सोहनलाल परिहार
भीम प्रज्ञा न्यूज़.बीकानेर।
बीकानेर जिले में खेजड़ी वृक्षों की अवैध कटाई और बड़े सौर ऊर्जा (सोलर) संयंत्रों के बढ़ते पर्यावरणीय प्रभावों के विरोध में चल रहा पर्यावरण संघर्ष समिति का आंदोलन लगातार गति पकड़ रहा है। समिति के मुख्य धरने को आज 150वां दिन पूरा हो गया है, जबकि खेजड़ला रोही नोखा दईया में चल रहा विरोध प्रदर्शन अब 515वें दिन में प्रवेश कर चुका है। धरने पर बैठे प्रमुख कार्यकर्ता बालूराम लेघा ने सरकार की नीतियों पर कड़ा विरोध जताते हुए आरोप लगाया कि सरकार खेजड़ियों को कटवाकर मरुस्थल (रेगिस्तान) के साथ घोर अन्याय कर रही है। लेघा ने सोलर प्लांटों के दूरगामी दुष्परिणामों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “जहाँ-जहाँ सोलर प्लेटें लगी हैं, उन रास्तों से निकलना दुभर हो रहा है। अगर यही स्थिति रही तो बीकानेर शहर भी अगले कुछ सालों में ‘भट्टी के रूप में’ परिवर्तित हो जायेगा।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन वृक्षों को नहीं बचाया गया तो क्षेत्र का पर्यावरण पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।
आंदोलन की बढ़ती गंभीरता इस बात से स्पष्ट होती है कि आज धरने में समाज के विभिन्न वर्गों— इंजीनियर, वकील और आमजन—ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
आज उपस्थित रहकर समर्थन देने वालों में सज्जन कुमार बेनीवाल, रामगोपाल बिश्शनोई, चौथाराम, ताहिर खान, रामप्रताप वर्मा, रामदेव मेघवाल, बुधराम सिगड़, बुधराम सियाग, हनुमान काकड़, महेन्द्र भादू, रामेश्वर लाल गोदारा पलाना, इंजि. ओम प्रकाश बिशनोई, हीरुखां टावरी, अरूण कुमार वैध, शरीफ समेजा, छगन खारा, ओम पन्नू, एडवोकेट प्रेम बिशनोई, सैयद कासम, रघुनाथ वर्मा, बनवारी लाल धारणिया, भँवर लाल चाहर, सहीराम बांगूड़ा, चुन्नीलाल खड़गावत, हुसैन हिन्दुस्तानी व रामचन्द्र पूनिया आदि शामिल थे। पर्यावरण संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि जब तक खेजड़ी कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाता और सोलर प्लांटों के पर्यावरणीय प्रभाव को नियंत्रित नहीं किया जाता, उनका यह शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।
