युगद्रष्टा शिक्षाविद् संदीप नेहरा: ‘नोबल’ सेवा संकल्प से गढ़ते भविष्य
भीम प्रज्ञा मोटिवेशनल स्टोरी।
शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य को गढ़ने की प्रक्रिया है—इस विचार को अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर कार्य कर रहे हैं नोबल शिक्षण समूह के निदेशक इंजीनियर संदीप नेहरा। आधुनिक शिक्षा जगत में वे उस चेतना का नाम हैं, जिनकी कर्मठता, नवाचार और सेवा भाव ने हजारों विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा दी है। वर्तमान में गांव देवलावास से शिक्षा की यात्रा शुरू कर बुहाना, पचेरी सहित आधा दर्जन संस्थाओं का संचालन कर रहे हैं।
संवाद नहीं, जीवन परिवर्तन की प्रक्रिया
संदीप नेहरा के सानिध्य में बिताया गया समय साधारण बातचीत नहीं होता, बल्कि वह अनुभव होता है जो सोच को बदल देता है। वे विद्यार्थियों को केवल विषय नहीं पढ़ाते, बल्कि उन्हें जीवन जीने की दृष्टि देते हैं। आत्मविश्वास, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता उनके शिक्षण दर्शन की बुनियाद है।
‘पारस व्यक्तित्व’: साधारण को असाधारण बनाने की क्षमता

उनका व्यक्तित्व प्रेरणा का ऐसा स्रोत है, जहाँ साधारण पृष्ठभूमि से आया विद्यार्थी भी स्वयं को विशेष महसूस करता है। जिस प्रकार पारस के स्पर्श से लोहा सोना बन जाता है, उसी प्रकार उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थी अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें सामर्थ्य में बदलना सीखते हैं। यही कारण है कि उन्हें शिक्षा जगत का ‘पारस व्यक्तित्व’ कहा जाता है।
सीमाओं से परे सेवा और पहचान
संदीप नेहरा की पहचान केवल राजस्थान या हरियाणा तक सीमित नहीं रही। उनकी शिक्षण परंपरा और सेवा भावना की गूंज नेपाल तक सुनाई देती है। आज देश के अनेक प्रतिष्ठित सरकारी विभागों और संस्थानों में उनके शिष्य कार्यरत हैं, जो अपने आचरण और कार्यकुशलता से अपने गुरु के संस्कारों को जीवंत कर रहे हैं।
नवाचार की सोच: शिक्षक नहीं, शिक्षण पद्धति बदलती है
जहाँ निजी शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों का बार-बार बदलना आम बात मानी जाती है, वहीं संदीप नेहरा की कार्यशैली इससे बिल्कुल अलग है। उनका मानना है कि शिक्षक अनुभव की पूंजी होते हैं, इसलिए बदलाव शिक्षण शैली में होना चाहिए, न कि शिक्षकों में। अनुभव और नई सोच के समन्वय से वे हर सत्र में सफलता का नया अध्याय जोड़ते हैं।
अंतिम पंक्ति के विद्यार्थी के लिए संघर्ष
संदीप नेहरा का स्पष्ट मत है कि आर्थिक अभाव किसी प्रतिभा की हत्या न करे। इसी सोच के साथ उन्होंने न्यूनतम शुल्क संरचना में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुलभ बनाया। उनका उद्देश्य केवल डिग्री दिलाना नहीं, बल्कि समाज के लिए जिम्मेदार और चरित्रवान नागरिक तैयार करना है।
संस्कार, शिक्षा और सामाजिक चेतना का संगम
उनके लिए शिक्षा का अर्थ संस्कारों के बिना अधूरा है। वे विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, नैतिकता और संवेदनशीलता का विकास करने पर विशेष जोर देते हैं, जिससे शिक्षा समाज परिवर्तन का माध्यम बन सके।
पितृ स्मृति से समाज सेवा की प्रेरणा
अपने पिता स्वर्गीय एस.एस. नेहरा की पुण्यतिथि को वे सामाजिक प्रेरणा के पर्व के रूप में मनाते हैं। इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों और कर्मठ समाजसेवियों को सम्मानित किया जाता है। यह आयोजन केवल पुरस्कार वितरण नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को आगे बढ़ने का संकल्प देने वाला मंच बन चुका है।
गौ-सेवा और सादगी भरा जीवन
भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों से गहराई से जुड़े संदीप नेहरा गौ-सेवा को सामाजिक कर्तव्य मानते हैं। गौशालाओं को सहयोग और स्वयं का सादा जीवन उनके विचारों की सच्चाई को दर्शाता है। बड़े संस्थान के नेतृत्वकर्ता होने के बावजूद उनकी सरलता उन्हें आमजन के निकट रखती है।
परिवार से संस्थान तक—सभी के अपने
एक आदर्श पिता, संवेदनशील मार्गदर्शक और संस्थान में परिवार जैसा वातावरण—हर भूमिका में उन्होंने श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया है। वे कर्मचारियों और विद्यार्थियों को केवल सहयोगी नहीं, परिवार का हिस्सा मानते हैं।
पुरुष से पुरुषोत्तम की ओर यात्रा
स्वार्थ से परे जाकर सबकी उन्नति में अपनी उन्नति देखने की भावना उन्हें विशिष्ट बनाती है। यही निस्वार्थ दृष्टि उन्हें साधारण व्यक्ति से ऊपर उठाकर समाज का मार्गदर्शक बनाती है।
भविष्य की मजबूत नींव
इंजीनियर संदीप नेहरा शिक्षा के क्षेत्र में वह परिवर्तन हैं जो वर्तमान को सुधारते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए सशक्त, संस्कारित और जागरूक समाज की नींव रख रहे हैं। नोबल शिक्षण समूह से जुड़ा प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को इस परिवर्तनकारी यात्रा का गौरवशाली सहभागी मानता है।


प्रेरक व्यक्तित्व इंजिनियर संदीप नेहरा जी के कृतित्व को सलाम।
लेखक एडवोकेट हरेश जी पंवार का लेखन शानदार है।