राजस्थान में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम के दौरान लोगों में नाम हटने की आशंका बढ़ गई है। बिहार में पहले हुए SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए थे, क्योंकि उनका मूल निवासी सत्यापन पूरा नहीं हुआ था। इसी वजह से अब राजस्थान में भी लोग एहतियातन जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में जुट गए हैं।
प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में 35 हजार से अधिक जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं।
झुंझुनूं में तेजी: 4 महीनों में 13 हजार से ज्यादा प्रमाण पत्र
केवल झुंझुनूं ज़िले में ही जुलाई से अक्टूबर के बीच 13,000+ जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए। इनमें से अधिकतर लोग 50 वर्ष से ऊपर के हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इन आवेदकों ने तहसीलदार द्वारा जारी अनुमतिपत्र (अनुज्ञा पत्र) के आधार पर प्रमाण पत्र प्राप्त किए। इनमेें लगभग 90% लोग एक विशेष समुदाय से संबंधित बताए जा रहे हैं।
हालाँकि वर्तमान SIR में 2002 की मतदाता सूची को आधार माना जा रहा है। जिन परिवारों के नाम उस सूची में दर्ज हैं, उन्हें जन्म प्रमाण पत्र देने की आवश्यकता नहीं है। केवल उन लोगों से दस्तावेज मांगे जाएंगे जिनके परिजन 2002 की सूची में दर्ज नहीं हैं।
उम्रदराज़ लोगों को भी बनवाना पड़ा प्रमाण पत्र
कई वरिष्ठ नागरिकों को भी अब जाकर जन्म प्रमाण पत्र बनवाना पड़ा:
-
गोविंदपुरा (चिड़ावा) के इक़बाल (67 वर्ष) — जन्म 1957, तहसीलदार से अनुज्ञा पत्र लेकर प्रमाण पत्र प्राप्त किया
-
नवलगढ़ वार्ड 30 के लियाकत (64 वर्ष) — जन्म 1961, शपथ पत्र के आधार पर प्रमाण पत्र जारी
-
गिडानिया (चिड़ावा) के नज़रू (62 वर्ष) — जन्म 1963, तहसीलदार की अनुमति से प्रमाण पत्र बना
किस क्षेत्रों में सबसे अधिक आवेदन आए?
एसआईआर प्रक्रिया की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में दस्तावेज़ बनवाने की होड़ ज़्यादा देखने को मिली।
जुलाई से अक्टूबर तक:
ग्रामीण क्षेत्र
-
उदयपुरवाटी — 1026 प्रमाण पत्र
-
नवलगढ़ — 1026 प्रमाण पत्र
-
खेतड़ी — 1010 प्रमाण पत्र
शहरी क्षेत्र
-
झुंझुनूं शहर — 1891 प्रमाण पत्र
-
नवलगढ़ शहर — 1537 प्रमाण पत्र
जन्म-मृत्यु पंजीकरण पर अधिकारियों का बयान
अधिकारियों के अनुसार:
“जन्म और मृत्यु का पंजीकरण अब पूरी तरह ऑनलाइन है। एक वर्ष की आयु के बाद प्रमाण पत्र केवल तहसीलदार की अनुमति से जारी किए जाते हैं। जुलाई के बाद ऐसे मामलों में अचानक बढ़ोतरी दिखाई दी है।”
