भीम प्रज्ञा न्यूज़.कोलायत। संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस (6 दिसंबर) पर सोमवार को कोलायत स्थित अंबेडकर सर्किल पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। विभिन्न सामाजिक संगठनों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने डॉ. अंबेडकर के सिद्धांतों और विचारों पर चलने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता आशीष कांटिया झझू ने डॉ. अंबेडकर के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा, “बाबा साहब ने विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान तैयार किया, जो आज भी देश का मार्गदर्शन कर रहा है।” झझू ने इस बात पर जोर दिया कि 6 दिसंबर को एक महान सूर्य अस्त हुआ था, लेकिन उनकी चमक आज भी फीकी नहीं पड़ी है और उनके विचार तथा दिए गए अधिकार समाज में जीवित हैं। युवा कार्यकर्ता अनिल सुंबरा ने समाज से डॉ. अंबेडकर के मूल मंत्र – ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ – को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से दलित समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में सक्रिय पहल करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। इस श्रद्धांजलि सभा में पूर्व महासचिव प्रदीप दावा, ओमप्रकाश ढाल, देवराज कटारिया, गगनदीप, महावीर चौहान, मुकेश, लक्ष्मण, श्रवण, सुखदेव, तरुण सहित बड़ी संख्या में युवाओं और गणमान्य नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
