(छठी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि एवं प्रेरणा-दिवस विशेष लेख)
भीम प्रज्ञा न्यूज़ खेतड़ी।
खेतड़ी का नाम आज जिस सम्मान से लिया जाता है, उसकी पृष्ठभूमि में एक ऐसा व्यक्तित्व खड़ा है जिसने अपना संपूर्ण जीवन शिक्षा, सामाजिक उत्थान और नवाचार के लिए समर्पित कर दिया—वह नाम है डॉ. बी.एल. मेहरड़ा का। पूर्व आईएएस अधिकारी, विद्वान, प्रशासक और समाज सुधारक, डॉ. मेहरड़ा ने प्रशासनिक सेवा में रहते हुए भी शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी साधना माना।
आज उनकी छठी पुण्यतिथि पर खेतड़ी क्षेत्र ही नहीं, संपूर्ण राजस्थान उनकी देन, उनके सपनों और उनके द्वारा खड़े किए गए संस्थानों को याद करते हुए भावुक हो उठता है।
डॉ. मेहरड़ा उन दुर्लभ व्यक्तित्वों में से थे जिन्होंने जीवन की हर चुनौती को अवसर में बदलकर दिखाया। खेतड़ी कस्बे की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) तक पहुंचे और फिर देश-प्रदेश में अनगिनत जिम्मेदार पदों पर रहते हुए समाज को दिशा देने का काम किया।
परंतु उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ उच्च पद नहीं थी—बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में खड़ा किया गया विशाल योगदान था, जिसने हजारों बच्चों के भविष्य को संवार दिया।
खेतड़ी में शिक्षा-जागरण की अलख जगाने वाले महानायक डॉ. मेहरड़ा ने समय की आवश्यकता को समझते हुए उन क्षेत्रों में शिक्षण संस्थान स्थापित किए, जहां शिक्षा की पहुंच बहुत कम थी।इन संस्थानों ने वर्षों तक खेतड़ी, बुहाना, शेखावाटी और आस-पास क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई।
खेतड़ी क्षेत्र की मिट्टी में वह तेज, वह उजाला और वह सामाजिक चेतना आज भी महसूस होती है, जो एक महान शिक्षाविद् और दूरदर्शी प्रशासक—डॉ. बी.एल. मेहरड़ा—ने अपने जीवनभर के कर्म से रोपित की थी। पूर्व आईएएस अधिकारी होकर भी उन्होंने शिक्षा को ही जीवन की सबसे बड़ी साधना माना।
आज 5 दिसंबर 2025 को उनकी छठी पुण्यतिथि पर पूरा क्षेत्र श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए उस युग-पुरुष को याद कर रहा है, जिसने शिक्षा को गांवों की दहलीज़ तक पहुंचाकर एक अद्वितीय क्रांति की शुरुआत की।
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1986: खेतड़ी में शुरू हुआ विनोदनी पीजी कॉलेज, जिसने हजारों जीवन संवार दिए
गरीब और ग्रामीण परिवेश के बच्चों को लेकर डॉ. मेहरड़ा के मन में एक ही चिंता थी—
“कहीं अभाव के कारण कोई बच्चा पढ़ाई से वंचित न रह जाए।” इसी बड़े संकल्प और संवेदनशील सोच के साथ उन्होंने 1986 में खेतड़ी में विनोदनी पी.जी. कॉलेज की स्थापना की। डॉ बीएल मेहरड़ा का तब यह कदम सिर्फ एक कॉलेज बनाना नहीं था—बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर की शिक्षा रूपी शेरनी का दूध पिलाने वाले समाज की मजबूत पकड़ को सशक्त बनाना और स्वामी विवेकानंद की कर्म स्थली खेतड़ी में शिक्षा का जन जागरण करने का पहला कदम था। इस संस्थान का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं के भविष्य को दिशा देना, और यह था समाज में ज्ञान का उजाला फैलाना।
आज विनोदिनी कॉलेज की सफलता और उसकी हजारों सफल कहानियां उनकी दूरदर्शिता का जीवंत प्रमाण हैं।
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डॉ. मेहरड़ा का शिक्षा मिशन एक कॉलेज बनाकर नहीं रुका।
उन्होंने अनुभव किया कि समाज तभी विकसित होता है, जब हर वर्ग—खासतौर पर बालिकाएं—शिक्षा से जुड़े।
इसी सोच से उन्होंने स्थापित किए—
एमकेएम महिला महाविद्यालय – ग्रामीण बालिकाओं के लिए शिक्षा का उजला द्वार खोल।
विनोदिनी बीएड कॉलेज – प्रशिक्षित शिक्षकों की पीढ़ी तैयार करने का केंद्र
बीएलएम इंजीनियरिंग कॉलेज, संजीवनी फार्मेसी कॉलेज, मेडिकल व नर्सिंग कॉलेज पैरामेडिकल इंजीनियरिंग कॉलेज व इसके अलावा, डॉ. मेहरड़ा ने करीब दो दर्जन शिक्षण संस्थान स्थापित किए, जिन्होंने सिर्फ खेतड़ी ही नहीं, जयपुर व पूरे शेखावाटी क्षेत्र को एक शिक्षा-हब के रूप में पहचान दिलाई। इन संस्थानों ने—गरीब विद्यार्थियों की फीस में मदद कर हजारों परिवारों को संबल दिया
ग्रामीण युवाओं को तकनीकी, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं के योग्य बनाया। क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिति में सुधार लाया।
इस प्रकार उन्होंने शिक्षा को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे समाज-निर्माण का माध्यम बनाया।
विरासत जो आज भी प्रकाशमान है
डॉ. मेहरड़ा ने दिखाया कि यदि इरादे पवित्र हों और लक्ष्य समाज का उत्थान हो,
तो एक व्यक्ति भी पूरे क्षेत्र की तकदीर बदल सकता है।
आज उनके द्वारा स्थापित संस्थान, उनकी सोच, और उनके कार्य
हजारों परिवारों के जीवन में सफलता का सूरज बनकर चमक रहे हैं।
उनकी पुण्यतिथि पर हम सभी की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि—
“मेहरड़ा साहब, आपका सपना हम आगे बढ़ाते रहेंगे।”
डॉ. मेहरड़ा का शिक्षा मिशन एक कॉलेज बनाकर नहीं रुका।
उन्होंने अनुभव किया कि समाज तभी विकसित होता है, जब हर वर्ग—खासतौर पर बालिकाएँ—शिक्षा से जुड़े।
इसी सोच से उन्होंने स्थापित किए— एमकेएम महिला महाविद्यालय – ग्रामीण बालिकाओं के लिए शिक्षा का उजला द्वार, विनोदिनी बीएड कॉलेज – प्रशिक्षित शिक्षकों की पीढ़ी तैयार करने का केंद्र, इंजीनियरिंग कॉलेज, फार्मेसी कॉलेज, मेडिकल व नर्सिंग कॉलेज, संजीवनी फार्मेसी कॉलेज, इसके अलावा, डॉ. मेहरड़ा ने करीब दो दर्जन शिक्षण संस्थान स्थापित किए, जिन्होंने सिर्फ खेतड़ी ही नहीं, पूरे शेखावाटी क्षेत्र को एक शिक्षा-हब के रूप में पहचान दिलाई।
इन संस्थानों ने—
गरीब विद्यार्थियों की फीस में मदद कर हजारों परिवारों को संबल दिया
ग्रामीण युवाओं को तकनीकी, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं के योग्य बनाया
क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिति में सुधार लाया
इस प्रकार उन्होंने शिक्षा को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे समाज-निर्माण का माध्यम बनाया।
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समाज की आस्था बने मेहरड़ा साहब — सेवा, संवेदना और समर्पण का व्यक्तित्व
डॉ. बी.एल. मेहरड़ा सहज, सादगीपूर्ण, और जनमानस से जुड़े हुए व्यक्तित्व थे।
उनकी सबसे बड़ी ताकत थी—मानवता को समझने की कला।
उन्होंने हर समय यह संदेश दिया कि—
“जिस समाज ने हमें सब कुछ दिया है, उसे वापस लौटाना ही जीवन का असली धर्म है।”
उनके कार्यों, शिक्षण संस्थानों और सेवाभाव ने उन्हें सिर्फ एक प्रशासक या शिक्षाविद् नहीं बनाया—
उन्हें समाज का शिखर पुरुष बनाया, जिनके नाम के साथ आज भी पूरा क्षेत्र गौरव महसूस करता है।
विरासत जो आज भी प्रकाशमान है
डॉ. मेहरड़ा ने दिखाया कि यदि इरादे पवित्र हों और लक्ष्य समाज का उत्थान हो, तो एक व्यक्ति भी पूरे क्षेत्र की तकदीर बदल सकता है। आज उनके द्वारा स्थापित संस्थान, उनकी सोच, और उनके कार्य, हजारों परिवारों के जीवन में सफलता का सूरज बनकर चमक रहे हैं।
उनकी पुण्यतिथि पर हम सभी की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि—
“मेहरड़ा साहब, आपका सपना हम आगे बढ़ाते रहेंगे।”
