रमेशचंद्र
भीम प्रज्ञा न्यूज़.नीमराना।
नीमराना, सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा स्वीकार किए जाने के बाद क्षेत्र में पर्यावरण प्रेमियों और जागरूक नागरिकों में गहरी चिंता और आक्रोश देखने को मिल रहा है। नई परिभाषा के अनुसार 100 मीटर से कम ऊंचाई की पहाड़ियों को अरावली का हिस्सा न मानने के निर्णय को लेकर लोगों का कहना है कि इससे अवैध खनन को बढ़ावा मिल सकता है, जो अरावली के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा साबित होगा। इसी फैसले के विरोध और अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर रविवार को नीमराना क्षेत्र में अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित ज्ञानीनाथ आश्रम में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में ‘अरावली बचाओ संघर्ष समिति’ के गठन की घोषणा की गई। समिति का उद्देश्य अरावली संरक्षण को लेकर जनजागरण फैलाना, गांव – गांव जाकर लोगों को इसके महत्व से अवगत कराना तथा एक सशक्त जनआंदोलन खड़ा करना है। बैठक में यह भी तय किया गया कि समिति प्रशासन और सरकार तक अपनी बात मजबूती से पहुंचाएगी तथा अरावली को होने वाले संभावित नुकसान के खिलाफ संगठित संघर्ष किया जाएगा। इस दौरान भूपेंद्र सिंह चौहान, पूर्व जिला पार्षद जनक सिंह यादव, कर्मपाल सिंह चौहान, संजय यादव, महावीर चरखिया, चित्तर सिंह चौहान, सत्येंद्र यादव, रविंद्र यादव, दीपक पटेल, सुनील सैन सहित अनेक पर्यावरण प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि अरावली केवल पहाड़ियों का समूह नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के जलस्तर, पर्यावरण संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है। यदि इसे कमजोर किया गया तो इसके दूरगामी दुष्परिणाम पूरे क्षेत्र को भुगतने पड़ेंगे। बैठक के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने अरावली को बचाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प लिया।
