भीम प्रज्ञा न्यूज़.झुंझुनूं।
मृत्यु संस्कारों के दौरान बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों और मिशन से संबंधित पुस्तकों की स्टॉल लगाया जाना समाज में बढ़ती जागरूकता और वैचारिक परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण झुंझुनूं जिले के महरूमपुर निवासी बनवारी लाल करोल की पत्नी दिवंगत गोदावरी देवी के मृत्यु संस्कार के अवसर पर देखने को मिला। दिवंगत गोदावरी देवी के मृत्यु संस्कार बौद्ध रीति से पूज्य भंते विनयपाल जी के सान्निध्य में संपन्न कराए गए। इस अवसर पर बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर मिशन से संबंधित पुस्तकों की स्टॉल लगवाई गई, जहां से हजारों रुपये का साहित्य क्रय किया गया। उपस्थित लोगों ने इसे एक सराहनीय और अनुकरणीय पहल बताया। दिवंगत के सुपुत्र राजेंद्र करोल एवं अशोक करोल ने अपनी माताजी के मृत्यु संस्कार बौद्ध रीति से संपन्न कराकर बाबा साहेब के मिशन को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। साथ ही दिवंगत की स्मृति में परिवार की ओर से उपस्थित सभी लोगों को नववर्ष का “जय भीम” कैलेंडर भी वितरित किया गया। इस ऐतिहासिक एवं वैचारिक पहल में सुरेश जी चोपड़ा एवं मनीराम जी देवरोड़ का विशेष मार्गदर्शन रहा।
दिवंगत गोदावरी देवी के परित्राण एवं शांति पाठ के अवसर पर बनवारी लाल करोल, नवरंग करोल, भागीरथ करोल, गोपीराम करोल (अधिशासी अभियंता), अमित करोल, सुरेश जी चोपड़ा, जगदीश चोपड़ा, डॉ. गुरुदयाल सिंघल, मातादीन, संजय, दीपक, मूलचंद, जगदीश कलिया, रामस्वरूप कलिया, बी.एल. बौद्ध, धर्मपाल बौद्ध भोबिया, दुर्गा प्रसाद बौद्ध, महेंद्र, रघुवीर, सिद्धार्थ करोल, श्रुति, सुमित्रा करोल, अनीता करोल, उषा, किरण, राधा करोल, शारदा सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने दिवंगत के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। यह आयोजन सामाजिक चेतना, समानता और बौद्ध विचारधारा के प्रसार की दिशा में एक प्रेरक पहल के रूप में याद किया जाएगा।

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