श्री लक्ष्मी मठ आश्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने लिया धार्मिक अनुष्ठान में भाग
भीम प्रज्ञा न्यूज़ बुहाना। भारतीय सनातन परंपरा में नौतपा को तप, साधना और लोककल्याण का विशेष काल माना जाता है। इसी आध्यात्मिक परंपरा का निर्वहन करते हुए बुहाना स्थित श्री लक्ष्मी मठ आश्रम एवं गौशाला में आयोजित नौतपा पंचधूणी तपस्या का बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार, पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ श्रद्धापूर्वक समापन हुआ। इस अवसर पर क्षेत्रभर से हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर जनकल्याण, विश्व शांति और मानवता के उत्थान की मंगलकामना की। समापन समारोह के दौरान आश्रम पीठाधीश्वर परम पूजनीय संत श्री चंद्रशेखर आनंदनाथ महाराज के सान्निध्य में धार्मिक अनुष्ठान, हवन-पूजन एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। संत श्री ने अपने आशीर्वचन में कहा कि नौतपा केवल प्राकृतिक ताप का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, तपस्या और लोकमंगल की साधना का अवसर भी है।
प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए तप, त्याग और सेवा की भावना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान भारत में नौतपा का विशेष महत्व रहा है। यह काल अच्छी वर्षा, समृद्ध कृषि और जनजीवन की खुशहाली से जुड़ा माना जाता है। किसानों की उन्नति, प्रकृति के संरक्षण और समाज के कल्याण के लिए की गई तपस्या का सकारात्मक प्रभाव व्यापक स्तर पर पड़ता है। कार्यक्रम में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ पूर्णाहुति दी गई तथा श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने धर्म, अध्यात्म और सेवा के इस महोत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
इस अवसर पर पंडित देवेंद्र शर्मा, मनीराम जोशी, कृष्ण कुमार जोशी, मुकेश रांगेय, डॉ. सुरेश झाड़ोदिया, ओमप्रकाश मरोड़िया, राजेंद्र बलौदा, रमेश बलौदा, विक्रम धुलवा, दिनेश शर्मा, प्रदीप सागवा, मनोहर लाल मैनाना, नरेंद्र आचार्य, नरेश, सुरेश चिड़ावा सहित सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे। धार्मिक वातावरण, भक्ति-संगीत और वैदिक मंत्रोच्चार से आश्रम परिसर भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने संत श्री से आशीर्वाद प्राप्त कर समाज में सद्भाव, सेवा और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया।


