शबरी के जूठे बेर खाकर श्री राम ने दिया समरसता का संदेश :- धर्मदास महाराज

भीम प्रज्ञा न्यूज़.मंडावा। फतेहपुर रोड स्थित गोयनका धर्मशाला में चल रही नो दिवसीय संगीतमय श्री राम कथा के सातवें दिन भगवान श्रीराम की लीलाओं के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए रामकथा में सीता हरण, जटायु उदार और भीलनी (शबरी) के प्रसंग पर प्रकाश डाला गया। कथावाचक श्री धर्मदास महाराज अयोध्या ने भगवान रामकथा में सीता हरण, जटायु उदार और भीलनी (शबरी) के प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जहाँ रावण साधु वेश में छल से सीता का हरण करता है, जटायु उन्हें बचाने के लिए प्राण त्यागते हैं, और बाद में भगवान राम शबरी (भीलनी) के जूठे बेर खाकर उनका उद्धार करते हैं। उन्होंने बताया कि ये भक्ति और मर्यादा के प्रतीक है जिसमें जटायु का बलिदान और शबरी की भक्ति को दर्शाता है। उन्होंने सीता हरण प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंचवटी में राम, सीता, लक्ष्मण वनवास के दौरान रावण मारीच को स्वर्ण मृग बनाकर भेजता है। सीता के आग्रह पर राम मृग के पीछे जाते हैं, और रावण साधु का वेश धारण कर रेखा लांघने के बाद सीता का हरण कर लेता है। धर्मदास महाराज ने जटायु उद्गार को वीरतापूर्ण संघर्ष बताते हुए कहा कि  सीता की पुकार सुनकर वृद्ध गिद्ध जटायु रावण से युद्ध करते हैं और उसके पंख कट जाते हैं। राम को सूचना मिलने पर वे घायल होकर गिरते हैं और राम-लक्ष्मण को सीता हरण की जानकारी देते हैं, जिसके बाद राम उनका अंतिम संस्कार करते हैं। इस अवसर पर शबरी भीलनी के बेर प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए उसे भक्ति और प्रेम का प्रतीक बताया। उन्होंने बताया कि  सीता की खोज के दौरान, भगवान राम शबरी नामक भीलनी से मिलते हैं, जो भगवान की भक्त थीं।  शबरी अपने प्रेम और भक्ति के कारण भगवान को जूठे बेर खिलाती हैं, और राम उनके जूठे बेर खाकर उन्हें मोक्ष प्रदान करते हैं। कथा के सातवें दिन शनिवार को गोयनका धर्मशाला में सीताहरण, जटायु उद्धार लीला का सजीव मंचन कर झाकियां सजाई गई। माता सीता के रावण द्वारा हरण कर लिए जाने के बाद भगवान राम लक्ष्मण के रुदन क्रंदन को देख दर्शकों की आंखे नम हो गई। सार्वजनिक आयोजित कथा के सदस्य प्रदीप सोनी, अशोक तंवर, सुनील सोनी, राकेश सोनी, योगेश भूतिया, संदीप कुमार सेन, मनमोहन सेन , रामस्वरूप चोटिया ने बताया कि नो दिवसीय श्री राम कथा के माध्यम से क्षेत्र में धर्म, संस्कार और भक्ति का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। कथा में मुख्य यजमान प्रदीप कुमार जेजूसरिया सपत्नीक ने विधिवत पूजा पाठ कर धार्मिक कार्यक्रमो को पूरा किया। कथा में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण किया।