पिता के निधन और मां के छोड़कर चले जाने के बाद ग्रामीण सेवा शिविर में मिली संवेदनशील पहल, दादी बबिता पत्नी विजय रावत को मिला पालनहार का अधिकार
पवन कुमार शर्मा
भीम प्रज्ञा न्यूज.मंडावा। राज्य सरकार के ‘ग्रामीण सेवा शिविर – जनसेवा से जनविश्वास की ओर’ अभियान के तहत पंचायत समिति मंडावा की ग्राम पंचायत अजीतनगर में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर एक असहाय बालक के जीवन में नई उम्मीद लेकर आया। शिविर के दौरान पिता के निधन और मां के छोड़कर चले जाने के बाद बेसहारा हुए प्रियांश के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए उसकी दादी बबिता पत्नी विजय रावत को विधिवत पालनहार के रूप में स्वीकृति प्रदान की गई। शिविर में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों ने सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच एवं सत्यापन किया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद दादी बबिता को प्रियांश का पालनहार घोषित करते हुए स्वीकृति आदेश सौंपे गए। इस निर्णय से अब प्रियांश को कानूनी संरक्षण मिलने के साथ-साथ राज्य सरकार की विभिन्न शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी मिल सकेगा। यह पहल ग्रामीण सेवा शिविरों की संवेदनशील कार्यप्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण बनी, जहां प्रशासन ने केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर एक मासूम के सुरक्षित भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया।
शिविर में क्या हुआ?
प्रियांश के मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच एवं सत्यापन किया गया। नियमानुसार प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उसकी दादी बबिता पत्नी विजय रावत को पालनहार के रूप में स्वीकृति प्रदान की गई।स्वीकृति आदेश मौके पर ही जारी कर परिवार को सौंपे गए।
इस स्वीकृति से होगा लाभ
प्रियांश को कानूनी संरक्षण एवं अधिकारों की सुरक्षा मिलेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य एवं भविष्य से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त होगा। दादी के संरक्षण में सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन का मार्ग प्रशस्त होगा। बालक को सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया पूर्ण होने से भविष्य अधिक सुरक्षित बनेगा।
प्रियांश को प्राप्त हुई सेवाएं, दादी (पालनहार) के नाम स्वीकृति आदेश जारी
सभी आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन, नियमानुसार समस्त प्रशासनिक प्रक्रिया पूर्ण,
भविष्य की विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने की कार्रवाई सुनिश्चित, इन अधिकारियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका तथा ग्रामीण सेवा शिविर में इस मानवीय पहल को सफल बनाने में उपखंड अधिकारी विश्वामित्र मीणा, तहसीलदार डॉ. सुरेंद्र भास्कर, विकास अधिकारी अमित चौधरी, ग्राम पंचायत अजीतनगर की सरपंच मुन्नी देवी, ग्राम विकास अधिकारी निशा कुमावत तथा बाल विकास परियोजना अधिकारी सुगंता जाखड़ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। ग्रामीण सेवा शिविर ने एक बार फिर यह साबित किया कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय से जरूरतमंद परिवारों को समय पर राहत देकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। प्रियांश के लिए यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की नई शुरुआत है।
