22 फरवरी को नागपुर जाने के लिए किया आह्वान
भीम प्रज्ञा न्यूज़.झुंझुनूं। बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा के कटक उड़ीसा में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन की परमिशन को रद्द किए जाने के विरोध में राष्ट्रीय अध्यक्ष मा.वामन मेश्राम भारत मुक्ति मोर्चा द्वारा तृतीय चरण के तहत झुंझुनू अंबेडकर पार्क से पीरू सिंह सर्किल होते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय पर सभा के बाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया गया। बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क जिलाध्यक्ष राधेश्याम चिरानिया एवं संयोजक मोतीलाल डिग्रवाल ने बताया कि भारत सरकार ओबीसी की जाति आधारित जनगणना तथा ईवीएम को हटाकर बेलट पेपर से चुनाव नहीं कराना चाहती है ताकि आरएसएस बीजेपी निरंतर सत्ता में बनी रह सके। सत्तासीन सरकार नहीं चाहती कि ओबीसी को उसका पूरा अधिकार मिले क्योंकि आरक्षण कोई भीख नहीं है।आरक्षण प्रतिनिधित्व है जिसको निजीकरण के नाम पर समाप्त करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है जिसके चलते एससी एसटी ओबीसी के लोगों में भारी आक्रोश और विरोध व्याप्त है। यह सरकार धर्म,संप्रदाय,मंदिर,मस्जिद,कब्रिस्तान,शमशान,गाय,गोबर और मूत्र के नाम पर भ्रमित कर आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द को कम करने का प्रयास करती दिखाई दे रही है। यह सरकार भारत में प्रदत्त मौलिक अधिकारों को समाप्त करने पर आमदा है। सनद रहे छब्बीस दिसंबर से तीस दिसंबर तक कटक उड़ीसा में बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा के होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन को सभी प्रकार की स्वीकृतियां होते हुए भी कुछ घंटे पूर्व स्वीकृति रद्द कर दी गई। संवैधानिक मौलिक अधिकारों का हनन करना संविधान का खुलेआम उल्लंघन है। लोकतंत्र पर हमला किया गया है। यह कुत्सित प्रयास ओबीसी,एससी,एसटी और मूलनिवासी समाज की आवाज दबाने का असंवैधानिक प्रयास है।

भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है। यह जनता की स्वतंत्रता,समानता और उज्जवल भविष्य की गारंटी देता है, लेकिन जब कोई सरकार या प्रशासन जनता के मौलिक अधिकारों को प्रतिबंधित और सीमित तथा स्थगित करने या कुचलने लगता है तो यह केवल किसी व्यक्ति या संगठन पर हमला नहीं होता है। यह संविधान पर हमला है। पूरे समाज को गुलामी की ओर धकेलने की शुरुआत होती है। भारत के संविधान का भाग 3 (अनुच्छेद 12 से 35) हर नागरिक को बोलने की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा करने और संगठन बनाने का, सरकार एवं कानून के सामने सभी नागरिकों को भेद रहित समानता और सम्मानपूर्वक जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार यह मौलिक अधिकार देता है। उन्होंने बताया कि आरएसएस एवं भाजपा की राजनीति और व्यवस्था ओबीसी समाज को भ्रमित और गुमराह रखने पर आधारित है। ओबीसी की जाति आधारित जनगणना होने से ओबीसी की वास्तविक जनसंख्या सामने आएगी। सामाजिक शैक्षणिक और आर्थिक असमानताओं का सच उजागर होगा इसी डर से कटक के अधिवेशन को साजिश करके षडयंत्र पूर्वक रोका गया है। यह किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का मूल निवासी बहुजन जनता जवाब चाहती है।
उड़ीसा की राज्य सरकार व केंद्र सरकार सहित संपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था से हम जवाब चाहते हैं कि महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कटक उड़ीसा में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन की स्वीकृति निरस्त किए जाने पर अविलंब संज्ञान की अपेक्षा करते हैं, अगर इन मौलिक अधिकारों की रक्षा नहीं की जाती है तो भारतीय संविधान केवल किताब बनकर रह जाएगा। अधिकार केवल कागजों पर होंगे जमीन पर नहीं, यह मामला संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का खुलेआम उल्लंघन है। इसलिए राष्ट्रपति इस मामले में स्वयं हस्तक्षेप करें और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री को संविधान की पालना के निर्देश देते हुए बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन की परमिशन को तत्काल प्रभाव से पुनर्बहाल करे। ध्यान रहे उड़ीसा की राज्य सरकार संविधान की शपथ लेकर आई हुई सरकार है।
इसके बावजूद भी संविधान का उल्लंघन कर रही है जो पूर्णतया असंवैधानिक है। देश में संवैधानिक तंत्र की रक्षा हेतु तुरंत प्रभाव से उड़ीसा की राज्य सरकार को बर्खास्त किया जाए। ताकि देश के प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा हो सके। आयुष्मति किरण, सोमकांत, नर्मदा, आसिया बानो, सरिता, शांति देवी, प्रियंका, ममता, शीला देवी, अंजू, मंजू, कोयल, सुमित्रा, प्रियंका, ममता गर्वा, शकुंतला, वेद प्रकाश गोयल, रामसिंह जोधा, गोविंद अग्रवाल, हरलाल सिंह बड़वासी, ताहिर खत्री, राजवीर सिंह, प्रभु दयाल जागृत, एडवोकेट बजरंगलाल, हरिसिंह आलडिया, मुकेश, सुनील पंकज, धर्मपाल,रवि, योगेश, नरेश, राहुल, महेंद्र सिंह, ज्योति प्रकाश, सुरेंद्र, संदीप, शेरसिंह,सुरेश, छोटेलाल गजराज, एमपी बाकोलिया,दारासिंह, एडवोकेट रतनलाल, बस्तीराम, गोपाल सिंह गुड़ा सहित दर्जनों मूलनिवासी लोगों ने उपस्थिति होकर कलक्टर को ज्ञापन दिया गया।

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