-नगर परिषद के ईओ समेत अधिकांश अधिकारी से लेकर चेयरमैन तक केवल टैडरों में कमीशनखोरी व हिस्सेदारी को लेकर मस्त
-मुख्यमंत्री के विशेष विजिलेंस विभाग से हो हर टैंडर प्रकिया की जांच
विजय रंगा (ब्यूरो चीफ)
भीम प्रज्ञा न्यूज़.टोहाना।
नगर परिषद टोहाना में हर प्रकार की व्यवस्था का बेड़ा पूरी तरह से गर्क हो चुका है।ईओ , सचिव सहित एमई,जेई से लेकर चेयरमैन तक सभी कमिशनखोरी व टैडरों में हिस्सेदारी को लेकर चिंतित रहते हैं, वर्तमान में नगर परिषद टोहाना में हर तरफ़ अंधेर नगरी चौपट चैयरमेन व अन्य अधिकारियों के कार्यकलापों की विशेष विजिलेंस टीम से जांच होनी चाहिए तथा दूध का दूध और पानी का पानी जैसा स्पष्ट पारदर्शिता पूर्ण जांच कर जनता के साथ न्याय होना चाहिए।नगर परिषद टोहाना के चेयरमैन के तो व्यवहार की भी जांच होनी चाहिए तथा जनता से मिलने व जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सप्ताह में दिन व समय निश्चित होने चाहिए। नगरपरिषद टोहाना में एक सहायता कक्ष भी स्थापित हो जिससे नगर परिषद में गये व्यक्ति को अपने काम कराने में आसानी हो।अब तक आम आदमी अपने किसी भी काम के लिए नगर परिषद टोहाना के कार्यालय में जाता है तो पता चलता है कि सम्बंधित अधिकारी या कर्मचारी ही नदारद है, इसके बाद ज़बाब मिलता है कल आना। अगले दिन फिर वही रटे रटाये जबाब,कुल मिलाकर स्थिति काफी विकट बन चुकी है।ना चैयरमेन की कोई व्यवस्था और ना ही अधिकारियों व उनके अधिनस्थ कर्मचारियों की।
नगर परिषद टोहाना के चैयरमेन को तो राजनीति से ही फुर्सत नहीं है उन्हें जनता के हितों से कोई सरोकार नहीं है, मुख्य सचिव हरियाणा व मुख्य प्रशासक नगर परिषद फतेहाबाद व डीसी फतेहाबाद नगर परिषद टोहाना के चैयरमेन व ईओ व अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी व कार्यकलापों को सूचिबद्ध करे ताकि आम जनता को नगर परिषद के कार्यों के निपटान में आसानी हो। शहर में स्ट्रीट लाइटों की बदहाली से लेकर शहर में अतिक्रमण, कचरा उठान में सौ फिसदी लापरवाही से शहर का बुरा हाल है। चैयरमेन से लेकर एमई इत्यादि तक के सीट पर बैठने का कोई समय निर्धारित नहीं है। मुख्यमंत्री महोदय व नगर निकाय मंत्री महोदय से मांग है कि नगर परिषद टोहाना के लाईट व्यवस्था से लेकर सफाई व्यवस्था तक के सभी टैडरो में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रुप से चेयरमैन या इनके किसी खास आदमी को टैंडर मिलने व कमीशनखोरी की विशेष विजिलेंस टीम से जांच होनी चाहिए, अन्यथा शहर की किसी सामाजिक संस्था या सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर करनी पड़ सकती है।
