प्राचार्य ने संविधान निर्माताओं को दी श्रद्धांजलि; अनुशासन, समानता और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्यों को जीवन में उतारने का आह्वान
भीम प्रज्ञा न्यूज़.खेतड़ी नगर।
केंद्रीय विद्यालय खेतड़ी नगर में बुधवार, 26 नवंबर को संविधान दिवस अत्यंत सम्मान और उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय में विभिन्न शैक्षणिक एवं जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनका मुख्य उद्देश्य छात्रों में संविधान के प्रति सम्मान, नागरिक कर्तव्यों की समझ और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के प्राचार्य के एल मीना द्वारा संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित सभी संविधान निर्माताओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करके हुई। इसके उपरांत, विद्यालय के सभी शिक्षक, विद्यार्थी और स्टाफ ने मिलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया, जिसके दौरान छात्रों ने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य महोदय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि भारतीय संविधान विश्व के सबसे विस्तृत और उत्कृष्ट संविधानों में से एक है। उन्होंने विद्यार्थियों से संविधान में निहित मूल सिद्धांतों—अनुशासन, समानता, सहिष्णुता एवं कर्तव्यनिष्ठा—को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया, ताकि वे एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बन सकें।विद्यालय के मुख्याध्यापक मनोज कुमार वर्मा ने संविधान के निर्माण की प्रक्रिया, इसकी विशेषताओं और डॉ. अंबेडकर की केंद्रीय भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने छात्रों को बताया कि संविधान केवल कानून का एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह देश की एकता और विविधता का प्रतीक है, जो सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है। विद्यालय की छात्रा पूजा जेवरिया और चाहत जांगिर ने भी भाषण के माध्यम से संविधान के मुख्य शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर (‘बाबा साहब’) की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डॉ. अंबेडकर ने हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत ढांचा तैयार किया। मंच संचालन अध्यापक लोकेश कुमार ने सफलतापूर्वक किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय एकता और गौरव की भावना के साथ राष्ट्रगान के सामूहिक गायन से हुआ। संविधान दिवस ने केंद्रीय विद्यालय खेतड़ी नगर के छात्रों में देश के लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति नई जागरूकता और गर्व की भावना उत्पन्न की।
