शिक्षक अपनी पीठ थपथपाते रहें, प्रतिभा रह गई हाशिये पर
शिक्षक अपनी पीठ थपथपाते रहें, प्रतिभा रह गई हाशिये पर
भीम प्रज्ञा न्यूज़.झुंझुनूं।
“द्रोण गुरु तुम अब भी बाज नहीं आए हो, एकलव्य का अंगूठा मांगने की तो अब हिम्मत नहीं, पर प्रैक्टिकल में फेल करने से तुम कब कतराए हो…” वरिष्ठ साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि की ये पंक्तियां आज झुंझुनू जिले की शिक्षा व्यवस्था पर हूबहू लागू होती नजर आ रही हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर जब जिले में प्रतिभा सम्मान समारोहों की सूचियां तैयार की जा रही थीं, उसी वक्त झुंझुनू जिले की एकमात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभा को चुपचाप नजरअंदाज कर दिया गया।
झुंझुनू की इकलौती इंस्पायर प्रतिभा, फिर भी सूची से बाहर
बुहाना उपखंड के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, लांबी अहीर में अध्ययनरत छात्र मयंक पुत्र संजय कुमार मेघवाल ने इंस्पायर अवार्ड योजना के अंतर्गत विज्ञान के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कराई।मूल रूप से लांबी जाट गांव निवासी मयंक ने संसाधनहीन ग्रामीण परिवेश और सरकारी स्कूल की सीमाओं के बावजूद अपने वैज्ञानिक नवाचार के दम पर जिले, राज्य और अब राष्ट्रीय स्तर तक जगह बनाई।
नागौर से राष्ट्रीय मंच तक झुंझुनू का प्रतिनिधित्व
मयंक ने नागौर में आयोजित राज्य स्तरीय इंस्पायर प्रतियोगिता में झुंझुनू जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए भाग लिया। चयन समिति ने उसके प्रोजेक्ट को न केवल सराहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए चयनित किया। गौर करने वाली बात यह है कि पूरे झुंझुनू जिले से मयंक एकमात्र छात्र है, जिसने इंस्पायर अवार्ड में राज्य स्तर पार कर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी जगह बनाई।
फिर सवाल—नाम सम्मान सूची तक पहुंचा ही क्यों नहीं?

इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद, विद्यालय स्तर से लेकर जिला शिक्षा विभाग तक मयंक का नाम सम्मान सूची के लिए भेजा ही नहीं गया।
जिस छात्र ने जिले का नाम रोशन किया, वही छात्र अपने ही स्कूल और अपने ही तंत्र में उपेक्षा का शिकार हो गया।
सम्मान की दौड़ में अधिकारी, प्रतिभा पीछे छूट गई
सूत्र बताते हैं कि विद्यालय की प्रधानाचार्य सुशीला कुल्हार स्वयं को सम्मान सूची में शामिल कराने को लेकर सक्रिय रहीं, लेकिन विद्यालय की वास्तविक प्रतिभा को नजरअंदाज कर दिया गया। यह प्रश्न अब शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सीधा प्रहार करता है—क्या सम्मान केवल पद के लिए है, उपलब्धि के लिए नहीं? क्या दलित पृष्ठभूमि से आने वाली प्रतिभा अब भी असहज कर देती है?
परिवार को लगा गहरा आघात
जब गणतंत्र दिवस की सूची में मयंक का नाम नहीं आया, तो परिवार के मन में गहरी पीड़ा और असमंजस पैदा हुआ। परिजनों को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि
क्या राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना भी सम्मान के लिए पर्याप्त नहीं है?
यह सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक होनहार बच्चे के आत्मविश्वास पर गहरी चोट है।
दलित प्रतिभा का दमन या संस्थागत उदासीनता?
यह मामला अब केवल एक छात्र तक सीमित नहीं रह गया है। यह उस संस्थागत मानसिकता को उजागर करता है, जिसमें वंचित वर्ग की प्रतिभाओं को पहचान देने में उदासीनता बरती जाती है।
यदि ऐसे उदाहरणों पर समय रहते संज्ञान नहीं लिया गया, तो सरकारी स्कूलों से निकलने वाली प्रतिभाएं मंच तक पहुंचने से पहले ही टूट जाएंगी।
प्रशासन से सीधी मांग
छात्रा के परिजनों की मांग है कि जिला कलेक्टर स्वयं इस प्रकरण की जांच कराएं, जिम्मेदार अधिकारियों और विद्यालय प्रशासन की जवाबदेही तय हो।
छात्र मयंक पुत्र संजय कुमार मेघवाल को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाए क्योंकि यदि आज झुंझुनू का “एकलव्य” नजरअंदाज हुआ, तो कल शिक्षा व्यवस्था खुद कठघरे में खड़ी होगी।

luk88.vn? Oh man, that takes me back! Great place to chill and play, tons of cool stuff going on. Definitely worth checking out if you’re new to the scene! Find it at luk88.vn
Just downloaded tải b66 club, pretty easy to install. Let’s see how lucky I get! You can download it here: tải b66 club
Been playing ‘b66.club game đổi thưởng’ for a bit. The ‘đổi thưởng’ part definitely caught my attention. It’s fun, and I’ve managed to win a few times. You might like it: b66.club game đổi thưởng