भाभी की जमीन को लेकर हुआ था विवाद, हिस्ट्रीशीटर समेत 2 की हत्या करवाई थी
भीम प्रज्ञा न्यूज़.दौसा। सीकर के हिस्ट्रीशीटर श्रवण भदवासी ने कोर्ट में मंगलवार शाम सरेंडर कर दिया है। झुंझुनूं में अपनी भाभी की 24 बीघा जमीन पर कब्जे के चलते गैंगवॉर हुई थी। इसमें हिस्ट्रीशीटर कृष्णकांत उर्फ रविकांत उर्फ गोलू स्वामी और सुनिल सुंडा की मौत हो गई थी। सूचना के बाद जाब्ते के मौके पर पहुंचे कोतवाली थाना इंचार्ज भगवान सहाय की टीम ने बदमाश को हिरासत में ले लिया। बदमाश के सरेंडर करने का पता चलते ही कोर्ट परिसर छावनी बन गया। जिसे कड़े सुरक्षा बंदोबस्त के बीच बैरक में शिफ्ट किया गया है। कार्रवाई के बाद उसे झुंझुनूं को सुपुर्द किया जाएगा।
*भाभी की जमीन हड़पना चाहता था*
12 दिसंबर को नवलगढ़ के खिरोड़ गांव में हुई गैंगवार के विवाद की वजह सीकर जिले के भदवासी गांव निवासी हिस्ट्रीशीटर श्रवण फगेड़िया से जुड़ी है। श्रवण दादिया थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उसकी नजर अपने सौतेले भाई के परिवार की करीब 30 करोड़ रुपए की बेशकीमती 25 बीघा जमीन पर थी। इस जमीन को हथियाने को लेकर श्रवण पर अपने सौतेले भाई की हत्या कराने का भी मुकदमा चल रहा है। इसी के चलते उसका अपने सौतेले भाई की पत्नी (भाभी) और उसके परिजनों से भी विवाद चल रहा था। श्रवण से निपटने के लिए उसकी भाभी अपने पति की इस 25 बीघा जमीन को खिरोड़ गांव के हिस्ट्रीशीटर और 0056 के नाम से गैंग चलाने वाले रविंद्र कटेवा से महज 5-7 करोड़ रुपए में सौदा कर लिया था। जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी रविंद्र कटेवा के नाम करवा दी थी। जानकारी के मुताबिक, रविंद्र कटेवा लंबे समय से विवादित प्रॉपर्टी खरीदने और उन पर दादागिरी से कब्जा करने का काम कर रहा था। करोड़ों रुपए के फायदे का सौदा उसने झट से कर लिया।
*झुंझुनूं गैंगवार: 12 दिसंबर को क्या हुआ था?*
रविंद्र कटेवा पर घर में हुआ हमला: 12 दिसंबर सुबह 9 से 9:30 के बीच आरके ग्रुप 0056 का मुख्य सरगना हिस्ट्रीशीटर रविंद्र कटेवा अपने घर (नवलगढ़ थाना इलाके के खिरोड़ गांव) में था। यहां पर उसके साथ सुनील सुंडा भी मौजूद था। इसी दौरान कृष्णकांत और अन्य तीन बदमाशों ने उस पर हमला कर दिया।
*सुनील को गोली मारी:*
सुनील उनके पीछे भागा और फिर उनकी गाड़ी का स्टेयरिंग पकड़ लिया। इसी दौरान कृष्णकांत और उसके साथी ने सुनील पर फायरिंग कर दी, जिससे वह घायल हो गया। इसके बाद बदमाश मौके से फरार हो गए। घटना के बाद सुनील को सीकर लाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
*गांव वालों ने घेरकर पकड़ा:*
कृष्णकांत और उसके साथी मुख्य सड़क की बजाय गांव के कच्चे रास्तों से फरार होने लगे, लेकिन उन्हें थोड़ी दूर चलने के बाद रास्ता नहीं मिला। कटेवा और उसके साथियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर कृष्णकांत, पिंटू और राजेंद्र को पकड़ लिया। इसके बाद उनके साथ मारपीट भी की गई।
*कृष्णकांत की हत्या या सुसाइड?*
पुलिस को इसके बाद कृष्णकांत की लाश मिली, उसके सिर में भी गोली लगी हुई थी। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस बारे में स्पष्ट नहीं किया है कि उस पर फायरिंग हुई या उसने खुद ने ही सुसाइड किया है। वहीं लोगों की पिटाई के चलते पिंटू और राजेंद्र भी घायल हो गए, जिन्हें भी इलाज के लिए पहले सीकर लाया गया। फिर यहां से उन्हें जयपुर भेज दिया गया।
*हिस्ट्रीशीटर की दुकानों को तोड़ा था*
नवलगढ़ में 12 दिसंबर को हुई गैंगवार के बाद सीकर पुलिस और प्रशासन एक सप्ताह पूर्व बड़ा एक्शन लेते हुए आरोपी हिस्ट्रीशीटर श्रवण भदवासी की भादवासी गांव में स्थित दुकानों को तोड़ दिया था। इन दुकानों में शराब की अवैध ब्रांच भी चलती थी। यहां गैंगवार के बाद 15 दिसंबर को सीकर पुलिस ने रविंद्र कटेवा और श्रवण भादवासी गैंग से जुड़े लोगों के घरों पर दबिश भी दी थी।
