विधि विरुद्ध सर्वे निरस्त कर पीडब्ल्यूडी भूमि से सीधा मार्ग निकालने की रखी मांग।
मनोज खंडेलवाल
भीम प्रज्ञा न्यूज़.महवा। उपखंड क्षेत्र के ग्राम रसीदपुर और भापुर के ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा एनएच–921 के महवा–मंडावर से राजगढ़ खंड में प्रस्तावित 4/6 लेन चौड़ीकरण और भूमि अवाप्ति के खिलाफ एकजुट होकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ग्रामीणों ने भूमि अवाप्ति अधिकारी पदेन उपखंड मजिस्ट्रेट महवा को संयुक्त आपत्ति पत्र सौंपते हुए यह आरोप लगाया कि करीब आठ किलोमीटर क्षेत्र में किया गया सर्वे पूरी तरह विधि विरुद्ध, आधारहीन और तकनीकी दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है, जिससे अनावश्यक भूमि अधिग्रहण, धार्मिक स्थलों को क्षति और सड़क दुर्घटनाओं का गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। इसे लेकर आपत्तिकर्ता ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित रोड को रसीदपुर और भापुर के कई खसरा नंबरों में जानबूझकर “एस” घुमाव देकर दर्शाया गया है, जिससे गांवों के दो प्राचीन मंदिर सीधे रूप से प्रभावित हो रहे हैं। ये मंदिर वर्षों से ग्रामीण आस्था के केंद्र हैं और यदि इस सर्वे के अनुसार निर्माण किया जाकर इन मंदिरो को नुकसान पहुंचाया गया तो क्षेत्रीय ग्रामीणो की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचेगी। साथ ही ग्रामीणो ने आपत्ति पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि एसएच–35 के आगे सार्वजनिक निर्माण विभाग की लगभग 7200 वर्गमीटर भूमि आज भी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है, बावजूद इसके निजी काश्तकारों की भूमि पर रोड ले जाना न केवल अव्यावहारिक है बल्कि सरकारी खजाने पर अनावश्यक मुआवजे का बोझ डालने वाला कदम है। आपत्तिकर्ता ग्रामीणों का तर्क है कि यदि सड़क को पीडब्ल्यूडी की उपलब्ध भूमि से सीधा निकाला जाए तो न तो एस घुमाव बनेगा, न दुर्घटनाओं की आशंका रहेगी और न ही किसी काश्तकार की भूमि अवाप्त करनी पड़ेगी। इससे मार्ग करीब 500 मीटर तक छोटा होगा, बाणगंगा नदी पर प्रस्तावित पुलिया के साथ सीधा और सुरक्षित कॉरिडोर बनेगा तथा ग्राम भापुर की भूमि पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। वहीं ग्रामीणों का दावा है कि वर्तमान में संचालित मार्ग पीडब्ल्यूडी मानकों के अनुरूप है और उसे उसी स्थिति में चौड़ा किया जा सकता है।
साथ ही ग्रामीणों ने दी गई आपत्ति में बताया कि विधि विरुद्ध सर्वे के खिलाफ सिविल न्यायालय महवा में वाद दायर किया गया था, जिस पर न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश जारी होने के बावजूद 28 नवंबर 2025 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया। आरोप है कि गजट में उन खसरा नंबरों को भी शामिल किया गया है, जिन पर न्यायालय का स्टे प्रभावी है, जो न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है। इतना ही नहीं, यह गजट न तो किसी स्थानीय अखबार में प्रकाशित कराया गया और न ही न्यायालय में संबंधित नक्शा पेश किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।आपत्तिकर्ता ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि एनएच–921 चौड़ीकरण के लिए नया, निष्पक्ष और नियमानुसार सर्वे कराया जाए, कठिन एस घुमाव को पूरी तरह समाप्त कर पीडब्ल्यूडी की उपलब्ध सरकारी भूमि से सीधा मार्ग निकाला जाए और न्यायालय के आदेशों की पूर्ण पालना सुनिश्चित की जाए, ताकि विकास कार्य जनहित में हो और गांवों की आस्था, जमीन व भरोसे पर आघात न बने। इस मौके पर प्रवीण शर्मा, सांवलिया गुर्जर, मुकेश मीणा, नागेंद्र औघड़नाथ, छोटा सैनी, लख्मीचंद मीणा, चेतराम मीणा, अक्षय गुर्जर, सेवानिवृत्त उपजिला कलेक्टर भरतलाल (समलेटी), जीतेन्द्र नांगलोत, मनोज गौसिंहा, लाखन मीणा, यादराम, हरिराम, जगदीश मेंबर, राकेश (ठेकड़ा), महेन्द्र, कल्लू, संजय, सुरेश प्रजापत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहें।

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