने जिले के पंडितों, पाठियों एवं गुरुद्वारा प्रबंधकों से अपील की कि विवाह संपन्न कराने से पूर्व वर-वधू की आयु का सत्यापन अवश्य करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि लड़की की आयु 18 वर्ष और लड़के की आयु 21 वर्ष से कम होने पर विवाह कराना कानूनन अपराध है।
उन्होंने यह भी बताया कि आयु सत्यापन के लिए आधार कार्ड मान्य नहीं है, जबकि जन्म प्रमाण पत्र या दसवीं कक्षा का प्रमाण पत्र ही वैध दस्तावेज माने जाते हैं। बाल विवाह की सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। किसी भी प्रकार की सूचना आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर, सीडीपीओ, नजदीकी पुलिस थाने या हेल्पलाइन नंबर 1098 एवं 112 पर दी जा सकती है।
कार्यक्रम के दौरान घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 तथा दहेज निषेध कानून की भी जानकारी दी गई। इस मौके पर कॉलेज के प्रधानाचार्य, स्टाफ, छात्र-छात्राएं, ग्रामीण महिलाएं एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

