टीम महवा ने फादर्स क्रिकेट में दिखाई दमखम, मातृ शक्ति के जोश ने पूरे मैदान में भर दी नई रौनक।
क्रिकेट से लेकर टग ऑफ वॉर और मटकी खेल तक हर मुकाबले में दिखी सादगी।
मनोज खंडेलवाल
भीम प्रज्ञा न्यूज़.दौसा।
टीकाराम पालीवाल स्टेडियम में शनिवार का दिन किसी बड़े मेले जैसा दिखा, जहाँ द बौहराज ग्लोबल स्कूल की ओर से आयोजित फादर्स क्रिकेट लीग और मदर्स स्पोर्ट्स चैंपियनशिप का पहला दिन खेल, तालियों और गांव की परिचित रौनक से भर गया। सुबह-सुबह ही मैदान में अभिभावकों, विद्यार्थियों और विद्यालय स्टाफ की भीड़ जमा होने लगी, और जैसे ही मुकाबले शुरू हुए, पूरा स्टेडियम ग्रामीण उत्साह, तानों-ठहाकों और तालियों की गूंज से जीवंत हो उठा। फादर्स क्रिकेट लीग के पहले मैच में टीम बालाजी और टीम महवा आमने-सामने उतरीं। टीम बालाजी ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 89 रन का लक्ष्य रखा, लेकिन जवाब में टीम महवा ने मानो ठान लिया हो कि मुकाबला लंबा नहीं खिंचेगा। महवा के कप्तान शिवकुमार मीणा ने 7 चौकों की आतिशी पारी खेलते हुए 37 रन बनाकर मैच को एकतरफा कर दिया और आठवें ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। मैदान में मौजूद हर ग्रामीण दर्शक ने तालियों और शोर से उनका स्वागत किया। शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया, और वह गांव के युवाओं में चर्चा का केंद्र बने रहें।मातृ शक्ति की प्रतियोगिताओं ने तो पूरे माहौल को और भी रंगीन बना दिया। टग ऑफ वॉर में यशोधरा, पूजा कुमारी जोगी और श्वेता सिंघल की टीम ने जोर आज़माइश में शानदार जीत दर्ज की, जबकि दूसरी टीम की महिलाओं ने भी अद्भुत दमखम दिखाकर दर्शकों को खूब रोमांचित किया। वहीं ब्लाइंडफोल्ड एंड टच द मटकी प्रतियोगिता में ग्रामीण महिलाओं की सहज फुर्ती, संतुलन और खेलभावना देखते ही बनती थी। इस प्रतियोगिता में ललिता भारद्वाज प्रथम, श्वेता सिंघल द्वितीय और रचना देवी तृतीय स्थान पर रहीं। विद्यालय परिवार, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीण अभिभावकों ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। हर अच्छे शॉट, हर जीत और हर प्रयास पर तालियों की गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती रही। बच्चों के चेहरे पर खुशी, माताओं की भागीदारी में आत्मविश्वास और पिताओं की खेल भावना ने कार्यक्रम को एक पारिवारिक उत्सव जैसा बना दिया, जैसा किसी गांव में बड़े त्योहार या खेल दंगल के दौरान देखने को मिलता है। पहले ही दिन द बौहराज ग्लोबल स्कूल की स्पोर्ट्स लीग ने यह साबित कर दिया कि खेल सिर्फ मुकाबला नहीं, बल्कि एकता, उत्साह और ग्रामीण समाज की जीवंतता का प्रतीक है। आने वाले मुकाबलों को लेकर अब बच्चों से लेकर बड़ों तक में उत्सुकता और भी बढ़ गई है।
