Advocate Haresh Panwar
LLB, MA(Hindi), Bed, MJ(MC), BJ(MC) & LSA (Diploma in Veterinary Scince)
हमारे बारे में ( About Us)
भीम प्रज्ञा न्यूज़ – सत्य, साहस और सामाजिक चेतना की पत्रकारिता
भीम प्रज्ञा केवल एक अख़बार या न्यूज़ पोर्टल नहीं है, बल्कि यह विचार, विवेक और जनचेतना से प्रेरित एक पत्रकारिता आंदोलन है। यह मंच समाज के उन सवालों को आवाज़ देता है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज़ कर दिया जाता है। हमारी पत्रकारिता सत्ता के नहीं, संविधान और समाज के प्रति जवाबदेह है। सच में भीम प्रज्ञा — एक अख़बार नहीं, एक वैचारिक आंदोलन है –
“हमने यूँ ही चलाई थी रेत में उँगलियाँ,
गौर से देखा तो एक तस्वीर बन गई।”
इसी भावभूमि से जन्मा भीम प्रज्ञा आज केवल एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि सत्य, साहस और सामाजिक चेतना से प्रेरित एक वैचारिक मंच है। यह वह पत्रकारिता है जो सत्ता के गलियारों से नहीं, समाज के अंतःकरण से संवाद करती है।
स्थापना और यात्रा
भीम प्रज्ञा मीडिया प्लेटफॉर्म की स्थापना 16 सितंबर 2009 को भारत सरकार के प्रेस महापंजीयक (RNI) द्वारा पंजीकृत “भीम प्रज्ञा” मासिक पत्रिका के रूप में हुई। सीमित संसाधनों, तकनीकी चुनौतियों और आर्थिक संघर्षों के बीच यह यात्रा शुरू हुई—जहाँ पूंजी से अधिक भरोसा विचारों पर था।
समय के साथ भीम प्रज्ञा ने अपने स्वरूप को समाज की आवश्यकता के अनुरूप बदला—
2009 : मासिक पत्रिका
2014 : पाक्षिक समाचार पत्र
2016 : साप्ताहिक अख़बार
28 मार्च 2020 से : नियमित दैनिक समाचार पत्र
12 नवंबर 2025 वह ऐतिहासिक तिथि हैजब भीम प्रज्ञा ने दैनिक अख़बार के रूप में राष्ट्रीय स्तर पहचान कायम की। यह निर्णय कोविड-19 लॉकडाउन जैसे अभूतपूर्व संकट के समय लिया गया—जब अधिकांश मीडिया संस्थान सिमट रहे थे, तब भीम प्रज्ञा ने पत्रकारिता को जनसेवा का माध्यम बनाते हुए अपनी जिम्मेदारी और अधिक मजबूती से निभाई।
संघर्ष से संस्थान तक
भीम प्रज्ञा का सफ़र गाँव के गुवाड़ से शुरू होकर राजधानी के सचिवालय तक पहुँचा है। अख़बार की गठरी कंधों पर, बारिश में भीगते पन्ने, बस स्टैंड पर घंटों का इंतज़ार—यह सब केवल स्मृतियाँ नहीं, बल्कि उस जिद के प्रमाण हैं कि कलम को झुकने नहीं देना है।
लॉकडाउन के दौरान जब प्रिंट
मीडिया संकट में था, तब भीम प्रज्ञा ने डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-पेपर और ऑनलाइन पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों से संवाद बनाए रखा। धीरे-धीरे यह मंच एक मजबूत टीम, विस्तृत पाठक वर्ग और राष्ट्रीय पहचान के साथ स्थापित हुआ।
हमारा संपादकीय दर्शन
“मैं बोलूंगा तो फिर कहोगे कि बोलता है”
यह केवल एक कॉलम नहीं, बल्कि भीम प्रज्ञा की आत्मा है।
हमारी पत्रकारिता—
सत्ता से सवाल पूछती है
समाज की विसंगतियों पर करारा प्रहार करती है
हाशिये की आवाज़ को मुख्य पृष्ठ तक लाती है
और संविधान के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहती है
हम न तो डर की पत्रकारिता करते हैं, न ही दिखावे की।
हमारी कलम सम्यक न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुता और सामाजिक चेतना के सिद्धांतों पर चलती है।
नेतृत्व (Leadership)
एडवोकेट हरेश पंवार
(प्रधान संपादक एवं सीईओ)
भीम प्रज्ञा के संस्थापक, प्रधान संपादक और सीईओ एडवोकेट हरेश पंवार एक संवेदनशील लेखक, निर्भीक पत्रकार और प्रखर वक्ता हैं। साहित्य, समाज, कानून और संविधान—इन सभी का समन्वय उनकी लेखनी में स्पष्ट दिखाई देता है।
शैक्षणिक योग्यता:
एम.ए. (हिंदी साहित्य)
एम.जे.एम.सी. (मास जर्नलिज़्म एंड मास कम्युनिकेशन)
बी.एड.
एल.एल.बी.
पशु चिकित्सा प्रबंधन में डिप्लोमा
वे मानते हैं कि पत्रकारिता केवल सूचना नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नैतिक जिम्मेदारी है। उनका नियमित संपादकीय लेखन सामाजिक, राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर पाठकों को सोचने के लिए विवश करता है।
हमारा उद्देश्य (our mission)
सत्यनिष्ठ और निर्भीक पत्रकारिता
सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता
युवाओं को रचनात्मक और वैचारिक मंच
साहित्य, संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षण
जनचेतना और जनजागरण को सशक्त करना.
हमारी विशेषताएँ
दैनिक रूप से नियमित प्रकाशन
-राष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर संतुलित रिपोर्टिंग
-विचारोत्तेजक संपादकीय और विश्लेषण
-प्रिंट, डिजिटल और सोशल मीडिया पर सक्रिय उपस्थिति
-पाठकों के साथ निरंतर संवाद–भीम प्रज्ञा : आज और आगे
आज भीम प्रज्ञा एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संस्थान है—
जहाँ पत्रकारिता, साहित्य और सामाजिक चेतना एक साथ आगे बढ़ते हैं।
हजारों-लाखों पाठकों का विश्वास,
युवाओं की समर्पित टीम,
और विचारधारा की स्पष्ट दिशा—
भीम प्रज्ञा को भविष्य की पत्रकारिता का सशक्त मंच बनाती है।
हमारा विश्वास स्पष्ट है—
कलम तब तक जीवित है, जब तक वह सवाल पूछती है और सच लिखती है।
Founder team
प्रतिभा, परिश्रम और प्रतिबद्धता के संगम से उभरे युवा पत्रकार नवीन कुमार पंवार आज समकालीन पत्रकारिता में एक सशक्त, निर्भीक और विचारशील पहचान बन चुके हैं। इनकी जन्म 5 सितंबर 1999 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के बुहाना उपखंड अंतर्गत सहड़ का बास (तन पचेरी कला) गांव में हुआ। पिता चेतराम और माता कविता देवी के संस्कारों, दादा बुधराम पंवार व दादी रेवती देवी के स्नेह तथा अनुशासित पारिवारिक परिवेश ने उनके व्यक्तित्व की मजबूत नींव रखी।
विद्यार्थी जीवन से ही कुशाग्र बुद्धि, समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और कुछ अलग करने का जज्बा उनके स्वभाव का हिस्सा रहा। नौकरी की परंपरागत राह के बजाय उन्हें उद्यमिता और रचनात्मक क्षेत्रों में गहरी रुचि थी। इसी दौरान चाचा हरेश पंवार के संघर्षपूर्ण पत्रकारिता सफर से प्रेरित होकर उन्होंने मीडिया को ही अपने जीवन का लक्ष्य चुना। भीम प्रज्ञा मीडिया हाउस पहुंचकर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे पत्रकारिता के माध्यम से समाज और राष्ट्र के लिए कार्य करना चाहते हैं।
बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करते ही नवीन पंवार ने भीम प्रज्ञा मीडिया हाउस में सक्रिय रूप से सेवाएं देना प्रारंभ किया और साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी निरंतर जारी रखी। स्नातक शिक्षा के उपरांत उन्होंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (एमजेएमसी) की डिग्री प्राप्त की। इसके साथ ही कंप्यूटर कौशल एवं आईटीआई प्रशिक्षण ने उन्हें तकनीकी रूप से भी सक्षम बनाया। जिस उम्र में युवा खेल और मनोरंजन में समय व्यतीत करते हैं, उस समय नवीन पंवार ने स्वयं को लेखन, प्रशिक्षण, संपादन और फील्ड रिपोर्टिंग में झोंक दिया—यही उनकी लेखनी की धार और दृष्टि की स्पष्टता का आधार बना।
मीडिया जगत में प्रवेश करते ही इनहोने मार्केटिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, डिजिटल कंटेंट, संपादन और प्रबंधन—सभी क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुभव अर्जित किया। दैनिक भास्कर डिजिटल, फर्स्ट इंडिया न्यूज़ चैनल और ज़ी न्यूज़ चैनल के साथ स्ट्रिंगर रिपोर्टिंग करते हुए उन्होंने जमीनी मुद्दों को मजबूती से उठाया। डिजिटल मंचों पर यूट्यूब, वेब रिपोर्टिंग और एडिटिंग में दक्षता हासिल कर उन्होंने समाचार को व्यापक पाठक-दर्शक वर्ग तक पहुंचाया।
आज दैनिक भीम प्रज्ञा में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत नवीन पंवार निष्पक्ष, निर्भीक और तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। इनकी रिपोर्टिंग की विशेषता यह है कि वे समस्या से समाधान तक की यात्रा को जिम्मेदारी से प्रस्तुत करते हैं। जनहित के मुद्दों पर इनकी खोजी रिपोर्टिंग ने प्रशासन, नीति-निर्माताओं और जनप्रतिनिधियों तक प्रभावी संवाद स्थापित किया है। यही कारण है कि भीम प्रज्ञा की आवाज़ गांव की गुवाड़ से निकलकर राजधानी, सचिवालय और संसद तक पहुंच रही है।
पत्रकारिता के साथ-साथ वे सामाजिक सरोकारों से भी गहराई से जुड़े हैं। लोक सेवा ज्ञान मंदिर ट्रस्ट के बुहाना ब्लॉक प्रभारी के रूप में वे शिक्षा, जागरूकता और सेवा कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। निरंतर अध्ययन, प्रशिक्षण और नवाचार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें एक प्रखर और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।
महज 26 वर्ष की आयु में नवीन कुमार पंवार ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि दृष्टि स्पष्ट हो, संकल्प दृढ़ हो और मेहनत ईमानदार हो, तो सीमित संसाधनों से भी असाधारण मुकाम हासिल किया जा सकता है। वे पत्रकारिता के मूल्यों—सत्य, साहस और जनहित—के प्रति समर्पित रहते हुए निरंतर आगे बढ़ रहे हैं और आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
(लीगल एडवाइजर)
एडवोकेट मनोज पंवार(लीगल एडवाइजर)
विधि, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ एडवोकेट मनोज पंवार भीम प्रज्ञा मीडिया हाउस के एडवाइजरी बोर्ड में लीगल एडवाइज़र के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने प्रतिभा, परिश्रम और अनुशासन के बल पर विधिक क्षेत्र में सशक्त पहचान बनाते हुए मीडिया और कानून के समन्वय को मजबूती प्रदान की है।
एडवोकेट मनोज पंवार का जन्म 23 अगस्त 1998 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के बुहाना उपखंड अंतर्गत ग्राम सहड़ का बास में हुआ। पिता जोरावर सिंह और माता सुनीता देवी के संस्कारों व मार्गदर्शन में उनका व्यक्तित्व जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और न्यायप्रियता की भावना के साथ विकसित हुआ। प्रारंभ से ही अध्ययनशील स्वभाव और बहुआयामी रुचियों ने उन्हें एक सशक्त पेशेवर के रूप में गढ़ा।
शैक्षणिक दृष्टि से उन्होंने भूगोल विषय में स्नातकोत्तर (एमए), कंप्यूटर शिक्षा में पीजीडीसीए, आईटीआई डिप्लोमा तथा एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। शिक्षा के विविध क्षेत्रों में अर्जित यह ज्ञान उन्हें तकनीकी, प्रशासनिक और विधिक—तीनों स्तरों पर सक्षम बनाता है। विद्यार्थी जीवन से ही उनका झुकाव स्टार्टअप और स्वावलंबन की ओर रहा, आपके मार्गदर्शक (चाचा) हरेश पंवार के निर्देशन में सार्वजनिक जीवन में कदम रखने का लक्ष्य रखा। जिसके चलते इन्होंने स्टांप वेंडर, कंप्यूटर जॉब वर्क तथा विधिक सलाहकार के रूप में व्यावहारिक अनुभव भी अर्जित किया।
भीम प्रज्ञा मीडिया हाउस में वे लीगल फर्म से जुड़े समस्त कार्यभार का कुशलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं। दैनिक भीम प्रज्ञा अखबार के लिए कानूनी परामर्श, विवाद निवारण, संवैधानिक तथ्यों की जांच, दस्तावेज़ी अनुपालन तथा कार्यालय की विधिक आवश्यकताओं की जिम्मेदारी वे नियमित रूप से निभाते हैं। उनके मार्गदर्शन में अखबार की सामग्री का प्रकाशन पूर्णतः संवैधानिक और कानूनी कसौटी पर खरा उतरता है, जिससे किसी भी प्रकार की विवादित स्थिति से बचाव सुनिश्चित होता है।
नवीनतम मीडिया अधिनियम 2023 के अनुपालन में उनकी तकनीकी एवं विधिक दक्षता ने भीम प्रज्ञा को एक सुदृढ़ और उत्तरदायी मीडिया संस्थान के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऑनलाइन डेटा संप्रेषण, तकनीकी दस्तावेज़ों का प्रबंधन और विधिक रिकॉर्ड का सुव्यवस्थित संधारण उनके सतत प्रयासों का परिणाम है।
एडवोकेट मनोज पंवार केवल कानूनी सलाह तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक न्याय के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। जनहित से जुड़े मामलों में वे लोगों को न्यायिक राहत दिलाने के साथ-साथ अदालती प्रक्रियाओं में सहयोगी की भूमिका निभाते हैं। दीन-हीन, जरूरतमंदों और युवाओं के लिए वे एक मार्गदर्शक के रूप में निरंतर कानूनी परामर्श प्रदान करते हैं।
इसके साथ ही, युवाओं के कैरियर निर्माण और स्वाध्याय को प्रोत्साहित करने हेतु भीम प्रज्ञा द्वारा संचालित सेंट्रल लाइब्रेरी के कुशल प्रबंधन का दायित्व भी वे निभा रहे हैं। शांत, प्राकृतिक और सुव्यवस्थित वातावरण में कार्य करते हुए उनकी कार्यशैली टीम के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है।
भीम प्रज्ञा टीम के सक्रिय और भरोसेमंद सदस्य के रूप में एडवोकेट मनोज पंवार की विधिक सेवाओं ने इस मंच को न केवल मजबूती दी है, बल्कि पाठकों और समाज को कानून के प्रति जागरूक करने में भी अहम भूमिका निभाई है। उनकी दूरदृष्टि, तकनीकी समझ और संवैधानिक निष्ठा भीम प्रज्ञा मीडिया हाउस की निरंतर प्रगति का मजबूत आधार बनी हुई है।
एडमिन, भीम प्रज्ञा
कुशल नेतृत्व, संतुलित निर्णय क्षमता और समर्पित कार्यशैली के साथ श्रीमती मीना एच. पंवार भीम प्रज्ञा मीडिया हाउस की एडमिन भूमिका में एक सशक्त स्तंभ के रूप में कार्यरत हैं। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के प्रभाव से भीम प्रज्ञा फाउंडेशन ने निरंतर प्रगति की है, जिसके परिणामस्वरूप आज दैनिक समाचार पत्र के साथ-साथ साप्ताहिक पत्रिका का सफल संपादन और प्रकाशन नियमित रूप से हो रहा है।
एक प्रभावी महिला नेतृत्व के रूप में वे टीम के साथ संतुलन बनाते हुए भीम प्रज्ञा को गति देने के स्पष्ट लक्ष्य के साथ कार्य कर रही हैं। घर-गृहस्थी और पारिवारिक दायित्वों का कुशल निर्वहन करते हुए भी वे अखबार से जुड़े प्रशासनिक, संगठनात्मक और प्रबंधन संबंधी कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। उनका समर्पण इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासन के साथ महिलाएं बहुआयामी जिम्मेदारियों को सफलता से निभा सकती हैं।
श्रीमती मीना एच. पंवार का जन्म 14 अप्रैल 1986 को हरियाणा प्रदेश के महेंद्रगढ़ जिले के कनीना खंड अंतर्गत ग्राम ककराला में हुआ। पिता रण सिंह पुनिया और माता इंद्रावती देवी के सुसंस्कारों एवं मार्गदर्शन में उनका व्यक्तित्व शिक्षा, सेवा और जिम्मेदारी की भावना से विकसित हुआ। उन्होंने एम.ए. और बी.एड. तक उच्च शिक्षा प्राप्त की। विधि के प्रति रुचि के चलते उन्होंने एलएलबी प्रथम वर्ष की पढ़ाई भी आरंभ की, हालांकि स्वास्थ्य कारणों से उसे बीच में स्थगित करना पड़ा।
राजस्थान में 27 नवंबर 2009 को भीम प्रज्ञा के संस्थापक हरेश पंवार के साथ उनका विवाह संपन्न हुआ। पत्रकारिता के वातावरण और सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव ने उनकी रुचि को नई दिशा दी और वे भीम प्रज्ञा मीडिया हाउस के मिशन से सक्रिय रूप से जुड़ गईं। उन्होंने नारी शक्ति के रूप में इस मंच को सशक्त बनाने में निरंतर परिश्रम किया और इसे एक संगठित मीडिया हब के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
शिक्षा के प्रति उनकी अपनी अधूरी अभिलाषा को समाजहित में रूपांतरित करते हुए वे युवाओं के कैरियर निर्माण और सरकारी सेवाओं की तैयारी के लिए भीम प्रज्ञा सोशल वेलफेयर द्वारा संचालित सेंट्रल लाइब्रेरी के प्रबंधन का दायित्व भी संभाल रही हैं। इसके माध्यम से वे विद्यार्थियों और युवाओं को अध्ययन के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने में निरंतर प्रयासरत हैं।
भीम प्रज्ञा टीम को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से उनकी सेवाएं नियमित और संगठित रूप में जारी हैं। अखबार के प्रचार-प्रसार, डाक प्रसारण, प्रशासनिक समन्वय तथा आंतरिक व्यवस्था में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहती है। परिवार, बच्चों के लालन-पालन और सामाजिक दायित्वों के साथ-साथ पत्रकारिता के इस मिशन में उनका योगदान भीम प्रज्ञा मीडिया हाउस की मजबूती का आधार है।
श्रीमती मीना एच. पंवार का नेतृत्व यह सिद्ध करता है कि समर्पण, अनुशासन और सेवा भाव के साथ किया गया कार्य न केवल संस्थान को ऊंचाइयों तक ले जाता है, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा भी देता है।
हमारे टीम लीडर
रजनीकांत मिश्रा (उप संपादक)
सच के पक्ष में निर्भीक कलम : रजनीकांत मिश्रा की पत्रकारिता यात्रा
प्रतिभा, साहस और संकल्प के साथ पत्रकारिता की डगर पर निरंतर आगे बढ़ते हुए सच को सच कहने की निर्भीक हिम्मत रखने वाले युवा पत्रकार रजनीकांत मिश्रा आज भीम प्रज्ञा मीडिया हाउस की सशक्त पहचान बन चुके हैं। समाज को आईना दिखाने की जिद, अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज बनने का जज्बा और दीन-हीन-गरीब के सारथी के रूप में सेवा भाव—यही उनकी पत्रकारिता की मूल आत्मा है। वे केवल समाचार संप्रेषण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जन सरोकारों को उठाकर समाधान की दिशा में पहल करने वाले कर्मयोगी पत्रकार के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
रजनीकांत मिश्रा का जन्म राजस्थान के झुंझुनू जिले के चिड़ावा कस्बे में पिता कैलाश चंद्र मिश्रा एवं माता विद्या देवी के सुसंस्कारित परिवार में हुआ। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने एमकॉम और बीएड की डिग्री प्राप्त की और प्रारंभ में निजी क्षेत्र में अध्ययन-अध्यापन के कार्य से जुड़े रहे। किंतु समाज सेवा के प्रति उनकी गहरी आस्था ने उन्हें सीमित दायरे से बाहर निकलकर व्यापक सामाजिक सरोकारों की ओर अग्रसर किया। विद्यार्थी जीवन में राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़कर उनमें राष्ट्रीय भावनाओं और सेवा चेतना का विकास हुआ।
सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों का संतुलन साधते हुए 12 दिसंबर 2009 को खेतड़ी क्षेत्र के पपुरना निवासी सविता शर्मा के साथ उनका विवाह संपन्न हुआ। इसके बाद समाज सेवा और राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण और अधिक सुदृढ़ हुआ। वे जन सेवा संस्थान से जुड़कर विगत तेरह वर्षों से निरंतर सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। वर्ष 2019 में लोक सेवा ज्ञान मंदिर ट्रस्ट से जुड़ाव ने उन्हें मानवता की भलाई के कार्यों में और गहराई से जोड़ दिया।
कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कठिन दौर में, जब मानव सभ्यता का अस्तित्व संकट में था, रजनीकांत मिश्रा ने जमीनी स्तर पर जन सेवा करते हुए कई प्रभावशाली ग्राउंड रिपोर्टिंग और लेखन कार्य किए, जो विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए। इसी दौरान लोक सेवा ज्ञान मंदिर ट्रस्ट के सहयोगी राधेश्याम सुखाड़िया के माध्यम से उनकी मुलाकात भीम प्रज्ञा के प्रधान संपादक हरेश पंवार से हुई। उनकी रचनाएं समय-समय पर प्रकाशित होने लगीं। लॉकडाउन के कारण निजी क्षेत्र का कार्य बंद होने के बाद उन्होंने 2020 में पूरे समर्पण के साथ पत्रकारिता को अपना मुख्य कर्मक्षेत्र बनाया।
दैनिक भीम प्रज्ञा के चिड़ावा संवाददाता के रूप में उन्होंने अपनी पत्रकारिता यात्रा को नई गति दी। उनकी सूझबूझ, निष्पक्ष दृष्टि और सराहनीय सेवाओं को देखते हुए वर्ष 2022 में उन्हें झुंझुनू जिले के ब्यूरो चीफ का दायित्व सौंपा गया। इस भूमिका में उन्होंने गंभीर जन मुद्दों, दबे-कुचले और हाशिए पर खड़े समाज की आवाज को मजबूती से उठाया और निर्भीक ग्राउंड रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया।
कोरोना काल में जब बड़े मीडिया कॉरपोरेट असमंजस में थे, उस समय भीम प्रज्ञा मीडिया हेल्पलाइन के जरिए जन समस्याओं के समाधान, मानवता के लिए कार्य करने वाले कर्मठ कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने और समाज सेवा की मिसाल कायम करने वाले कार्यों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म से मिले आकर्षक प्रस्तावों के बावजूद भीम प्रज्ञा के प्रति उनका अपनत्व और विश्वास उन्हें इसी विचारधारा से जोड़े हुए है। बिना किसी शिकायत, बिना किसी बड़े प्रतिफल की अपेक्षा के वे निरंतर टीम के विस्तार और मजबूती में सहयोग करते आ रहे हैं।
उनके पत्रकारिता कौशल, सृजनात्मक अभिरुचि और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें 20 नवंबर 2025 को भीम प्रज्ञा के राजस्थान संस्करण का उप संपादक नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में एक सशक्त टीम समाज के प्रति उत्तरदायी, निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता को आगे बढ़ा रही है। रजनीकांत मिश्रा आज भीम प्रज्ञा मीडिया हाउस के उस मूल विचार के संवाहक हैं, जिसमें सत्य, सेवा और साहस को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
उनकी यात्रा यह सिद्ध करती है कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक पवित्र दायित्व है—और रजनीकांत मिश्रा इस दायित्व को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभा रहे हैं।


