पात्र तक पहुंचने से पहले दम तोड़ रहीं सरकारी योजनाएं
दो साल से अधूरा पड़ा निर्माण, पंचायत प्रशासन पर अनदेखी और धांधली के आरोप
भीम प्रज्ञा न्यूज़.खेतड़ी
सरकार ग्रामीण गरीब और पशुपालकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए करोड़ों रुपए की योजनाएं चला रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण कई योजनाएं पात्र लोगों तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देती हैं। खेतड़ी उपखंड की राजोता ग्राम पंचायत में सामने आया कैटल शेड योजना का मामला सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।ग्राम पंचायत राजोता के लगरिया की ढाणी निवासी अनुसूचित जाति की महिला सुशीला देवी के नाम वर्ष 2023 में कैटल शेड योजना स्वीकृत हुई थी। परिवार को उम्मीद थी कि इस योजना से पशुपालन को मजबूती मिलेगी और आर्थिक स्थिति सुधरेगी, लेकिन योजना अब उनके लिए परेशानी और कर्ज का कारण बन गई है।
पंचायत के कहने पर शुरू कराया निर्माण, बीच में छोड़ दिया काम
पीड़ित परिवार का आरोप है कि ग्राम पंचायत के निर्देश पर कैटल शेड के लिए नींव खुदवाई गई और डस्ट-पत्थर डलवाकर निर्माण कार्य शुरू कराया गया। मजदूरी और मिस्त्री का खर्च उठाने के लिए परिवार ने उधार लेकर काम शुरू कर दिया। करीब चार फीट तक दीवार निर्माण होने के बाद अचानक काम बंद हो गया और पंचायत की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला। परिवार का कहना है कि निर्माण कार्य की राशि खाते में आने का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें योजना की स्वीकृत राशि नहीं मिली। मजदूरों और मिस्त्रियों की मजदूरी चुकाने के लिए मजबूर होकर परिवार को अपनी बकरियां तक बेचनी पड़ीं।
बकरियां बिकीं, कर्ज बढ़ा, अब पशुपालन भी संकट में
पहले यह परिवार पशुपालन कर किसी तरह अपना गुजारा चला रहा था, लेकिन कैटल शेड योजना के अधूरे निर्माण और भुगतान नहीं मिलने से परिवार आर्थिक संकट में फंस गया। मजदूरी का भुगतान करने के बाद अब परिवार पर अतिरिक्त कर्ज का बोझ भी बढ़ गया है। ग्रामीणों के अनुसार कैटल शेड निर्माण के लिए करीब डेढ़ लाख रुपए की राशि स्वीकृत होती है, लेकिन लाभार्थी को उसका लाभ नहीं मिल पाया।
ग्रामीणों में रोष, निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीण रामनिवास लादी सहित कई लोगों ने आरोप लगाया कि पंचायत स्तर पर गरीब परिवारों के साथ योजनाओं के नाम पर धांधली की जा रही है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर पीड़ित परिवार को स्वीकृत राशि दिलाने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचे तो गरीब परिवारों की स्थिति सुधर सकती है, लेकिन भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता के कारण सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित होकर रह जाती हैं।
व्यवस्था पर बड़ा सवाल
राजोता ग्राम पंचायत का यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीण गरीबों की हकीकत को उजागर करता है जो सरकारी योजनाओं पर भरोसा कर अपने सपने संजोते हैं, लेकिन भ्रष्ट तंत्र और लापरवाही के कारण उनका भरोसा टूट जाता है। गरीब पशुपालक आज भी अधूरे कैटल शेड और खाली बैंक खाते को देखकर सरकारी सहायता का इंतजार कर रहा है।

