भीम प्रज्ञा न्यूज़ @ हरेश पंवार | झुंझुनूं
झुंझुनूं जिले के बगड़ कस्बे में स्थित प्रसिद्ध चंद्रनाथ आश्रम (बगड़ धाम) के संस्थापक, नाथ संप्रदाय के प्रतिष्ठित संत एवं पीठाधीश्वर चंद्रनाथ जी महाराज का 27 दिसंबर 2025 को दीर्घ साधनामय जीवन पूर्ण कर देवलोकगमन हो गया। नाथ संप्रदाय की परंपरा के अनुसार वे गद्दी समा गए। उनके देवलोकगमन की सूचना मिलते ही संपूर्ण शेखावाटी अंचल सहित झुंझुनूं जिले में शोक की लहर दौड़ गई।
सरलता, सादगी, विनम्रता और करुणा से परिपूर्ण जीवन जीने वाले चंद्रनाथ जी महाराज विगत कुछ समय से उम्रजनित अस्वस्थता से ग्रसित थे। शनिवार को नाथ संप्रदाय की साधु-संत परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
बाल्यकाल से वैराग्य तक की प्रेरक यात्रा
चंद्रनाथ जी महाराज का जन्म झुंझुनूं जिले के चारणवास गांव में, बीहड़ मठ के समीप हुआ। अल्प आयु में माता-पिता का साया उठ जाने के बाद उनकी बड़ी बहन उन्हें अपने ससुराल शिशिया गांव ले गईं। वहीं से उनके जीवन में भक्ति और वैराग्य की भावना का बीजारोपण हुआ।
सत्संगों को सुनते-सुनते उन्होंने नाथ आश्रम सामधा धूणी तक पैदल जाने का संकल्प लिया। एक बार प्रचंड बहाव वाली नदी के कारण उन्हें लौटना पड़ा, किंतु वैराग्य की ज्वाला शांत नहीं हुई। अंततः वे सामधा धूणी पहुंचे और वहां के तत्कालीन पीठाधीश्वर गोपालनाथ जी महाराज के शिष्य बने। जीवनपर्यंत उन्होंने गुरु-सेवा और साधना को ही अपना पथ बनाया।
बगड़ धाम की स्थापना और समाज-सेवा का विस्तार
आश्रम में उनकी निष्ठा, सेवा-भाव और सक्रियता को देखते हुए गुरु गोपालनाथ जी महाराज उन्हें उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे, किंतु कुछ ईर्ष्यालु तत्वों द्वारा उन पर चोरी का निराधार आरोप लगाया गया। अंतर्यामी गुरु ने सत्य को समझते हुए चंद्रनाथ जी महाराज को नए क्षेत्र में आश्रम स्थापित कर समाज-सेवा का कार्य करने की आज्ञा दी।
गुरु आज्ञा से वे बगड़ कस्बे पहुंचे और एक खेत में चिमटा गाड़कर साधना प्रारंभ की। यहीं से गोपालनाथ महाराज चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से आध्यात्मिक और सामाजिक चेतना के कार्यक्रम प्रारंभ हुए। यह स्थान आगे चलकर चंद्रनाथ आश्रम, बगड़ धाम के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
आज आश्रम से लाखों श्रद्धालु जुड़े हुए हैं और हजारों सेवादार शिष्य परंपरा में सक्रिय हैं। आश्रम में गौशाला, नियमित भंडारा, कीर्तन-भजन, चांदनी की पंचमी पर सत्संग तथा वर्ष में चार बड़े धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन निरंतर होता है।
सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध सशक्त जन-जागरण
चंद्रनाथ जी महाराज केवल संत ही नहीं, बल्कि एक सशक्त समाज-सुधारक भी थे। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया। मेघवंशी समाज चेतना संस्थान के संस्थापक बी.एल. चिरानियां के आग्रह पर 12 सितंबर 2004 को उनके मुखारविंद से झुंझुनूं जिले में पहली बार मृत्यु भोज प्रथा के विरुद्ध संकल्प पारित करवाया गया।
मेघवाल महासम्मेलन के माध्यम से समाज में फैली कई बुराइयों पर प्रतिबंध लगाने की सामूहिक शपथ दिलाई गई। इसके परिणामस्वरूप समाज में होने वाले करोड़ों रुपये के अनावश्यक खर्च पर रोक लगी और वही धन शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक उत्थान जैसे सकारात्मक कार्यों में लगने लगा, जिससे गरीब और वंचित वर्गों को विशेष लाभ मिला।
शिक्षा, संस्कार और आध्यात्मिक विरासत
सनातन संस्कृति में साधु-संगति के महत्व को जीवन में उतारते हुए चंद्रनाथ जी महाराज ने समाज को कुरीतियों से दूर कर सदाचार और नैतिक मूल्यों की ओर प्रेरित किया। झुंझुनूं जिले में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा।
उनके सत्संगों में सामाजिक चेतना, नैतिक अनुशासन और आध्यात्मिक संतुलन का संदेश निरंतर मिलता रहा। जीवन की विषम परिस्थितियों—बाल्यकाल में अनाथ होने से लेकर आश्रम जीवन में अन्याय सहने तक—के अनुभवों को आत्मसात करते हुए उन्होंने अपने जीवनकाल में ही भानीनाथ जी को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था।
अमिट स्मृतियाँ छोड़ गए चंद्रनाथ जी महाराज
चंद्रनाथ जी महाराज के देवलोकगमन से झुंझुनूं जिले ने एक महान संत, मार्गदर्शक और समाज-सुधारक को खो दिया है। वे अपने पीछे आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक सुधार और सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर छोड़ गए हैं।
बगड़ धाम आज भी उनके आदर्शों का जीवंत केंद्र बना हुआ है, जहां प्रतिदिन श्रद्धालुओं के लिए भंडारा, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान निरंतर होते रहेंगे।
सरल साधु, विरल व्यक्तित्व और जन-जागरण के प्रतीक चंद्रनाथ जी महाराज सदैव श्रद्धालुओं के हृदय में अमर रहेंगे।

जय श्री चंदन नाथ जी महाराज महाराज के चरणों में कोटि-कोटि वंदन नमन महाराज के बारे में जो कुछ लिखा सोना पड़ा और शाश्वत सत्य है। महाराज ने समाज में व्याप्त बुराइयां कुरीतियों और उत्थान के लिए अनेक कार्य किया जो हर आमजन के दिलों में बचे रहेंगे।