कोटा, व सीकर छोड़ गांव लौटे विद्यार्थियों के लिए उम्मीद बना MDCL
चिड़ावा क्षेत्र में निःशुल्क कोचिंग, टेस्ट सीरीज और काउंसलिंग शुरू
रजनीकांत मिश्रा
भीम प्रज्ञा न्यूज़.चिड़ावा।
नीट परीक्षा से जुड़े पेपर आउट विवाद और संभावित री-नीट परीक्षा की चर्चाओं के बीच विद्यार्थियों और अभिभावकों में चिंता का माहौल बना हुआ है। कोटा, सीकर और जयपुर जैसे बड़े शहरों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अनेक विद्यार्थी परीक्षा के बाद अपने गांव लौट आए हैं। ऐसे में दोबारा तैयारी को लेकर विद्यार्थियों के सामने मानसिक दबाव, आर्थिक संकट और संसाधनों की समस्या खड़ी हो गई है। इसी परिस्थिति में चिड़ावा क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायी पहल करते हुए एमडीसीएल (M D Career Line) ने विद्यार्थियों के हित में निशुल्क कोचिंग, टेस्ट सीरीज और काउंसलिंग कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। संस्थान के निदेशक सुनील डांगी ने बताया कि संभावित री-नीट परीक्षा को ध्यान में रखते हुए 14 मई 2026 से संस्थान परिसर में विद्यार्थियों के लिए नियमित रूप से निःशुल्क टेस्ट सीरीज और मार्गदर्शन सत्र आयोजित किए जाएंगे।
“गांव की प्रतिभाएं संसाधनों के अभाव में पीछे न रहें” — सुनील डांगी
संस्थान निदेशक सुनील डांगी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के अनेक विद्यार्थी कोटा और सीकर छोड़कर वापस गांव लौट आए हैं। ऐसे में यदि वे दोबारा बड़े शहरों में जाकर रहेंगे तो किसान और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एमडीसीएल का उद्देश्य केवल कोचिंग देना नहीं, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को आत्मविश्वास और सही दिशा देना है ताकि वे विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से भटकें नहीं। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे अफवाहों और अनावश्यक तनाव से बचें तथा बच्चों को सकारात्मक वातावरण में तैयारी जारी रखने के लिए प्रेरित करें। संस्थान द्वारा विद्यार्थियों को नीट पैटर्न आधारित प्रश्नपत्र, समयबद्ध परीक्षा वातावरण, अनुभवी फैकल्टी का मार्गदर्शन और मानसिक काउंसलिंग सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
होम ट्यूशन से एमडी समूह तक का प्रेरक सफर
शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके सुनील डांगी का संघर्ष स्वयं ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय है। किसान परिवार से निकलकर उन्होंने सीमित संसाधनों में शिक्षा का दीप जलाया और होम ट्यूशन से शुरुआत करते हुए आज एमडी समूह को शिक्षा जगत में नई पहचान दिलाई है।पूर्व में भी उनकी संघर्ष यात्रा को लेकर “भीम प्रज्ञा” ने प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था, जिसमें यह बताया गया था कि कैसे ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को पलायन से रोकने और स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्होंने कोटा जैसे बड़े शिक्षा केंद्रों की राह छोड़ अपने क्षेत्र में शिक्षण अभियान शुरू किया। आज उसी सोच का परिणाम है कि चिड़ावा क्षेत्र के विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रह गए हैं।
विद्यार्थियों को मिलेगा परीक्षा जैसा वातावरण
एमडीसीएल प्रबंधन के अनुसार टेस्ट सीरीज में विद्यार्थियों को वास्तविक परीक्षा जैसा वातावरण प्रदान किया जाएगा, जिससे उनकी तैयारी निरंतर बनी रहे। नियमित अभ्यास से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा तथा परीक्षा के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।संस्थान ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पहल केवल व्यवसायिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और ग्रामीण शिक्षा जनजागरण की भावना से शुरू की गई है।
ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की नई उम्मीद
री-नीट को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच एमडीसीएल की यह पहल चिड़ावा क्षेत्र के विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। स्थानीय स्तर पर निःशुल्क मार्गदर्शन और टेस्ट सुविधा मिलने से अब ग्रामीण प्रतिभाओं को आर्थिक और मानसिक दबाव से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध होता रहा, तो आने वाले समय में गांवों की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान स्थापित करेंगी।

